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बाजार:

संपादकीय

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पिछले कुछ हफ़्तों से राष्ट्रीय और अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में सोने का सुनहरा रंग फीका पड़ता नज़र आ रहा है। इस धातु की अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में कीमत लगातार गिर रही है। अंतराष्ट्रीय बाज़ारों में इसकी कीमत पिछले 5 वर्षों के न्यूनतम स्तर पर पहुंच गई है। भारत में भी सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम के लिए लगभग 25000 रुपयों के आस पास मंडरा रही है। इस तरह की गिरावट को आम तौर पर होने वाले दामों के उतार चढ़ाव से जोड़ कर नहीं देखा जा सकता। ग्रीस और चीन में आए आर्थिक संकट के बावजूद सोने की कीमतों में मज़बूती नहीं दिखाई दी बल्कि इसी दौरान कीमतों में लगातार गिरावट होती रही। सोने को निवेशकों द्वारा एक सुरक्षित निवेश माना जाता है परन्तु मौजूदा स्थिति से लग रहा है कि निवेशकों का रुझान सोने की ओर से हटकर निवेश के अन्य विकल्पों की ओर आकर्षित होता नज़र जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि अभी सोने की कीमतों में और भी गिरावट आएगी और सोना 20 से 21 हज़ार प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है।

सोने की कीमत में आ रही कमी का मुख्य कारण अमेरिका द्वारा ब्याज दरों के बढ़ाए जाने की खबर है। अमेरिकी फ़ेडरल रिज़र्व द्वारा संकेत दिए गए हैं कि जल्द ही ब्याज दरें बढ़ाई जाएंगी। अमेरिका की अर्थ व्यवस्था आर्थिक सुधारों के मद्देनज़र उबरती नज़र आ रही है। मज़बूत डॉलर और बढ़ती ब्याज दर से सोने की कीमतों में सदा ही कमी आती है और यही अभी होता नज़र आ रहा है। डॉलर की मज़बूती से डॉलर में निवेश करने वालों की संख्या बढ़ती है और साथ ही मुद्रा में निवेश करने से तरलता का फायदा भी मिलता है। प्रमुख देशों में और सोने के बड़े आयातकर्ता भारत और चीन की मुद्रास्फीति में भी नरमी आई है। ऐसे में सोने में निवेश करने वालों ने अन्य विकल्पों को बेहतर माना है।

भारत में स्वर्णाभूषणों की खरीददारी में जहां एक तरफ कमी नहीं आई है वहीं सोने में निवेश करने वालों ने सोने से किनारा कर लिया है। चीन में आर्थिक संकट के हालात बने हुए हैं और ऐसे में चीन में दोनों ही तरह के खरीददारों ने सोने से दूर रहने का फैसला कर लिया है। भारत और चीन विश्‍व में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ता हैं और इन दोनों देशों में अगर सोने की खरीददारी में किसी भी कारण से कमी आती है तो निश्‍चित रूप से विश्‍व स्तर पर इसका असर साफ़ नज़र आता है।

सोने की गिरती कीमतों से भारत को इसका फायदा होगा। देश में आयात होने वाले सभी पदार्थों में सोने का हिस्सा काफी बड़ा है और ऐसे में सोने की गिरती कीमतों से व्यापार घाटे में कमी आएगी जो देश की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत अच्छा है। गिरती कीमतों के बावजूद घरेलू खरीददारी में बहुत इजाफा नहीं हुआ है क्योंकि लोगों द्वारा उम्मीद लगाई जा रही है कि कीमतों में निकट भविष्य में और अधिक गिरावट आएगी। सरकार को इस अवसर का फायदा उठाते हुए लोगों को सोने के निजी निवेश से हटाकर सरकारी योजनाओं में निवेश करने के लिए आकर्षित करना चाहिए। अगर सरकार अपनी स्वर्ण निवेश योजना को देश की जनता के लिए आकर्षित बनाने में सफल रहती है तो यह आर्थिक व्यवस्था में सुधार का अच्छा अवसर है।

