मानवता की सेवा
काशी में एक संत रहते थे। उनके आश्रम में कई शिष्य अध्ययन करते थे। कुछ शिष्यों की शिक्षा पूरी होने पर एक दिन संत ने उन्हें बुलाकर कहा, ‘अब तुम लोगों को समाज के कठोर नियमों का पालन करते हुए भी विनम्रता से समाज की सेवा करनी होगी।’ एक शिष्य ने कहा, ‘गुरुदेव, हर समय [...]
Aug 20 2011 | Posted in Prasang | Read More »


