ट्रंप का वचन, नया धोखा या भ्रम?

ट्रंप एक आत्ममुग्ध व्यक्ति हैं

ट्रंप का वचन, नया धोखा या भ्रम?

आज वे किसके साथ खड़े हैं?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के एवियन शहर में जी-7 शिखर सम्मेलन से इतर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वार्ता के दौरान जो टिप्पणियां कीं, उन्हें बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है। उनके ये शब्द क्या संकेत देते हैं- 'भारत और अमेरिका के बीच कोई रक्षा समझौता नहीं है, लेकिन अगर भारत पर कोई हमला होता है तो मदद के लिए अमेरिका मौजूद रहेगा'? कुछ लोग इसे भारत के साथ अमेरिका की मजबूत साझेदारी से जोड़कर देख रहे हैं। हमें इसके दूसरे पक्ष को भी देखना चाहिए। प्राय: डोनाल्ड ट्रंप जैसे बयान देते हैं, उसके बिल्कुल विपरीत काम करते हैं। एक राष्ट्रपति के शब्दों में गंभीरता, दृढ़ता और विश्वसनीयता होनी चाहिए। ट्रंप इन विशेषताओं से कोसों दूर रहते हैं। अपने दूसरे कार्यकाल में उनका बर्ताव एक ऐसे ज़िद्दी बच्चे जैसा है, जिसे मनचाही चीज चाहिए, तुरंत चाहिए, अगर न मिले तो वह तोड़फोड़ मचा देता है और जरूरत पड़ने पर खुलकर झूठ बोलता है। आखिर ट्रंप को भारत की रक्षा की इतनी फिक्र क्यों होने लगी? क्या वे भारत के कोई बड़े हितैषी हो गए हैं? वैसे, ट्रंप को भारत के रक्षा संबंधी मामलों की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है। इसके लिए भारत सरकार है, मजबूत सशस्त्र बल हैं और करोड़ों देशभक्त नागरिक हैं। जिस दिन कोई दुश्मन इस भारत भूमि पर हमले का दुस्साहस करेगा, उसे करारा जवाब मिलेगा। 'ऑपरेशन सिंदूर' में क्या हुआ था? भारतीय मिसाइलों ने पीओके और पाकिस्तान में सौ से ज्यादा खूंखार आतंकवादियों को उनके ठिकानों समेत मिट्टी में मिला दिया था। भारतीय एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तानी मिसाइलों और ड्रोनों को खिलौनों की तरह धराशायी कर दिया था। इसलिए ट्रंप भारत की रक्षा को लेकर बेफिक्र रहें। यह काम हम समस्त देशवासी भलीभांति कर लेंगे।  

Dakshin Bharat at Google News
ट्रंप एक काम जरूर करें। अपने 'आतंकवादी मित्र' पाकिस्तान की मदद बंद करें। उसके प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख की शान में झूठी वाहवाही न करें। जब 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत पाकिस्तान पर जोरदार प्रहार हो रहे थे, तब ट्रंप क्या कर रहे थे? वे पाकिस्तान की हिमायत करने में व्यस्त थे। जिन आतंकवादियों ने पहलगाम में भारतीय नागरिकों की हत्या की थी, क्या ट्रंप ने उन्हें दंडित करने के संबंध में आज तक एक भी शब्द कहा? उन्होंने तो नोबेल शांति पुरस्कार की रट लगा ली थी, जिसके लिए अनगिनत बार झूठ बोले। हाल में जहाज़ों पर अमेरिकी हमले में तीन भारतीयों की मौत हुई, लेकिन ट्रंप ने क्या कहा? यही कि 'यह बहुत सख़्त पेशा है और हम इन लोगों से प्यार करते हैं और इस पर ज़रूर साथ काम करेंगे!' क्या एक राष्ट्रपति का यह बयान होना चाहिए? ट्रंप एक आत्ममुग्ध व्यक्ति हैं, जो पुराने झूठ को बार-बार दोहराने में अपनी महानता समझते हैं। आज वे किसके साथ खड़े हैं? हम जानते हैं कि वे उन हत्यारों के साथ खड़े हैं, जिनके हाथ बेकसूर हिंदुस्तानियों के खून से रंगे हुए हैं। जब ऐसा व्यक्ति यह कहता है कि 'अगर भारत पर कोई हमला होता है तो मदद के लिए अमेरिका मौजूद रहेगा', तो उस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करना चाहिए। क्या ट्रंप के पास ऐसी कोई गुप्त सूचना है कि भारत पर हमला होगा? कहीं वे ऐसे तत्त्वों की कोई मदद तो नहीं कर रहे हैं, जो भारत पर हमला करने के लिए षड्यंत्र रचते हैं? हमारे देश के लिए इन खतरों का सामना कोई नई बात नहीं है। पाकिस्तान और चीन हमारे साथ खुली दुश्मनी रखते हैं। हाल के वर्षों में बांग्लादेश और मालदीव जैसे देश भी आंखें दिखाने लगे हैं। नक्सलवाद दम तोड़ चुका है, लेकिन उग्रवाद के किसी नए स्वरूप से इन्कार नहीं किया जा सकता है। भारत को बहुत सावधान रहना चाहिए।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download