sheila dixit
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता शीला दीक्षित के एक बयान के बाद नई बहस शुरू हो गई है। दरअसल शीला दीक्षित ने एक साक्षात्कार में यह माना है कि आतंकवाद का मुकाबला करने में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना में कमजोर थे। साथ ही शीला ने मोदी द्वारा आतंकवाद के खिलाफ उठाए गए कदमों को सियासी फायदे से जोड़कर भी देखा।

एक टीवी चैनल से बातचीत के दौरान जब उनसे 26/11 मुंबई हमले को लेकर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मनमोहन सिंह मोदी की तरह मजबूत और दृढ़ निश्चयी नहीं थे। ऐसा भी लग रहा है कि वे (मोदी) सियासी फायदे के लिए ऐसा कर रहे हैं। शीला दीक्षित के इस बयान के बाद सियासी हलकों सहित सोशल मीडिया में भी बहस होने लगी और आतंकवाद को जवाब देने के लिए मोदी और मनमोहन सिंह की नीतियों की तुलना होने लगी।

हालांकि बाद में शीला दीक्षित ने सफाई दी कि उनके बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया गया। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लग सकता है कि मोदी आतंकवाद के खिलाफ ज्यादा मजबूत हैं लेकिन यह चुनावी स्टंट से ज्यादा कुछ नहीं है। गौरतलब है कि 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तानी आतंकियों ने मुंबई में कत्ले-आम मचाया था, जिसमें 150 से ज्यादा लोगों की जान गई।

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में 14 फरवरी को सीआरपीएफ के काफिले पर आतंकी हमले के बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वाह स्थित जैश-ए-मोहम्मद के प्रशिक्षण कैंप पर कार्रवाई की थी। विदेश मंत्रालय ने माना कि इसमें कई आतंकी मारे गए। इस बीच विपक्ष के कई नेताओं ने कार्रवाई पर सवाल उठाए और आतंकियों के खात्मे के संबंध में सरकार से सबूत मांगे।

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