'उभरती हुईं तकनीकें भारत-अमेरिका संबंधों के अगले चरण को तय करेंगी'

अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा

'उभरती हुईं तकनीकें भारत-अमेरिका संबंधों के अगले चरण को तय करेंगी'

भारत अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है

वॉशिंगटन/दक्षिण भारत। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने कहा कि उभरती हुईं तकनीकें भारत-अमेरिका सहयोग के अगले चरण को तय करेंगी। उन्होंने बायोटेक्नोलॉजी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सेमीकंडक्टर को प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के तौर पर गिनाया।

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यहाँ यूएसआईएसपीएफ लीडरशिप समिट को संबोधित करते हुए क्वात्रा ने कहा कि भारत ने खुद को उन कंपनियों के लिए एक पसंदीदा जगह के तौर पर स्थापित किया है, जो पारंपरिक मैन्युफैक्चरिंग हब से हटकर प्रोडक्शन और सप्लाई चेन में विविधता लाना चाहती हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लीन एनर्जी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में निवेश बढ़ाया है, जिससे ग्लोबल वैल्यू चेन में उसकी भूमिका मजबूत हुई है। 
 
क्वात्रा ने कहा कि भारत, जो अभी 4.3 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था है, इस दशक के आखिर तक 7 ट्रिलियन डॉलर, सन् 2030 के दशक के मध्य तक लगभग 14 ट्रिलियन डॉलर और सन् 2047 तक 25 से 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

उन्होंने बढ़ते भू-राजनीतिक अनिश्चितता और सप्लाई चेन में रुकावटों के दौर में भारत को वैश्विक आर्थिक विकास और स्थिरता का अहम आधार बताया। 
 
क्वात्रा के अनुसार, भारत के आर्थिक बदलाव ने उसे बदलती वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में ला खड़ा किया है, जिससे वह विकसित और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक भरोसेमंद ग्रोथ इंजन और रणनीतिक साझेदार बन गया है।

उन्होंने कहा, 'सन् 2014 से प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत में हमारे लिए इसका मतलब ज़मीनी स्तर पर आर्थिक रूप से बड़े बदलाव लाने वाले कई कदम उठाना रहा है। इनके नतीजतन, हमारी विकास दर लगातार सात प्रतिशत से ज़्यादा रही है, जो मुख्य रूप से घरेलू मांग से प्रेरित है।'

क्वात्रा ने कहा कि भारत की आर्थिक तरक्की अब वैश्विक समृद्धि से गहराई से जुड़ी हुई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय साझेदारियां पहले से कहीं ज़्यादा महत्त्वपूर्ण हो गई हैं।

सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' के विज़न का ज़िक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि यह कोई ऐसी नीति नहीं है जो सिर्फ़ अपने देश तक सीमित रहे, बल्कि इसका मकसद दुनियाभर में मुक़ाबला कर सकने वाली मैन्युफैक्चरिंग और मज़बूत सप्लाई चेन बनाना है।
 
क्वात्रा ने कहा, 'प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भरता और स्वावलंबन के मिश्रण का विचार रखा है, लेकिन एक ऐसे इकोसिस्टम का जो सकारात्मक प्रभाव पैदा करे और जो स्वभाव से अलग-थलग न हो।'

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