स्लोवाकिया ने संरा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया

प्रधानमंत्री मोदी की मध्य यूरोपीय देश की अहम यात्रा

स्लोवाकिया ने संरा सुरक्षा परिषद में भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया

सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया

ब्रातिस्लावा/दक्षिण भारत। स्लोवाकिया ने 'सुधारित' संरा सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए भारत की दावेदारी का समर्थन किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्य यूरोपीय देश की अहम यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया।

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प्रधानमंत्री मोदी और स्लोवाकिया के उनके समकक्ष रॉबर्ट फिको के बीच हुई बातचीत के बाद जारी एक संयुक्त बयान में, दोनों पक्षों ने संरा और यूएनएससी जैसे बहुपक्षीय संस्थानों में व्यापक सुधारों की ज़रूरत पर ज़ोर दिया, ताकि उन्हें 'अधिक प्रतिनिधित्वपूर्ण, समावेशी और आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को दर्शाने वाला' बनाया जा सके।
 
दोनों नेताओं ने सुरक्षा परिषद को स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में विस्तारित करने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।

संयुक्त बयान में कहा गया, 'इस संदर्भ में, भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विस्तार के बाद भारत की स्थायी सदस्यता के लिए स्लोवाकिया के लगातार समर्थन की सराहना की।'
 
मोदी और फिको ने संयुक्त राष्ट्र को केंद्र में रखते हुए बहुपक्षवाद के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और संरा सहित वैश्विक मंचों पर मिलकर काम करने पर सहमति जताई।

भारत लंबे समय से सुधारित और विस्तारित सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है। उसका तर्क है कि 15 सदस्यों वाली इस संस्था का मौजूदा ढांचा पुराना हो चुका है और आज की वैश्विक वास्तविकताओं को ठीक से नहीं दर्शाता है।

नई दिल्ली की उम्मीदवारी को कई यूरोपीय देशों के साथ-साथ जी4 समूह के अन्य सदस्यों — ब्राज़ील, जर्मनी और जापान — सहित कई देशों का समर्थन मिल रहा है।

संरा सुरक्षा परिषद में पांच स्थायी सदस्य - चीन, फ़्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका - और दो साल के कार्यकाल के लिए चुने गए 10 अस्थायी सदस्य शामिल हैं।

स्लोवाकिया ने न्यूक्लियर सप्लायर्स ग्रुप (एनएसजी) - जो 48 देशों का एक मल्टीलेटरल एक्सपोर्ट कंट्रोल सिस्टम है - में भारत की सदस्यता के प्रति अपने सकारात्मक रुख को फिर से दोहराया।
 
सन् 1993 में स्लोवाकिया की आज़ादी के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक साझेदारी' के स्तर तक बढ़ाया, जिसका मकसद रणनीतिक, आर्थिक, तकनीकी और सुरक्षा के क्षेत्रों में सहयोग को और गहरा करना है।

दोनों नेताओं ने स्वतंत्र, खुले और नियमों पर आधारित इंडो-पैसिफिक, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और नेविगेशन की स्वतंत्रता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को भी दोहराया। 

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