बेंगलूरु। मुख्यमंत्री सिद्दरामैया ने गुरुवार को गोवा सरकार की उस मांग को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें महादयी जल विवाद को हल करने के लिए गोवा ने न्यायिक अवधि का विस्तार करने का प्रस्ताव दिया था। महादयी मामले पर सर्वदलीय बैठक के बाद संवाददाताओं से बात करते हुए सिद्दरामैया ने कहा, यह कर्नाटक के लोगों की मांग है कि केंद्र सरकार द्वारा महादयी जल विवाद को हल करने के लिए गठित की गई ट्रिब्यूनल को इस वर्ष २० अगस्त तक इस मुद्दे का निपटारा करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव होने वाले राज्य में कोई भी पार्टी इस मुद्दे पर गलत छवि नहीं पेश करना चाहती है और वह भी तब जब मामला चार दशक से लंबित हो। इसलिए सभी दलों की राय है कि मामले का समाधान २० अगस्त तक हो जाना चाहिए। सिंचाई मंत्री एमबी पाटिल ने कहा, बेलगावी और धरवा़ड, बागलकोट आदि क्षेत्रों में पीने के पानी की गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार और कानूनी टीम इस बात पर सहमत हुई कि हम न्यायिक विस्तार की गोवा की मांग से सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा इसीलिए हमने आज विपक्षी दलों को बैठक के लिए बुलाया और दोनों सदनों में विपक्ष के नेता क्रमशः जगदीश शेट्टर और केएस ईश्वरप्पा ने सरकार की राय से सहमति जताते हुए न्यायिक विस्तार की मांग को खारिज किया। उन्होंने कहा कि अब इसमें कोई विस्तार नहीं होना चाहिए और ट्रिब्यूनल में लगातार सुनवाई होनी चाहिए ताकि मामले को २० अगस्त तक सुलझा लिया जाए। उन्होंने कहा यह कर्नाटक के लोगों की मांग है जो पिछले ६०० दिनों से इस मुद्दे पर आंदोलनरत हैं। उन्होंने कहा कि ट्रिब्यूनल को शुरू में २० अगस्त २०१६ तक अपनी रिपोर्ट देने को कहा गया था लेकिन पहले ही ट्रिब्यूनल को एक साल के दो एक्सटेंशन मिल चुके हैं। महादयी मुद्दे पर राज्य का पक्ष रखने वाले अधिवक्ता के नाम के मुद्दे पर पाटिल ने कहा कि वरिष्ठ अधिवक्ता फली नरीमन राज्य सरकार के वकील व कानूनी सलाहकार बने रहेंगे लेकिन जैसा कि उनका पास बाईपास सर्जरी हुआ है और उन्हें छह महीने आराम की सलाह दी गई है, इसलिए मामले में अब नरीमन की देखरेख में पूर्व अटार्नी जनरल अशोक देसाई कोर्ट में कर्नाटक का पक्ष रखेंगे।

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