आरबीआई ने लगातार तीसरी बार नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया

एमपीसी ने रेपो दर को 5.25% पर बनाए रखने का फैसला किया

आरबीआई ने लगातार तीसरी बार नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया

Photo: @reservebankofindia593 YouTube Channel

मुंबई/दक्षिण भारत। भारतीय रिज़र्व बैंक ने बुधवार को इस वित्तीय वर्ष में लगातार तीसरी बार मुख्य ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया। बैंक ने पश्चिम एशिया में चल रहे संकट की वजह से ईंधन की कीमतों में अनिश्चितता और आपूर्ति में रुकावट के असर को ध्यान में रखते हुए यह फ़ैसला लिया।

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मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए तीसरी द्वि-मासिक मौद्रिक नीति की घोषणा करते हुए, आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ​​ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने सर्वसम्मति से अल्पकालिक ऋण दर या रेपो दर को 5.25 प्रतिशत पर बनाए रखने और तटस्थ रुख अपनाने का फैसला किया है।

ब्याज दरों में यह ठहराव ऐसे समय में आया है जब जून में कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर आरबीआई के 4 प्रतिशत के मध्यम-अवधि के लक्ष्य को पार कर 4.38 प्रतिशत पर पहुंच गई है।
 
हालांकि, आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान मामूली रूप से बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया, जबकि महंगाई का अनुमान घटाकर 5 प्रतिशत कर दिया।

इसके अलावा, इस साल की शुरुआत से ही रुपया लगातार कमज़ोर हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया 95 और 96 के बीच बना हुआ है। 
 
कभी एशिया की सबसे स्थिर मुद्राओं में गिना जाने वाला रुपया इस साल उभरते बाजारों की सबसे कमजोर प्रदर्शन करने वाली मुद्राओं में से एक बन गया है। इस पर महंगे तेल, पूंजी की निकासी, बढ़ते व्यापार घाटे और मजबूत होते अमेरिकी डॉलर का दबाव है।

साल 2026 में अब तक इसकी कीमत में लगभग 7 प्रतिशत की गिरावट आई है और फरवरी के आखिर में ईरान संघर्ष शुरू होने के बाद से यह लगभग 6 प्रतिशत नीचे आया है।

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