मल्लिकार्जुन खरगे
मल्लिकार्जुन खरगे

कलबुर्गी/वार्ता। पचपन साल के राजनीतिक जीवन में अब तक कोई चुनाव नहीं हारने वाले कांग्रेस के दिग्गज नेता एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे को इस बार कलबुर्गी में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उमेश जाधव की कड़ी चुनौतियों का सामना करना प़ड रहा है।

केंद्र और राज्य में मंत्री के रूप में सेवाएं दे चुके श्री खरगे कलबुर्गी में तीसरे चरण में 23 अप्रैल को होने जा रहे चुनाव में हैट्रिक लगाने के लिए जोर लगा रहे हैं।हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र में श्री खरगे के चुनाव मैदान में होने के कारण कलबुर्गी ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है।

कांग्रेस और भाजपा के प्रमुख स्टार-प्रचारकों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के पक्ष में चुनाव प्रचार किया है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्रियों और फिल्म अभिनेत्री विजया शांति तथा अन्य प्रमुख नेता शामिल हैं।खरगे ने कहा कि वह प्रधानमंत्री तथा भाजपा के अन्य राष्ट्रीय नेताओं के चुनाव प्रचार से विचलित नहीं है।

उन्होंने जोर दिया कि क्षेत्र की जनता का जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र को विशेष दर्जा की सुनिश्चिता को लेकर किए गए संघर्ष, राजमार्ग एवं राष्ट्रीय राजमार्ग तथा ब़डी रेल परियोजनाओं और जिले को हवाई नेटवर्क से जोड़ने जैसी परियोजनाओं की शुरुआत किए जाने के लिए उनके किए गए कामों से सब भली-भांति वाकिफ है।

उन्होंने कहा कि विपक्षी भाजपा के पास कोई अच्छा उम्मीदवार नहीं है और इसीलिए उसने कांग्रेस विधायक जाधव को इस्तीफा देने और अपना उम्मीदवार बनाने का प्रलोभन दिया, जो भाजपा के राजनीतिक दिवालिएपन को अभिव्यक्त करता है। एक पूर्व पार्षद अरुण कुमार का कहना है कि करीब पांच दशक के दौरान खरगे ने जिले के विकास के लिए बहुत कुछ किया है और सभी धर्म एवं वर्ग के लोगों के प्रेम और स्नेह की बदौलत उन्होंने जो भी चुनाव लड़ा, उसमें जीत हासिल की है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा नेता जितना भी जोर लगा लें और आवाज उठाएं, कलबुर्गी की जनता खरगे जैसे नेता को कभी नहीं झुकायेगी। दूसरी तरफ भाजपा उम्मीदवार जाधव ने कहा कि उन्हें लंबनी, लिंगायत, वाल्मिकी और अन्य समुदाय का भारी समर्थन मिल रहा है। क्षेत्र में सर्वाधिक विकास कार्यों के क्रियान्वयन संबंधी खरगे के दावे को खारिज करते हुए उन्होंने कहा कि यह दावा हकीकत से परे है और कम ही विकास का काम हुआ है। जिले के एक राजनीतिक विश्लेषक बासवराज का कहना है कि अन्य चुनावों की तुलना में इस बार कांग्रेस उम्मीदवार के समक्ष कड़ी चुनौती की स्थिति है और चुनाव परिणाम बहुत कुछ सामुदायिक समीकरणों पर निर्भर करेगा।

उन्होंने कहा, अगर सामुदायिक समीकरण हावी होता है तो ‘खरगे रेड जोन’ में होंगे। कांग्रेस नेता ने हालांकि अपने पांच दशक के राजनीतिक जीवन में जाति, वर्ग और धर्म के दायरे से बहुत आगे बढ़ चुके हैं और इस बार भी उन्हें इसका लाभ मिल सकता है। कलबुर्गी लोकसभा क्षेत्र में आठ विधानसभा सीटें है।

वर्तमान में चार विधानसभा सीटों पर कांग्रेस का कब्जा है जबकि तीन भाजपा और एक जनता दल (एस) के खाते में है। कलबुर्गी जिले ने राज्य को दो मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल और धर्म सिंह दिए हैं। कृष्णा, भीमा, बेन्नेटोर और अन्य छोटी नदियों जैसी प्राकृतिक संपदा के बावजूद यह राज्य के सबसे अधिक पिछड़े जिलों में से एक है।

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