तूफानों का सामना कैसे करेगा नया खून?

बच्चों को मुश्किल हालात का सामना करना सिखाया जाए

तूफानों का सामना कैसे करेगा नया खून?

बच्चों को मजबूत और चरित्रवान बनाना है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल के वीर शहीदों को याद कर उन्हें देशवासियों की ओर से श्रद्धांजलि दी है। जुलाई में देशभर में कारगिल के शहीदों के सम्मान में कार्यक्रम होते हैं। वहीं, अगस्त में स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। उन योद्धाओं ने अपनी जान की बाज़ी लगाकर हमारे देश की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा की थी। उन्हें याद करना इसलिए भी प्रासंगिक है, क्योंकि वे उस ज़माने का नया खून थे। उनके कारनामों पर फख्र होता है। वहीं, दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर भारत के विभिन्न शहरों में सीजेपी प्रदर्शन के नाम पर जिस तरह कई लोगों ने अभद्रता और अश्लीलता का तांडव मचाया, आपत्तिजनक इशारे किए, उससे माथा शर्म से झुक जाता है। ये लोग किन्हें अपना आदर्श मान बैठे हैं? इन्हें ऐसी हरकतें किसने सिखाईं? आज के कई युवाओं को कारगिल के अमर बलिदानियों के बारे में कुछ मालूम ही नहीं है। वे दिनभर रील देखते हैं और उन लोगों को अपना हीरो मानते हैं, जिन्होंने फिल्मों और वेबसीरीजों में अश्लीलता की बारिश कर रखी है। वे उनके आपत्तिजनक संवादों को दोहराकर खुद को आधुनिक दिखाना चाहते हैं। याद करें, कैप्टन मनोज कुमार पांडेय को, जो सिर्फ 24 साल की उम्र में भारत मां के लिए बलिदान हो गए थे! इतनी ही उम्र में, कैप्टन विक्रम बत्रा साहस और बलिदान की मिसाल बन गए थे। कैप्टन सौरभ कालिया ने देश के लिए प्राण दे दिए, लेकिन अपने लक्ष्य से नहीं डिगे थे। मेजर विवेक गुप्ता सख्त हालात में तोलोलिंग पर तिरंगा लहराने का इरादा लेकर निकले थे। मेजर पद्मपाणि आचार्य गोलियों की बौछार में भी लक्ष्य की ओर बढ़ते रहे थे। ऐसे कई बलिदानियों ने उस युद्ध में सीने पर गोलियां खाई थीं। उन्होंने अपना लहू बहाया था, इसलिए आज हम सुरक्षित हैं। युवाओं के आदर्श ऐसे योद्धा होने चाहिएं, न कि वे कथित सेलिब्रिटी जो उन्हें उल्टी सीख देते हैं।

Dakshin Bharat at Google News
नई पीढ़ी के दिलो-दिमाग में कुछ ऐसी आदतें घर कर गई हैं, जो उन्हें कमजोर बनाती हैं। मोबाइल फोन पर अत्यधिक निर्भरता, सुख-सुविधाओं का आदी होना, मानसिक भटकाव, जरा-सी तकलीफ आते ही आगबबूला हो जाना, सोशल मीडिया पर कोई महंगी चीज देखकर उसे पाने के लिए लालायित रहना - ये आदतें उन्हें कैसा नागरिक बनाएंगी? कभी-कभी महसूस होता है कि इन बच्चों के लिए सैन्य प्रशिक्षण अनिवार्य होना चाहिए, ताकि इनमें कुछ अनुशासन आ जाए, समस्याओं से जूझने का जज्बा पैदा हो जाए। भले ही हथियार चलाने और अन्य तकनीकी विषयों की जानकारी न दी जाए, लेकिन मुश्किल हालात का सामना करना सिखाया जाए। इन्हें बताया जाए कि मोबाइल फोन के बाहर भी एक दुनिया है। उसे देखने का खास नज़रिया पैदा किया जाए। भारत के सामने कौनसी चुनौतियां हैं? हमारे पास कौनसी शक्तियां हैं? हम बाधाओं पर विजय कैसे प्राप्त कर सकते हैं? युवाओं को इनकी जानकारी होना बहुत जरूरी है। कई अभिभावक शिकायत करते हैं कि उनके बच्चों को समय पर कोई चीज न मिले तो वे हंगामा खड़ा कर देते हैं। अगर मनपसंद सब्जी नहीं बनी तो खाना बीच में छोड़ देते हैं। ऑनलाइन ऑर्डर कर पिज्जा, बर्गर आदि मंगवा लेते हैं। अगर किसी कारणवश एक-डेढ़ घंटे के लिए बिजली कटौती हो जाए तो वे पूरी व्यवस्था को कोसने लगते हैं। अगर सुरक्षा संबंधी कारणों से इंटरनेट बंद कर दिया जाए तो एक घंटा बिताना एक युग काटने जैसा लगता है। पिछले दिनों जब पश्चिमी एशिया में सैन्य संघर्ष के कारण देश के कुछ इलाकों में एलपीजी और पेट्रोल की किल्लत के बारे में अफवाह फैली तो वे घबरा गए थे! सोचिए, भविष्य में भारत सरकार पाकिस्तान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करे और उस दौरान इंटरनेट बंद कर दिया जाए, बिजली आपूर्ति सीमित कर दी जाए और ईंधन पहुंचाने में ज्यादा समय लगे तो नई पीढ़ी की कैसी प्रतिक्रिया होगी? हमें इन बच्चों को मजबूत और चरित्रवान बनाना है, ताकि ये हर तूफान का अटल होकर सामना कर सकें।

About The Author

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download