मोदी की इजराइल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है: कांग्रेस

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा ...

मोदी की इजराइल के प्रति अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है: कांग्रेस

Photo: IndianNationalCongress FB Page

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद गुरुवार को कांग्रेस ने सरकार पर तीखा हमला बोला। पार्टी ने कहा कि 'इस्लामाबाद एमओयू' कहे जा रहे इस समझौते से पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव का पता चलता है, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश नीति के तौर-तरीकों और मूल भावना, दोनों के लिए एक 'बड़ा झटका' है।

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कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच 14 सूत्री इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन अब आधिकारिक रूप से जारी कर दिया गया है। सच यह है कि इसे इस्लामाबाद एमओयू कहा जा रहा है, जो पाकिस्तान की नई क्षेत्रीय हैसियत और वैश्विक प्रभाव को दिखाता है। 

उन्होंने कहा कि यह वही पाकिस्तान है, जिसे नवंबर 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के बाद डॉ. मनमोहन सिंह ने वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिया था। यह प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की विषयवस्तु और शैली, दोनों के लिए गंभीर झटका है। पाकिस्तान अब पश्चिम एशिया की भू-राजनीतिक और सुरक्षा संरचना में और अधिक गहराई से शामिल हो गया है, जिसके भारत के लिए गंभीर और बड़े निहितार्थ हैं।

जयराम रमेश ने कहा कि यदि एमओयू शब्दों और भावना, दोनों में कायम रहता है, तो यह एक बड़ी प्रगति है। लेकिन इसमें दोनों पक्षों के लिए 'गलतफहमी का ज्ञापन' बनने की भी आशंका है। फिलहाल इतना ही कहा जा सकता है कि अगले 60 दिन बेहद महत्त्वपूर्ण होंगे।

जयराम रमेश ने कहा कि एमओयू में ईरान के लिए बहुत महत्त्वपूर्ण और कुछ अप्रत्याशित लाभ भी हैं। ईरान ने अपना प्रतिरोध और जुझारूपन दिखाया है। जीसीसी देशों ने, जिन्होंने ईरान के जवाबी हमलों का पूरा भार झेला है, सावधानी के साथ एमओयू का स्वागत किया है, लेकिन वे निस्संदेह दूसरे देशों के साथ अपने संबंधों पर फिर से विचार करेंगे।

जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू इजराइल के प्रधानमंत्री के लिए निश्चित हार है, हालांकि वे अभी भी इसे अलग-अलग तरीकों से पटरी से उतार सकते हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ गए हैं, यहां तक कि राष्ट्रपति ट्रंप ने भी उनके प्रति अपने गुस्से और निराशा को सार्वजनिक रूप से व्यक्त किया है। केवल प्रधानमंत्री मोदी इस क्षेत्र में नेतन्याहू की कार्रवाइयों - जिनमें लेबनान, गाजा और कब्जे वाला वेस्ट बैंक शामिल हैं - के समर्थन में दृढ़ बने हुए हैं। प्रधानमंत्री मोदी की इजराइल के प्रति यह अंधभक्ति हमारे देश को बहुत महंगी पड़ रही है।

जयराम रमेश ने कहा कि यह एमओयू अमेरिका के लिए गंभीर झटका है, जिसने इजराइल के साथ मिलकर 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़े लक्ष्यों के साथ युद्ध शुरू किया था, जो बिल्कुल भी पूरे नहीं हुए। सैन्य शक्ति की सीमाएं एक बार फिर उजागर हो गई हैं। राष्ट्रपति ट्रंप के प्रति प्रधानमंत्री मोदी का लगातार तुष्टीकरण - जिसका ताजा प्रमाण कल रात हुई ट्रंप-मोदी द्विपक्षीय बैठक पर विदेश मंत्रालय का बयान - शर्मनाक और वास्तव में राष्ट्र-विरोधी है।

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