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इस्लामिक स्टेट (आईएस ) आतंकवादी संगठन के एक भर्ती दस्तावेज का खुलासा हुआ है जिसमेंे संगठन द्वारा अमेरिका को आईएस के खिलाफ युद्ध में खींचने के लिए भारत पर आतंकी हमला करने की बात कही गई है। अमेरिकी अखबार यूएसए टुडे में छपी खबर के अनुसार उर्दू में छपी 32 पृष्ठों की एक पुस्तिका अमेरिकन मीडिया इंस्टीट्यूट (एएमआई) के हाथ लगी है जिसमें कहा गया है कि भारत पर हमला करने से अमेरिका को युद्ध में खींचा जा सकता है। इस पुस्तिका में पाकिस्तानी और अफगानी तालिबान के अलगावादी संगठनों को एकजुट होने की रणनीति भी बताई गई है। आईएस की कोशिश है कि अलग अलग छोटे संगठनों के बदले कट्टरपंथियों का एक मात्र बड़ा संगठन तैयार हो सके। अमेरिकन मीडिया इंस्टीट्यूट को मिले इस दस्तावेज का अंग्रेजी में अनुवाद हार्वर्ड के एक विद्वान द्वारा किया गया है। इस दस्तावेज का सत्यापन भी अमेरिकी ख़ुफ़िया एजेंसियों के अनेक अधिकारियों ने किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति के कार्यालय ने इस दस्तावेज की जांच शुरू की है और कहा है कि व्हाइट हाउस स्थिति पर नज़र बनाए हुए है।

भारत सरकार ने इस मामले में पहली प्रतिक्रिया देते हुए इस दस्तावेज को निराधार और बकवास बताया है। दस्तावेज की जांच करने वाले अधिकारियों का मानना है कि इस दस्तावेज से आईएस की योजना का अनुमान होता है और ऐसे दस्तावेज की जांच पूर्ण रूप से होनी चाहिए भले ही वह ठोस तत्वों पर आधारित न हो। भारत के खिलाफ किसी भी तरह के हमले की योजना और ऐसे मंसूबे को अंजाम तक ले जाने की ख्वाहिश अनेक कट्टरपंथी संगठनों की होती है। इस दस्तावेज में यह साफ़ नहीं हो सका है कि आईएस भारत पर हमले की योजना से अमेरिका को किस तरह से युद्ध में घसीटना चाहता है।

इससे पहले भी आईएस आतंकी संगठन द्वारा कई विचित्र मंसूबों की बात कही गई है। भारत में आईएस की मौजूदगी बिल्कुल नहीं के बराबर है और शायद भारत सरकार ने इसी कारणवश आईएस के दस्तावेज को निराधार बताया है परन्तु भारत को इस दस्तावेज को पूरी तरह से नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। पिछले कुछ दिनों में कश्मीर में कुछ प्रदर्शनों के दौरान आईएस के समर्थन वाले झंडे लहराए गए थे। हालांकि यह संभव है कि आईएस की विचारधारा का समर्थन करने वाले कुछ स्थानीय तत्वों ने ऐसा किया हो परन्तु भारत सरकार को पूरी तरह चौकन्ना रहते हुए आईएस सम्बन्धी किसी भी तरह की गतिविधि पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। सरकार के साथ ही देश के प्रत्येक नागरिक की भी यह ज़िम्मेदारी है कि अपने आसपास किसी भी तरह की संदेहास्पद गतिविधियों पर नज़र रखेें और समय रहते संबंधित अधिकारियों को सूचना दी जाए। अगर प्रशासन के साथ देश के नागरिक भी जागरूक रहेंगे तो निश्‍चित तौर पर भारत की सुरक्षा चाक चौबंद रहेगी।

