'देश की सफलताएं, बीमा, बेबी लीग, रूट ब्रिज' ... 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री

देशवासियों के साथ साझा किए विचार

'देश की सफलताएं, बीमा, बेबी लीग, रूट ब्रिज' ... 'मन की बात' में यह बोले प्रधानमंत्री

Photo: @BJP4India X account

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को 'मन की बात' कार्यक्रम में देशवासियों के साथ अपने विचार साझा किए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि साल 2026 का आधा साल बीतने को है। इन 6 महिनों में हमने मन की बात में देशवासियों की अनेक उपलब्धियों  पर चर्चा की है।

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उन्होंने कहा कि जून में भी देश ने कुछ ऐसी उपलब्धियां हासिल की है, जो हर देशवासी को गर्व से भर देती है। ये सफलताएं देश की सुरक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ी हैं। हाल में मुझे कोलकाता में नौसेना से जुड़े एक कार्यक्रम में शामिल होने का अवसर मिला। वहां आईएनएस दूनागिरि, आईएनएस संशोधक और आईएनएस अग्रय को भारतीय नौ-सेना के बेड़े में शामिल किया गया। इन जहाजों की डिजाइन और निर्माण तक, सब कुछ स्वदेशी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जून के महीने में ही एविएशन सेक्टर में भी देश ने एक बड़ी सफलता पाई। सी-295, यह विमान 'मेड इन इंडिया' है और सी-295 विमान ने अपनी पहली उड़ान पूरी की है, और ऐसे 40 विमान, भारत में ही बनाए जा रहे हैं। इससे एमएसएमई और एयरोस्पेस सेक्टर को नई शक्ति मिल रही है। रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इस बार दुनिया के 2,500 से अधिक स्थानों पर योग के अनेक विविध कार्यक्रम हुए। हमारे देश में करोड़ों लोगों ने स्थान-स्थान पर योग कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। इस महीने, अहमदाबाद में आयोजित 'विश्व योगासन चैंपियनशिप' की भी बड़ी चर्चा हुई। इसमें भारत ने कुल 114 पदक जीते हैं, इनमें 102 गोल्ड मेडल भी शामिल हैं। भारत इस चैंपियनशिप की पदक तालिका में पहले स्थान पर रहा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र के नांदेड़ में एक परिवार ने अपनी खुशियां बांटने के लिए ऐसा काम किया है, जो चर्चा का विषय बन गया है। यहां नांदेड़ के बहादुरपुरा गांव में पेठकर परिवार रहता है। इस परिवार ने सोचा कि अगर खुशी बांटनी ही है, तो ऐसी चीज दी जाए, जो मुश्किल समय में किसी परिवार का सहारा बने। अपने घर में विवाह के अवसर पर इस परिवार ने गांव के लगभग साढ़े तीन हजार लोगों के लिए दुर्घटना बीमा की व्यवस्था की। हर व्यक्ति को एक लाख रुपए का बीमा कवर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार देश के करोड़ों परिवारों तक सुरक्षा का कवच पहुंचा रही है। 'प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना' के तहत केवल 20 रुपए के सालाना प्रीमियम यानी केवल एक साल के 20 रुपए का प्रीमियम, उस पर दो लाख रुपए तक का 'दुर्घटना बीमा' मिलता है। अब तक इस योजना से 58 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना' भी उतनी ही अहम है। यह योजना व्यक्ति की दु:खद मृत्यु होने पर उसके परिवार को दो लाख रुपए का बीमा कवर देती है। इसका वार्षिक प्रीमियम सिर्फ 436 रुपए है। मतलब एक दिन का मुश्किल से डेढ़ रुपया। इस योजना से अब तक 27 करोड़ से अधिक लोग जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम में एक पक्षी पाया जाता है। उस पक्षी का नाम है 'हरगिला'। यह एक दुर्लभ पक्षी है। यह प्रकृति को स्वच्छ रखने में अहम भूमिका निभाता है, लेकिन असम के कुछ इलाकों में लंबे समय तक इसे अशुभ माना जाता था। लोग इसे अपने आसपास देखना पसंद नहीं करते थे। कई बार उन पेड़ों को भी काट दिया जाता था जिन पर हरगिला के घोंसले बने होते थे।

इसी दौरान जीव-वैज्ञानिक पूर्णिमा देवी बर्मन ने ये सब देखा। उन्होंने लोगों के मन में बैठी गलत धारणा को बदलने का संकल्प लिया। उन्होंने महिलाओं से बात की। उन्होंने लोगों को विज्ञान के आधार पर समझाया, धीरे-धीरे महिलाएं इस अभियान से जुड़ने लगीं। फिर एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ। जिस पक्षी को कभी अशुभ मानकर भगाया जाता था, वही गांवों की पहचान बनने लगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि 'नागालैंड बेबी लीग'... नाम सुनकर आपको जरूर लगता होगा यह बहुत छोटे बच्चों की कोई साधारण लीग होगी, लेकिन ऐसा नहीं है। यह 5 से 10-12 साल की आयु के छोटे-छोटे बच्चे, फूल जैसे बच्चों की एक असाधारण लीग है। इन बच्चों के फुटबॉल खिलाड़ियों की एक ऐसी लीग है, जो उनकी रफ्तार को और प्रतिभा के लिए उनको प्रेरित भी करती है और उनकी पहचान भी बनाती है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि इसकी शुरुआत नागालैंड के अधिक-से-अधिक बच्चों को फुटबॉल से जोड़ने के लिए हुई थी। पांच से 12 वर्ष तक के लड़के और लड़कियां इसमें हिस्सा ले सकते हैं। यह लीब अब अपने तीन वर्ष पूरे कर चुकी है। इस लीग का बच्चों के मन पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नालंदा विश्वविद्यालय ने शास्त्रार्थ की हमारी प्राचीन परंपरा को फिर से जीवंत किया है। शास्त्रार्थ केवल अपनी बात रखने का माध्यम नहीं है। यह वाद-संवाद और मंथन की एक अनुशासित प्रक्रिया है। इसमें तर्क के साथ, तथ्य के साथ, अपनी बात कहना बहुत जरूरी होता है और उसमें आपकी महारत होनी चाहिए। दूसरों के विचारों को धैर्य से सुनने और समझने की सीख भी इस शास्त्रार्थ की प्रक्रिया से मिलती है। मुझे खुशी है कि नालंदा विश्वविद्यालय ने इसे अपने दीक्षांत समारोह का हिस्सा बनाया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मेघालय के रूट ब्रिज... इन रूट ब्रिजों की कहानी बहुत रोचक है। ये ब्रिज कुछ दिनों या कुछ वर्षों में नहीं बनते। इन्हें तैयार होने में कई दशक लगते हैं। रबर के पेड़ों की जड़ों को धीरे-धीरे दिशा दी जाती है। इन जड़ों को जल-धाराओं के पार ले जाया जाता है। समय के साथ वही जड़ें एक मजबूत ब्रिज का रूप ले लेती हैं।

इन ब्रिजों की एक और विशेषता है। ये जीवित ब्रिज हैं। समय बीतने के साथ ये और मजबूत हो जाते हैं। इनमें मेघालय के लोगों की सृजनशीलता दिखाई देती है। इनके पीछे वर्षों का धैर्य और प्रकृति के प्रति गहरा सम्मान है। ये ब्रिज बताते हैं कि मनुष्य प्रकृति के साथ मिलकर कितनी अद्भुत चीजें बना सकता है। ये हमारे देश की, इस धरती की, धरोहर है। अब भारत ने मेघालय के रूट ब्रिजों को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट नेटवर्क में शामिल कराने के लिए आवेदन किया है।

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