सोशल मीडिया के भंवर में बचपन
जिसका बचपन ऐसा होगा, उसकी जवानी कैसी होगी?
बच्चों को अनुशासन का पाठ पढ़ाना जरूरी है
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीयर स्टार्मर ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया ऐप्स पर प्रतिबंध लगाने संबंधी जो फैसला लिया, वह वक्त की जरूरत है। इससे पहले, मलेशिया ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया अकाउंट रखने पर रोक लगाने वाले नियम जारी किए थे। भारत सरकार को भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिएं। देश में लाखों बच्चे ऐसे हैं, जो सोशल मीडिया पर अपना अनमोल समय बर्बाद कर रहे हैं। अभी उन्हें अच्छी बातें सीखनी चाहिएं, किताबें पढ़नी चाहिएं, खेलकूद में भाग लेना चाहिए, प्रकृति के साथ लगाव विकसित करना चाहिए। उन्हें ऐसी गतिविधियों को अपने जीवन का हिस्सा बनाना चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व का निर्माण करें। उन्हें स्वस्थ तन, स्वस्थ मन और खुशहाल जीवन के लिए काम करना चाहिए। वे इसके बजाय सोशल मीडिया के भंवर में फंसे रहते हैं। उन्हें पता ही नहीं चलता है कि वे अपना कितना बड़ा नुकसान कर रहे हैं! यह समय कभी लौटकर नहीं आएगा। उन्हें बाद में पछतावा होगा कि सोशल मीडिया की लत ने उनसे क्या-क्या छीन लिया! कुछ घरों में छोटे बच्चों को इसलिए मोबाइल फोन दे दिया जाता है, ताकि वे व्यस्त रहें और कामकाज में बाधा न डालें। इससे बच्चे व्यस्त तो हो जाते हैं, लेकिन यहीं से उनके मन में कुछ गलत आदतों की नींव पड़ जाती है। जब उनसे मोबाइल फोन वापस लिया जाता है तो वे ज़िद करते हैं। कई तो रोने लगते हैं। ऐसे मामले भी सामने आ चुके हैं, जब किसी बच्चे को मोबाइल फोन नहीं मिला तो उसने घर में तोड़फोड़ मचा दी।
जिसका बचपन ऐसा होगा, उसकी जवानी कैसी होगी? इतनी हिंसक, अस्थिर, अनुशासनहीनता की मानसिकता रखने वाला शख्स भविष्य में कैसा नागरिक बनेगा? क्या बच्चों को मोबाइल फोन थमा देना, उन्हें सोशल मीडिया पर कई घंटे बिताने की इजाजत देना उनके साथ अन्याय नहीं है? मोबाइल फोन के अत्यधिक उपयोग के कारण किशोरों का भाषाज्ञान प्रभावित हो रहा है। वे लिखने में कई गलतियां कर रहे हैं। वे पढ़ाई पर अपना ध्यान केंद्रित नहीं कर पा रहे हैं। जब वे पढ़ाई करने बैठते हैं तो पास में मोबाइल फोन रख लेते हैं। वे हर पांच-दस मिनट के बाद फोन देखते रहते हैं। उन्हें लगता है कि दुनिया की सबसे जरूरी चीज मोबाइल फोन में है और अगर उसे अभी नहीं देखा तो बहुत बड़े लाभ से वंचित रह जाएंगे। इस दौरान एक समय ऐसा आता है, जब वे सोशल मीडिया पर आकर्षक सामग्री देखते-देखते दो-तीन घंटे बर्बाद कर देते हैं। सोशल मीडिया ऐप्स इस तरह तैयार किए जाते हैं, जिससे ज्यादा से ज्यादा लोग उन पर समय बिताएं। जिस ऐप पर लोग जितना समय बिताते हैं, वह उतना ही कामयाब माना जाता है। यूं तो बड़ों को भी सोशल मीडिया को सीमित समय देना चाहिए, लेकिन बच्चों को इस मामले में अनुशासन का पाठ पढ़ाना जरूरी है। सोलह साल से कम उम्र के बच्चे सोशल मीडिया से दूर रहें तो उनके लिए अच्छा है। चूंकि इस उम्र में भावनाएं प्रबल होती हैं, अच्छे-बुरे की समझ कम होती है, ऐसे में सोशल मीडिया उनके लिए सुरक्षित मंच नहीं है। साइबर ठग इतने शातिर हो चुके हैं कि वे युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक को सोशल मीडिया के जरिए चूना लगा रहे हैं। किशोर उनसे कब तक सुरक्षित रहेंगे? उनकी सुरक्षा, निजता, मन की पवित्रता और उज्ज्वल भविष्य के लिए उन्हें सोशल मीडिया से दूर रखना चाहिए। यह आज की बहुत बड़ी आवश्यकता है।

