'पूरी तरह साक्षर' राज्य बना उत्तराखंड!
उत्तराखंड सरकार की बड़ी उपलब्धि
Photo: pushkarsinghdhami.uk FB Page
देहरादून/दक्षिण भारत। उत्तराखंड कैबिनेट ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के साक्षरता मानकों के आधार पर राज्य को 'पूरी तरह साक्षर' घोषित करने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दे दी है। अधिकारियों ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
यह फ़ैसला यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। स्कूल शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि राज्य ने केंद्र सरकार के 'समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने की समझ' (उल्लास) कार्यक्रम के तहत तय किए गए मानदंडों को पूरा कर लिया है।इससे पहले खबर आई थी कि प्रदेश के विद्यालयी शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि अधिकारियों को 'पूर्ण साक्षर' राज्य से संबंधित प्रस्ताव तैयार करके उसे उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में उल्लास कार्यक्रम के तहत निर्धारित साक्षरता मानकों को पूरा कर लिया गया है और वर्तमान में राज्य की साक्षरता दर 98 फीसदी से अधिक है।
मंत्री ने बताया कि कार्यक्रम के तहत प्रदेश में वयस्कों के लिए बुनियादी साक्षरता, महत्त्वपूर्ण जीवन कौशल, व्यावसायिक कौशल, बुनियादी शिक्षा और सतत शिक्षा पर विशेष फोकस किया गया है।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सामाजिक संस्थाओं, कॉर्पोरेट इकाइयों और जागरूक नागरिकों के सहयोग से गांवों को गोद लिया गया और निरक्षर वयस्कों को साक्षर बनाया गया, जिसमें मुख्य रूप से महिलाओं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य वंचित समूहों को शामिल गया गया।
योजना में उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई जहां महिला साक्षरता दर 60 प्रतिशत से कम थी।
रावत ने कहा कि इस महत्वपूर्ण उपलब्धि को अब तक पांच राज्य- मिज़ोरम, गोवा, त्रिपुरा, हिमाचल प्रदेश और सिक्किम हासिल कर चुके हैं।
उल्लास कार्यक्रम में 15 साल से ज्यादा उम्र के लोगों की शिक्षा पर फोकस किया जाता है और जब किसी राज्य के वयस्कों में शिक्षा की दर करीब 95 प्रतिशत या उससे ज्यादा हो जाती है और गैर-साक्षर लोगों तक शिक्षा पहुंचाने का लक्ष्य पूरा हो जाता है, तब उसे ‘पूर्ण साक्षर’ राज्य माना जाता है।


