अब डॉक्टर की पर्ची के बिना नहीं खरीद पाएंगे कफ़ सिरप
स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में बदलाव किया
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नई दिल्ली/दक्षिण भारत। दवा की क्वालिटी और मरीज़ों की सुरक्षा को लेकर चिंताओं के बीच, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने नियमों में बदलाव किया है। इसके तहत अब पूरे देश में डॉक्टर की पर्ची के बिना कफ़ सिरप समेत किसी भी तरह की सिरप की बिक्री पर रोक लगा दी गई है।
अधिकारियों ने बताया कि इस कदम का मकसद कफ सिरप समेत सिरप-आधारित फ़ॉर्मूलेशन को ज़्यादा सख़्त रेगुलेटरी निगरानी के दायरे में लाना है।मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस संशोधन से पहले, शेड्यूल के की एंट्री नंबर 13 के तहत 1,000 से कम आबादी वाले गांवों में खांसी की सिरप बेचने की इजाज़त थी, जिसके लिए रिटेल बिक्री के लाइसेंस से जुड़े कुछ नियमों का पालन करना ज़रूरी नहीं था।
संशोधित प्रावधानों के तहत, सरकार ने 'ड्रग्स रूल्स, 1945' की अनुसूची के में 'दवाओं की श्रेणी' के अंतर्गत सूचीबद्ध आइटम 7 से सिरप शब्द हटा दिया है।
अनुसूची के उन दवाओं की कैटेगरी बताता है जिन्हें 'ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट' और उससे जुड़े नियमों के तहत, कुछ खास शर्तों के साथ, उनके निर्माण, बिक्री और वितरण से जुड़ी कुछ ज़रूरतों से छूट दी गई है।
अधिकारियों का मकसद सिरप को इस छूट वाली श्रेणी से बाहर रखकर, इन फ़ॉर्मूलेशन पर ज़्यादा सख़्त नियंत्रण और कड़ी निगरानी रखना है।
यह संशोधन पिछले साल दिसंबर में स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी उस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन के बाद किया गया है, जिसमें इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों और आम जनता समेत सभी संबंधित पक्षों से राय और सुझाव मांगे गए थे।
अधिकारियों ने बताया कि अंतिम फ़ैसला लेने से पहले, कंसल्टेशन प्रोसेस के दौरान मिली प्रतिक्रियाओं की समीक्षा की गई। यह फ़ैसला ड्रग्स टेक्निकल एडवाइज़री बोर्ड के साथ मिलकर लिया गया, जो फ़ार्मास्यूटिकल्स से जुड़े तकनीकी मामलों को देखने वाली देश की सबसे बड़ी वैधानिक संस्था है।