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सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में हुए हमले का सामना हमारे देश के सुरक्षाकर्मियों ने अपनी जांबाजी से करते हुए हमले के लिए ज़िम्मेदार तीनों आतंकवादियों को मार गिराया। घटना स्थल पर मौजूद टीवी कैमरों से देश भर के लोगों ने पंजाब पुलिस के जवानों की जांबाजी लगातार अपने टीवी स्क्रीन पर देखी। न्यूज़ चैनलों के कैमरों में पंजाब पुलिस के जवान बिना बुलेट प्रूफ जैकेट पहने बड़ी ही दिलेरी से आतंकवादियों का सामना करते नज़र आये। अनेक टीवी चैनलों ने पंजाब पुलिस के एक जवान को आतंकवादियों के ठिकाने पर एक ग्रेनेड फेंकते हुए और फिर एक टंकी के पीछे छुपते हुए दिखाया। कहा जा रहा है कि पंजाब पुलिस अब इस जवान को अपनी बहादुरी के लिए सम्मानित करने का मन बना रही है।

जिस तरह से इस अभियान में पंजाब पुलिस के जवानों की बहादुरी सामने आयी है उसी तरह से प्रसाशन की खामियंा भी सामने आयी हैं। टीवी कवरेज के वीडियो में दिख रहा है कि अधिकतम पुलिसकर्मियों ने ना तो बुलेट प्रूफ जैकेट पहने हैं और ना ही हेलमेट लगाए हैं। ऐसे में आतंकवादियों की गोलियों से बचने के लिए उन्होंने बिल्डिंग के आस पास की दीवारों का ही सहारा लिया। साथ ही पुलिसकर्मियों के हथियार भी आतंकवादियों के हथियारों से कमज़ोर थे और पुरानी बंदूकों से ही पुलिस वालों ने आधुनिक हथियारों से लैस आतंकियों का सामना किया। सूत्रों के अनुसार पुलिसकर्मियों को आतंकवादियों की गतिविधियों पर नज़र रखने के लिए दूरबीन हासिल करने के लिए भी काफी मशक्कत करनी पड़ी और इसमें भी अहम समय बर्बाद हुआ।

हमारे देश के प्रसाशन को समझना होगा कि ऐसी आपातकालीन स्थितियों में सबसे अहम होती है त्वरित प्रतिक्रिया। यह भी जरूरी है कि एक सुनिश्चित व्यवस्था के अनुसार ही सुरक्षाकर्मियों द्वारा ऐसे समय पर कार्रवाई की जानी चाहिए। सरकार को देश के सभी हिस्सों में पुलिसकर्मियों को एक निर्धारित हथियारों से लैस करना होगा और समय समय पर इन हथियारों के आधुनिकीकरण का भी ध्यान रखना होगा। ऐसी घटनाओं में कार्रवाई के लिए भेजे जा रहे जवानों के पास आवश्यक सुरक्षा कवच और उपकरणों की कमी नहीं होनी चाहिए। सोमवार को हुए अभियान में जहॉं देखा गया कि समय रहते सेना और एनएसजी का दस्ता मौजूद था परन्तु राज्य सरकार ने पंजाब पुलिस की अगुवाई में ही इस अभियान को पूरा करना बेहतर समझा। क्या ऐसे समय पर केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय की कमी से हमारे जवानों की जान को बड़ा खतरा नहीं हो जाता? दूसरी बात, कई बार ख़ुफ़िया एजेंसियों की चेतावनियों को सिर्फ समन्वय की कमी की वजह से नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है और ऐसा करना देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक है।
देश के राजनीतिज्ञों को समझना चाहिए कि देश की पुलिस के आधुनिकीकरण में किसी भी तरह का विलम्ब देश के लिए खतरनाक है। भारत विश्व की बड़ी आर्थिक शक्तियों में गिना जाता है और ऐसे में देश की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार्य नहीं होना चाहिए।

