जीवन में सफलता के लिए लगातार सीखते रहना जरूरी: प्रो. रिकार्डो

एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में दीक्षांत समारोह हुआ

जीवन में सफलता के लिए लगातार सीखते रहना जरूरी: प्रो. रिकार्डो

डॉ. वीरमुथुवेल ने कहा कि विद्यार्थियों को असफलता से हार नहीं माननी चाहिए

चेन्नई/दक्षिण भारत। एसआरएम इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में मंगलवार को दीक्षांत समारोह हुआ, जिसमें 8,500 से ज्यादा विद्यार्थियों ने डिग्री प्राप्त की। जब वे मुख्य अतिथि, वर्ल्ड फेडरेशन फॉर मेडिकल एजुकेशन (डब्ल्यूएफएमई) के अध्यक्ष प्रोफेसर रिकार्डो लियोन बोरकेज़ से डिग्री पाने के लिए खड़े हुए तो सभागार तालियों से गूंज उठा।

प्रो. रिकार्डो ने कहा कि दीक्षांत दिवस जीवन का सबसे यादगार दिन है। यह जीवन के एक चरण का समापन और दूसरे चरण की शुरुआत है, जिसमें निरंतर सीखना शामिल है। सीखना एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसका कोई अंत नहीं है। जीवन में सफलता के लिए व्यक्ति को लगातार सीखते रहना जरूरी है। पूर्णता उन्हें मिलती है, जो हमेशा ज्ञान की खोज में रहते हैं।

उन्होंने कहा कि चिकित्सा की पढ़ाई करने का अवसर मिलना बहुत गर्व की बात है। यह आपको चिकित्सा पद्धति की राह पर ले जाता है, जिसका प्रमुख उद्देश्य लोगों की जान बचाना है। मानवता के के बिना चिकित्सा का अध्ययन अधूरा होता है। नैतिकता का पालन, सहनशीलता का विकास और दृढ़ता को आत्मसात करना उन आवश्यक तत्त्वों में से हैं, जो चिकित्सकों को अच्छा चिकित्सक बनाते हैं।

भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा और चंद्रयान-3 के परियोजना निदेशक डॉ. पी वीरमुथुवेल को एसआरएमआईएसटी के संस्थापक चांसलर डॉ. टीआर पारीवेंधर द्वारा डॉक्टर ऑफ साइंस (डीएससी) की मानद उपाधि दी गई।

डॉ. वीरमुथुवेल ने कहा कि विद्यार्थियों को असफलता से हार नहीं माननी चाहिए। सफलता के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता का उदाहरण देते हुए कहा कि मिशन लॉन्च करने से पहले मून लैंडर पर कई परीक्षण करने पड़े।

वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि शिक्षा शक्ति है और खुद को बदलने का एक तरीका है। सीखना केवल तथ्यों और आंकड़ों पर महारत हासिल करना नहीं है। यह उससे कहीं आगे है। यह खुद को ज्ञान से समृद्ध बनाने और जीवन को बेहतर बनाने का एक माध्यम है।

एसआरएमआईएसटी के प्रो-चांसलर (एकेडमिक्स) डॉ. पी सत्यनारायणन ने कहा कि जीवन में जिज्ञासा और विश्लेषण जरूरी हैं। जिज्ञासा व्यक्ति को अधिक चीजें सीखने के लिए प्रेरित करती है। विश्लेषण आवश्यक ज्ञान देता है।

इस अवसर पर एसआरएमआईएसटी के वाइस चांसलर डॉ. प्रोफेसर सी मुथमिजचेलवन, रजिस्ट्रार डॉ. एस पोन्नुसामी, प्रो-वाइस चांसलर (मेडिकल) लेफ्टिनेंट कर्नल डॉ. ए रविकुमार, एसआरएमआईएसटी (त्रिची और रामपुरम कैंपस) के अध्यक्ष डॉ. आर शिवकुमार, और एसआरएम आर्ट्स एंड साइंस कॉलेज (कट्टनकुलथुर) के कॉरसपॉन्डेंट हरिनी रवि आदि मौजूद थे।

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