कर्नाटक: एसआईआर के तहत घर-घर गणना प्रपत्र बांटने के अभियान का हुआ आग़ाज़

यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से अभियान चलाया जा रहा है कि अपात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल न हों

कर्नाटक: एसआईआर के तहत घर-घर गणना प्रपत्र बांटने के अभियान का हुआ आग़ाज़

Photo: ECI FB Page

बेंगलूरु/भाषा। कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत घर-घर जाकर गणना का अभियान मंगलवार से शुरू हो गया।

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निर्वाचन आयोग के अनुसार, आगामी चुनावों के लिए स्वच्छ और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करने तथा यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया जा रहा है कि अपात्र मतदाताओं के नाम सूची में शामिल न हों।

इस बीच, राज्य सरकार ने स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) जारी करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश और पूरे राज्य में डिजिटल तथा विकेंद्रीकृत सेवा माध्यमों के जरिए समयबद्ध तरीके से प्रमाणपत्र उपलब्ध कराने के लिए एक परिचालन रूपरेखा अधिसूचित की है।

राजस्व विभाग ने कहा कि इस नए ढांचे का उद्देश्य स्थायी निवास प्रमाणित करने के लिए एक समान, पारदर्शी और कानूनी रूप से टिकाऊ व्यवस्था स्थापित करना है। साथ ही इसे कर्नाटक सकल सेवा अधिनियम, 2011 तथा मौजूदा डिजिटल प्रशासनिक मंच से जोड़ा जाएगा।

सरकारी आदेश में कहा गया है कि स्थायी निवास प्रमाणपत्र (पीआरसी) कर्नाटक राज्य में स्थायी निवास का प्रमाण माना जाएगा।

आदेश में कहा गया है कि जहां भी लागू कानूनों, सरकारी आदेशों, अधिसूचनाओं या योजनाओं के दिशा-निर्देशों में स्थायी निवास प्रमाणपत्र की आवश्यकता होगी, वहां इसके लिए एक समान व्यवस्था उपलब्ध कराई जाएगी।

दिशानिर्देशों के अनुसार, सक्षम प्राधिकारी जांच और सत्यापन के बाद यदि संतुष्ट हो जाता है कि आवेदक वास्तव में कर्नाटक का स्थायी निवासी है, तो उसे पीआरसी जारी किया जा सकता है।

आदेश में पात्रता तय करने के लिए कई आधार बताए गए हैं। इनमें कर्नाटक में जन्म, राज्य में कम से कम 10 वर्ष का सामान्य निवास, कक्षा 12 या समकक्ष तक कर्नाटक के मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों में कम से कम 10 शैक्षणिक वर्षों तक अध्ययन, माता-पिता या जीवनसाथी का राज्य में निवास, आवासीय संपत्ति का स्वामित्व या वैध कब्जा, मतदाता सूची, आधार या राशन कार्ड जैसे सरकारी अभिलेखों में नाम, कर्नाटक में कम से कम सात वर्ष तक सरकारी या सार्वजनिक सेवा, पात्र निवासी से विवाह तथा अन्य विश्वसनीय दस्तावेजी, इलेक्ट्रॉनिक या मौखिक साक्ष्य शामिल हैं, जो यह साबित करें कि कर्नाटक ही आवेदक का मुख्य और स्थायी निवास है।

हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि ये आधार केवल उदाहरण हैं, अंतिम नहीं। इनमें से किसी एक शर्त का पूरा न होना किसी आवेदक को स्वतः अपात्र नहीं बनाएगा।

आदेश में कहा गया है कि प्रमाणपत्र जारी करने या अस्वीकार करने का प्रत्येक निर्णय कारण सहित लिखित आदेश के रूप में होना चाहिए।

आदेश के अनुसार, उप तहसीलदार, तहसीलदार या अन्य अधिकृत अधिकारी प्रमाणपत्र जारी करेंगे। प्रमाणपत्र से संबंधित आदेश के खिलाफ 30 दिनों के भीतर सहायक आयुक्त के समक्ष अपील तथा 60 दिनों के भीतर उपायुक्त के समक्ष पुनरीक्षण याचिका दायर की जा सकेगी।

अभियान शुरू होने से पहले सोमवार को कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने राज्य के सभी पात्र मतदाताओं से 30 जून से शुरू हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान में अनिवार्य रूप से भाग लेने की अपील की।

उन्होंने चेतावनी दी कि निर्धारित अवधि में गणना प्रपत्र जमा नहीं करने पर मताधिकार समाप्त हो सकता है और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाइयां आ सकती हैं।

शिवकुमार ने कहा कि राज्य सरकार ने निर्वाचन आयोग के एक महीने लंबे अभियान के दौरान मतदाताओं की सहायता के लिए हजारों सुविधा केंद्र, हेल्पलाइन और ऑनलाइन सेवाएं उपलब्ध करायी हैं।

उन्होंने कहा, ‘मतदान का अधिकार, जीने का अधिकार है। इसलिए हर व्यक्ति को अपने मताधिकार की रक्षा करनी चाहिए। यदि आप ऐसा नहीं करेंगे तो मतदान का अधिकार खो देंगे। साथ ही सरकार की कई योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाएगा।’

मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अंबुक्कुमार ने सोमवार को बताया कि बूथ स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) 30 जून से घर-घर जाकर गणना प्रपत्र वितरित करना शुरू करेंगे। इसके साथ ही 2026 की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का कार्य शुरू हो गया है।

मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि 30 जून से 29 जुलाई तक बीएलओ घर-घर जाकर सर्वेक्षण करेंगे। मसौदा मतदाता सूची पांच अगस्त को प्रकाशित की जाएगी।

उन्होंने बताया कि पांच अगस्त से चार सितंबर तक दावे और आपत्तियां दाखिल की जा सकेंगी। जहां आवश्यक होगा, वहां नोटिस जारी किए जाएंगे और पांच अगस्त से तीन अक्टूबर के बीच दावों एवं आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।

अंतिम मतदाता सूची सात अक्टूबर को प्रकाशित की जाएगी।

अंबुक्कुमार ने कहा, ‘कर्नाटक में इस अभियान के लिए पूरी प्रशासनिक व्यवस्था तैयार है। हमने 68,123 अधिकारियों को तैनात किया है, जिनमें 59,050 बूथ स्तरीय अधिकारी, 7,556 बूथ स्तरीय पर्यवेक्षक और 224 निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी शामिल हैं। सभी अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और वे इस कार्य के लिए पूरी तरह तैयार हैं।’

उन्होंने बताया कि राजनीतिक दलों ने लगभग 1.15 लाख बूथ स्तरीय एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए हैं, जिनमें से अधिकांश को प्रशिक्षण भी दिया जा चुका है।

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