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सोमवार शाम को शिलांग के एक शिक्षा संस्थान में वक्तव्य देने गए डॉक्टर एपीजे अब्दुल कलाम को अपने व्यक्तव्य के बीच में ही दिल का दौरा पड़ने की वजह से वे स्टेज पर ही गिर पड़े। चौरासी वर्षीय कलाम ने शहर के बेथानी अस्पताल में अंतिम सॉंसें ली। मंगलवार को उनका पार्थिव शरीर दिल्ली लाया गया जहां देश के रत्न को राष्ट्रीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गयी। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए देश के राष्ट्रपति प्रणब मुख़र्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिल्ली के पालम हवाई अड्डे पर मौजूद थे। उन्हें तीनों सेना के प्रमुखों ने भी श्रद्धांजलि प्रदान की। सोमवार की शाम भारत ने अपने रत्न को खो दिया और कलाम पीछे एक ऐसी रिक्तता छोड़ गए जिसे कभी भरा नहीं जा सकता।

देश भर में मंगलवार को लाखों श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन हुआ। अनेक शिक्षा संस्थानों ने उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किए। सोशल मीडिया पर भी अधिकांश लोगों ने कलाम को अपनी अपनी तरह से अंतिम विदाई देने की कोशिश की। देश के भूतपूर्व राष्ट्रपति रह चुके अब्दुल कलाम बच्चों और युवाओं के बीच बहुत लोकप्रिय थे। उन्हें खुद भी बच्चों के बीच रहना पसंद था और राष्ट्रपति के कार्यकाल के समाप्त होने के अगले दिन ही वह स्कूल में बच्चों को पढ़ाने पहुँच गए थे। उनका जीवन सादगी से भरा हुआ था। देश के मिसाइल मैन के नाम से प्रसिद्ध कलाम को देश के वैज्ञानिकों का भी प्यार हासिल था। देश के राष्ट्रपति के रूप में भी उन्होंने राष्ट्रपति पद की गरिमा बढ़ाई।

अगर भारत के नागरिकों को कलाम को सच्ची श्रदांजलि देनी है तो उनके जीवन मन्त्रों को अपनी जीवन शैली में ढालना होगा। कलाम ने आसान शब्दों में कहा है कि अगर किसी को अपने लक्ष्य तक पहुंचना है तो उसे पूरी निष्ठा के साथ अपने लक्ष्य की और बढ़ना होगा। कलाम के अनुसार अगर हम अपने वर्तमान में सुधार ला सकें तो हमारे आने वाली पीढ़ियों के लिए एक बेहतर भविष्य छोड़ जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा है कि परमात्मा उसी की मदद करता है जो खुद मेहनत करता है और अगर किसी को सफलता का आनंद उठाना है तो पहले उसे संघर्ष तो करना ही होगा। कलाम हमेशा ही बच्चों के बीच ऐसी सरल और साफ़ सोच को प्रोत्साहित करते रहे हैं। उनका यह भी मानना था कि जब तक बच्चे अपने साथियों के साथ खेलेंगे नहीं तब तक उनमें आत्मविश्वास और प्रतिस्पर्धा की भावना नहीं आएगी जो उनके विकास के लिए अनिवार्य है।

भारत ने अपने सबसे अमूल्य रत्न को खोया है। डॉक्टर कलाम की दूरदर्शिता ही उनकी पहचान थी। उन्होंने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया था और जीवन के आठवें दशक में पहुँचने के बाद भी लगातार काम कर रहे थे। उनके जीवन से सभी को प्रेरणा लेने की जरूरत है और जितना हो सके उनके जीवन सिद्धांतों को अपनाने की कोशिश करनी चाहिए।

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सोमवार को पंजाब के गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले में आतंकियों ने आठ लोगों को मौत के घाट उतार दिया। पंजाब में भारत पाक सीमा के करीब स्थित गुरदासपुर में हुई इस घटना में आधुनिक हथियारों से लैस उग्रवादियों ने पहले एक कार को अपने कब्ज़े में लिया और फिर उसी कार से नज़दीक ही स्थित एक पुलिस थाने पर हमला कर दिया। एक वरिष्ठ अधिकारी सहित 4 पुलिसकर्मियों ने अपनी जान गंवाई है। सुरक्षा बालों ने आतंकियों के खिलाफ लगभग ग्यारह घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद पुलिस थाने में घुसे तीनों आतंकवादियों को मार गिरा दिया।

