राम मंदिर चढ़ावा मामला: अधिवक्ताओं ने आरोपियों की तरफ से पैरवी न करने का फैसला किया
मांग की कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देनी चाहिए
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अयोध्या/भाषा। अयोध्या में अधिवक्ताओं ने सोमवार को राम मंदिर में दान के कथित गबन मामले में गिरफ्तार आरोपियों की अदालत में पैरवी नहीं करने का फैसला किया है। यह फैसला बार एसोसिएशन फैजाबाद की एक बैठक में लिया गया।
सोमवार को बार एसोसिएशन की बैठक में अधिवक्ताओं ने यह भी तय किया कि अगर उसका कोई सदस्य राम मंदिर मामले के आरोपियों का मामला अदालत में लड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर पांच लाख रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।बार एसोसिएशन की बैठक में वकीलों ने ज़ोरदार मांग की कि चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ देनी चाहिए। उन्होंने ऐसा नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।
अयोध्या के वकीलों ने राम मंदिर में चढ़ावे के कथित गबन के मामले में गिरफ़्तार आरोपियों का मुकदमा न लड़ने के अपने एक ऐतिहासिक फैसले को दोहराया। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने साल 2005 में भी ऐसा ही फ़ैसला लिया था, जब राम मंदिर पर आतंकवादी हमले के आरोपियों को फैज़ाबाद अदालत में पेश किया गया था।
बार एसोसिएशन के सचिव शैलेंद्र जायसवाल ने कहा, ‘मंदिर के चढ़ावे की चोरी से हम सभी की भावनाएं आहत हुई हैं। फैजाबाद के अधिवक्ता गिरफ़्तार आरोपियों की ओर से मुकदमा नहीं लड़ने पर सहमत हो गए हैं। इस मामले में बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और बार की आम सभा ने फैसला लिया है। इसके बाद आगे की रणनीति तैयार की जाएगी।’
फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका मिश्रा ने रविवार को कहा था कि राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के मामले के आरोपियों का मुकदमा नहीं लड़ने का अंतिम निर्णय सोमवार को प्रस्तावित संगठन की आम बैठक में लिया जाएगा।
उन्होंने बताया था कि साल 2005 में भी अयोध्या के वकीलों ने ऐसा ही निर्णय लिया था जब राम जन्मभूमि परिसर पर हुए आतंकवादी हमले के आरोपियों की पैरवी नहीं करने का फैसला किया गया था।


