अनुच्छेद 370 को हटाना श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि: प्रधानमंत्री

मुखर्जी की जयंती पर अखबारों में छपे एक लेख में मोदी ने कहा ...

अनुच्छेद 370 को हटाना श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सबसे उपयुक्त श्रद्धांजलि: प्रधानमंत्री

Photo: @BJP4India X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को कहा कि अनुच्छेद 370 को हटाना - जिससे जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म हो गया - भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान को सबसे उचित श्रद्धांजलि थी।

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मुखर्जी की जयंती पर अखबारों में छपे एक लेख में मोदी ने कहा कि उन्होंने हमेशा 'भारत और भारतीय मूल्यों को सबसे ऊपर' रखा। इसके लिए उन्होंने ऐसे संस्थान बनाए और सिस्टम विकसित किए, जो उस समय की पारंपरिक सोच से अलग थे।

उन्होंने कहा कि यह भावना तब साफ़ तौर पर दिखी जब मुखर्जी ने भारतीय जनसंघ की स्थापना की, जबकि उस समय कांग्रेस का हर जगह बोलबाला था। 

भारतीय जनसंघ, ​​सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी का पूर्ववर्ती संगठन था। 6 जुलाई, 1901 को जन्मे मुखर्जी का 23 जून, 1953 को श्रीनगर में नज़रबंदी के दौरान निधन हो गया था। उन्होंने अनुच्छेद 370 को खत्म करने की मांग करते हुए जम्मू-कश्मीर को बाकी भारत के साथ पूरी तरह से एकीकृत करने के लिए संघर्ष किया था।

मोदी ने कहा कि 6 जुलाई उन अनगिनत लोगों के लिए एक खास दिन है, जो राष्ट्रवाद और निस्वार्थ सेवा के आदर्शों को मानते हैं।
 
उन्होंने लेख में लिखा, 'हम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं, जिनका जीवन साहस और मां भारती के प्रति अटूट समर्पण का एक सदाबहार उदाहरण है।'

उन्होंने कहा कि मुखर्जी का जन्म ऐसे हालात में हुआ था, जो उन्हें एक सुरक्षित और आरामदायक ज़िंदगी दिला सकते थे, क्योंकि उनके पिता सर आशुतोष मुखर्जी अपने समय के प्रमुख शिक्षाविदों और बुद्धिजीवियों में से एक थे। मोदी ने कहा कि जहां किस्मत ने उनके सामने सुख-सुविधाओं वाला रास्ता रखा, वहीं उनके ज़मीर ने उन्हें त्याग और राष्ट्र-सेवा के रास्ते पर चलने के लिए प्रेरित किया। 
 
मोदी ने कहा कि मुखर्जी को पूरा यकीन था कि वे अपने समय की उथल-पुथल — चाहे वह उपनिवेशवाद, सांप्रदायिकता या मानवीय चुनौतियों से लड़ना हो — को लेकर मूकदर्शक बनकर नहीं रह सकते। 

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सफ़र के दौरान मुखर्जी ने गहरे व्यक्तिगत दु:ख झेले, जिनमें एक नवजात बच्चे और बाद में अपनी पत्नी को खोना भी शामिल था।
 
इन त्रासदियों ने मुखर्जी के संकल्प को और गहरा किया तथा सेवा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को और मजबूत किया। उन्होंने कहा कि अगर कोई एक आदर्श था जिसने मुखर्जी के सार्वजनिक जीवन को सबसे अधिक परिभाषित किया, तो वह भारत की अखंडता थी। 

उन्होंने लिखा, 'बंटवारे के उथल-पुथल भरे दौर में वे मजबूती से डटे रहे ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पश्चिम बंगाल भारत का अभिन्न अंग बना रहे। कुछ साल बाद, इसी पक्के इरादे ने उन्हें जम्मू-कश्मीर की ओर खींचा। जेल की कैद उन्हें रोक नहीं पाई और अकेलेपन ने उनके हौसले को कम नहीं किया।'

प्रधानमंत्री ने कहा कि मुखर्जी का जीवन हिरासत में अचानक समाप्त हो गया, उन अनगिनत लोगों से दूर जिनके मकसद को उन्होंने अपना बना लिया था। 
 
मोदी ने कहा कि इतिहास में ऐसे पल आते हैं जब किसी व्यक्ति का सर्वोच्च बलिदान राजनीति से ऊपर उठकर राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बन जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि आचार्य विनोबा भावे ने कहा था कि मुखर्जी ने उस मकसद के लिए खुद को कुर्बान किया, जिस पर उन्हें यकीन था।

मोदी ने कहा, 'सालों बाद, सन् 2019 में अनुच्छेद 370 और 35(ए) को हटाना उनके बलिदान को सबसे उचित श्रद्धांजलि थी।'

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