इसी महीने की शुरुआत में भारत के प्रधानमंत्री ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ से मुलाकात की थी और यह भी निर्णय हुआ था कि दोनों ही देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों की बैठक होगी और आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाए जाएंगे। नरेंद्र मोदी ने अगले वर्ष पाकिस्तान दौरा करने का आश्वासन भी दिया था। एक तरफ भारत बार बार पाकिस्तान की ओर दोस्ती का हाथ बढ़ाता है और दूसरी तरफ पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आई एस आई की मदद से आतंकवादी भारत में घुसपेठ करने की कोशिश में लगे रहते हैं।

यह भी देखा गया है कि सीमा से सटे इलाकों में लगातार युद्ध विराम का उल्लंघन पाकिस्तान की ओर से होता रहता है। पाकिस्तान में भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले आतंकियों को खुली छूट मिली हुई है और भारत द्वारा अनेक आतंकवादियों के बारे में सबूत और अन्य जानकारी दिए जाने के बाद भी पाकिस्तान द्वारा उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं हो रही है। सोमवार को गुरदासपुर में हुए हमले के तार भी सीमा पार ही जाते नज़र आ रहे हैं। जम्मू से भारतीय जनता पार्टी के सांसद और केंद्र सरकार में राज्यमंत्री जितेन्द्र सिंह ने पाकिस्तान की भागीदारी से इंकार नहीं किया है और साथ ही यह भी कहा है कि इस घटना से पहले भी पाकिस्तान की ओर से इस क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश होती रही है।

भारत को पाकिस्तान के खिलाफ एक कड़ा रुख अख्तियार करना चहिए और साथ ही पाकिस्तान से किसी भी तरह के व्यापारिक अनुबंधों को भी खत्म कर देना चाहिए। भारत की अर्थव्यवस्था पाकिस्तान के मुकाबले बहुत बड़ी है और विश्व में भारत के बढ़ते ओहदे से कई देशों को भारत से व्यापार करने की लालसा है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के अंदरुनी संघर्ष की वजह से कई देश पाकिस्तान से व्यापार करने से घबराते हैं। अगर पाकिस्तान पर राजनैतिक दबाव के साथ ही भारत आर्थिक दबाव बनाता है तो उससे पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा। भारत को पाकिस्तान के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में भी कड़ा रुख अपनाना होगा और भविष्य में जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को समर्थन देगा तब तक दोनों देशों के बीच के रिश्तों को सुधरने के लिए पहल नहीं करनी चाहिए क्योंकि भारत की दोस्ती की पहल को पाकिस्तान द्वारा कमज़ोरी के रूप में देखा जाता है। भारत को पाकिस्तान को यह महसूस कराना होगा कि किसी भी तरह की गुस्ताखी को हल्के में नहीं लिया जाएगा और अगर भारत की सुरक्षा पर किसी भी तरह का खतरा होगा तो बहुत ही सख्ती से भारत उसका सामना करेगा।

