आपातकाल वह काला दौर, जब भारतीय लोकतंत्र को बेरहमी से कुचला गया: प्रधानमंत्री

सन् 1975 में आज ही के दिन इंदिरा गांधी ने लगाया था आपातकाल

आपातकाल वह काला दौर, जब भारतीय लोकतंत्र को बेरहमी से कुचला गया: प्रधानमंत्री

Photo: @BJP4India X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि आपातकाल संविधान पर सीधा हमला था, क्योंकि उस दौरान नागरिकों की आज़ादी छीन ली गई थी, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगा दी गई थी और उन संस्थाओं पर हमला किया गया था जो भारतीय लोकतंत्र की नींव हैं।

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'भारतीय इतिहास के सबसे काले अध्यायों' में से एक के दौरान लोकतांत्रिक मूल्यों की मज़बूती से रक्षा करने वालों को श्रद्धांजलि देते हुए, मोदी ने कहा कि आपातकाल ने अनगिनत नागरिकों के असाधारण साहस को भी उजागर किया, जिन्होंने चुप रहने से इन्कार किया और संविधान में निहित आदर्शों को बनाए रखा।

उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में सन् 1975 में इसी दिन लगाए गए आपातकाल का ज़िक्र करते हुए कहा, 'आपातकाल हमारे संविधान पर सीधा हमला था। इसमें नागरिक स्वतंत्रता को निलंबित कर दिया गया था, अभिव्यक्ति की आज़ादी पर रोक लगाई गई, राजनेताओं, पत्रकारों और समाज सेवकों को गिरफ़्तार किया गया था और उन संस्थाओं पर हमला किया गया था जो हमारे लोकतंत्र की नींव हैं।'
 
प्रधानमंत्री ने कहा कि लोगों के लिए संविधान 140 करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, अधिकारों और कर्तव्यों का प्रतीक है।

उन्होंने कहा, 'हम संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपनी सामूहिक प्रतिबद्धता को दोहराते हैं। अपने संविधान की भावना से प्रेरित होकर, हम एक ऐसा भारत बनाएंगे जो न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहे।'
 
बता दें कि 25 जून, 1975 और 21 मार्च, 1977 के बीच, भारत में संविधान के अनुच्छेद 352 के तहत आपातकाल लागू रहा था। 

इस बारे में जारी एक सरकारी नोटिफिकेशन में कहा गया था कि 25 जून, 1975 को आपातकाल लागू ​किया गया था, जिसके बाद 'तत्कालीन सरकार ने सत्ता का भारी दुरुपयोग किया और भारत के लोगों को ज्यादतियों और अत्याचारों का सामना करना पड़ा' था।

एक्स पर एक और पोस्ट में प्रधानमंत्री ने कहा कि 'संविधान हत्या दिवस' हर किसी को उस 'काले दौर' की भी याद दिलाता है जब 'भारतीय लोकतंत्र को बेरहमी से कुचल दिया गया था'।

उन्होंने हिंदी में पोस्ट करते हुए कहा, 'यह हमें लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए हमेशा प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा देता है। आपातकाल का विरोध करने वाली सभी महान हस्तियों को मेरा सादर नमन।'

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