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राज्य की नई पर्यटन नीति से कर्नाटक के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊर्जा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। कर्नाटक पर्यटन नीति 2015-20 में एक अनोखी पहल से सरकार ने राज्य के अनेक पर्यटन स्थलों को गोद लेने के लिए निजी कंपनियों से विचार विमर्श किया था। ’अडॉप्ट ए टूरिस्ट डेस्टिनेशन’ के तहत सरकार ने राज्य के 319 पर्यटन स्थलों में से 46 स्थलों को अपनाने का मौका निजी कॉरपोरेट कंपनियों दिया है। इस योजना के अनुसार जो भी कॉरपोरेट कंपनी किसी पर्यटन स्थल को अपनाती है उसे उस स्थान के रखरखाव का पूरा ध्यान रखना होगा। साथ ही उस स्थान पर आवश्यक सभी सुविधाओं का ध्यान भी रखना होगा ताकि पर्यटकों को किसी भी तरह की परेशानी ना आए। पर्यटन स्थल एवं उसके आसपास आवश्यक रौशनी की सुविधा, शौचालयों का निर्माण एवं पर्यटन स्थल के बारे में जानकारी देते हुए साइन बोर्ड लगाना भी पर्यटन स्थल को अपनाने वाली कंपनी की ज़िम्मेदारी होगी। इन सभी कार्यों के लिए आवश्यक धन राशि का संग्रह करना भी निजी कंपनी के ही ज़िम्मे होगा। देश के कई स्थानों में सार्वजनिक निजी साझेदारी का यह मॉडल सफल रहा है और कर्नाटक सरकार ने अपने राज्य के पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से यह कदम उठाया है।

देश की राजधानी दिल्ली में ऐसी ही सार्वजनिक निजी साझेधारी का एक अच्छा उदाहरण है। हुमायूँ के मकबरे को निजी न्यास ने अपनाकर उसके जीर्णोद्धार के लिए आवश्यक कदम उठाए। आज मकबरों और आस पास के सभी उद्यानों को एक शानदार नया रूप मिला है। राज्य सरकार की ’अडॉप्ट ए डेस्टिनेशन’ योजना का मुख्य लक्ष्य सुन्दर पर्यटन स्थलों और शानदार सुविधाओं से राज्य में पर्यटकों को आकर्षित करना और राज्य के पर्यटन व्यापार को नई ताकत देना है। सरकार की इस कोशिश से छः कंपनियां जुड़ चुकी हैं। देश भर में आधुनिक कॉफी हॉउस के लिए मसहूर कॉफ़ी डे ने बेलूर और हलेबिड पर्यटन स्थलों को अपनाया है। इसी तरह वेंकटप्पा आर्ट गैलरी, लालबाग जैसे लोकप्रिय स्थलों को भी अपनाने के लिए निजी कम्पनियों ने कदम बढ़ाए हैं। किसी भी पर्यटन स्थल के अच्छे रखरखाव के लिए सिर्फ पर्यटकों को आकर्षित करना अनिवार्य नहीं है बल्कि उस पर्यटन स्थल के ऐतिहासिक सौंदर्य को बरकरार रखना भी होता है।

पर्यटन विभाग के अधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि राज्य के किसी भी पर्यटन स्थल की विशिष्टता किसी भी तरह से खंडित न हो। निजी कम्पनियों से भी ऐसे पर्यटन स्थलों को व्यवसायिक फायदे के लिए किसी प्रकार से हनन न हो सके और साथ ही अगर किसी निजी कंपनी द्वारा अपनाए गए पर्यटन स्थल में किसी भी तरह की कमी हो तो बिना किसी भी तरह के विलंब के और पर्यटन स्थल को किसी भी तरह की हानि पहुंचा सरकार को कार्यवाही करते हुए वह पर्यटन स्थल वापस अपने कब्जे में लेना होगा। निजी कम्पनियों द्वारा पर्यटन स्थलों के रख रखाव से इनमें अच्छी सुविधाओं को प्रदान करने का मौका मिलेगा और साथ ही राज्य के पर्यटन को भी एक नयी ताकत मिलेगी। यहां पर सरकार और पर्यटन विभाग के अधिकारियों की ज़िम्मेदारी दोहरी है। उन्हें राज्य के पर्यटन स्थलों के रख रखाव के लिए निजी कम्पनियों को भी आकर्षित करना है और साथ ही पर्यटकों के हितों के बारे में भी सोचना है।

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भारतीय रेल के आधुनिकीरण और विकास के लिए निजी क्षेत्र से सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पी पी पी) मॉडल के तहत निवेश की योजना पर विचार विमर्श चल रहा है और इस दिशा में देश के 400 रेलवे स्टेशनों को विकसित करने का सुझाव दिया गया है। भारतीय रेल की आर्थिक स्थिति काफी कमज़ोर है और ऐसे में निजी क्षेत्र से निवेश एक अच्छा कदम साबित हो सकता है। भारतीय रेल को प्रति स्टेशन के आधुनिकीरण और विकास के लिए लगभग 100 करोड़ रुपए का खर्चा आएगा अगर इसी आकड़े के अनुसार चार सौ स्टेशनों का हिसाब लगाया जाए तो लागत 40 हज़ार करोड़ तक पहुँच जाएगी। भारतीय रेल इतनी बड़ी धनराशि को स्टेशनों के नवीनीकरण पर लगाने के लिए सक्षम नहीं है। भारतीय रेल को निजी क्षेत्र से निवेश को सही ढांचे के तहत स्वीकार करना चाहिए। पीपीपी मॉडल में अनेक प्रणालियां उपलब्ध हैं लेकिन रेलवे को वह मॉडल चुनना होगा जो देश की जनता का हित ध्यान में रखकर सबसे अधिक लाभदायक हो। सामान्य तौर पर सड़कें, बंदरगाह जैसी बड़ी परियोजनाओं में पीपीपी मॉडल का इस्तेमाल होता है।

देश के अधिकतम रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीरण एवं नवीनकरण के लिए मुख्य चुनौती है सीमित जगह में नई सुविधाओं की शुरुआत करना। पीपीपी मॉडल की सफलता के लिए सरकार को पहले से चौकन्ना रहना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि कार्य का ठेका दिए जाने की प्रक्रिया पूर्ण रूप से पारदर्शी हो। साथ ही ठेके के अनुबंध से पहले यह भी जांच करनी होगी कि साझेदारी में आने वाली कंपनी को सभी आवश्यक मंजूरी प्राप्त है या नहीं। भारतीय रेल को यह देखना होगा कि किसी भी कार्य में ठेके के दिए जाने के बाद कार्य में किसी भी तरह का विलंब न हो। सरकार और रेल बोर्ड के सदस्यों को यह भी देखना होगा की निजी कंपनियों को ऐसे मॉडल से फायदा भी हो सके और साथ ही आम जनता को किसी भी तरह की परेशानी न हो। अगर आम जनता को ऐसी किसी भी सुविधा से परेशानी होती है तो जनता के विरोध को झेलना पड़ सकता है। अगर निजी निवेशक इस परियोजना से किसी भी तरह से लाभान्वित नहीं होता तो भविष्य में ऐसी योजनाओं में निवेश करने के लिए निजी निवेशक घबराएंगे। रेलवे के मुख्य कार्य, जनता की आवाजाही पर बिना किसी भी तरह की बाधा डाले अगर कुछ विभागों का निजीकरण कर दिया जाता है तो इससे रेलवे को भी अपने मुख्य कार्य पर केंद्रित होने का मौका मिलेगा। आर्थिक संकट से जूझ रही भारतीय रेल को किसी भी तरह की आर्थिक मदद मिलने से देश के सबसे बड़े सार्वजनिक संस्थान को बेहतर बनाने के नए विकल्प खुल सकेंगे। अगर रेलवे इस पहली कोशिश में सफल रहती है तो भविष्य में भारतीय रेल से विश्वस्तरीय सुविधाओं की उम्मीद की जा सकती है और इसके लिए संबंधित अधिकारियों को निजी निवेशकों के साथ अनुबंध प्रक्रिया में सभी नियमों और शर्तों को बारीकी से परख कर कदम आगे बढ़ाने होंगे। भारतीय रेल एशिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है तथा एकल प्रबंधनाधीन यह विश्व का दूसरा सबसे बड़ा रेल नेटवर्क है और इसके सामने विश्व के सबसे आधुनिक रेल नेटवर्क बनने का सुनहरा मौका है।

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आंध्रप्रदेश के राजमंदरी में गोदावरी नदी के किनारे आयोजित महापुष्करम् के दौरान मची भगद़ड़ में 27 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी। आंध्रप्रदेश सरकार की निगरानी में हुए इस आयोजन में ऐसे हादसे से फिर एक बार सार्वजनिक कार्यक्रमों के आयोजन प्रक्रिया में लापरवाही का मनोभाव फिर सामने आया है। भारत में सदियों से ऐसे बड़े धार्मिक आयोजन होते रहते हैं और हर बार प्रशासन के सामने मुख्य चुनौती होती है भीड़ पर नियंत्रण करना। इस घटना से पहले भी कई बार सरकार के अधिकारियों द्वारा भीड़ नियंत्रण में विफलता की वजह से भगदड़ जैसी दुखद घटनाएं होती रही हैं। राजमंदरी में 12 दिवसीय आयोजन के पहले दिन ही भीड़ को नियंत्रण में रखने में असफल रहे प्रशासन की खामियां भी सामने आई हैं। आंध्रप्रदेश में चल रहे महापुष्करम् की तैयारियों में सैकड़ों करोड़ों रुपयों की लागत आई है परंतु ऐसे बड़े आयोजन के लिए अनिवार्य सुरक्षा उपायों की अनदेखी की गयी है। प्रशासन पर यह भी आरोप हैं कि उसने इस मेले में शामिल होने वाले लोगों की संख्या का सही आंकलन नहीं किया और साथ ही इस कार्यक्रम में भाग लेने आने वाले विशिष्ट व्यक्तियों के लिए विशेष सुविधाएं प्रदान करने के चक्कर में आम जनता की जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया। मुख्यमंत्री चन्द्रबाबू नायडू सहित अनेक मंत्रियों ने इस आयोजन में भाग लिया था।

देश भर के अधिकतम तीर्थ स्थलों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी होती है और सिर्फ लोगों की आस्था पर ही ऐसे आयोजन की सफलता मापी जाती है। जब किसी भी तीर्थ स्थान पर कोई भी प्रकार का विशेष आयोजन होता है तो अस्थाई सुविधाएं उपलब्ध करने की जिम्मेदारी प्रशासन की ही होती है। देश के कई धार्मिक आयोजन इतने विशाल होते हैं कि आयोजन के समय पर भारतीय रेल को भी यात्रिओं के आवागमन के लिए विशेष ट्रेनों को चलना पड़ता है। ऐसे में सरकार के किसी भी अधिकारी द्वारा बरती गई लापरवाही से होने वाले नुकसान पर सरकार के उच्च अधिकारियों को भी ध्यान देना चाहिए। सरकार या प्रशासन के लिए ऐसे आयोजनों के लिए आवश्यक सुविधाओं को सही तरीके से उपलब्ध करने में कोई परेशानी नहीं होनी चाहिए क्योेंकि प्रशासन को इन आयोजनों की निर्धारित तिथि की घोषणा काफी समय पूर्व ही कर दी जाती है। कई बार यह देखा गया है की तैयारियों में लापरवाही बरती जाती है और समय सीमा के पास आते ही कई फैसले हड़बड़ी में लिए जाते हैं। आयोजन में अपेक्षित श्रद्धालुओं के लगभग 30 प्रतिशत अधिक संख्या के अनुसार तैयारी होनी चाहिए साथ ही ऐसे आयोजनों के लिए प्रवेश और निकास द्वारों की कमी नहीं होनी चाहिए ताकि भीड़ किसी भी तरह से एक स्थान पर एकत्रित न हो जाए। भीड़ के प्रवाह को सँभालते हुए अन्य आवश्यक सुविधाओं पर भी ध्यान देने की जरूरत है। कई बार देखा गया है कि सरकारी विभागों के बीच समन्वय की कमी होने की वजह से श्रद्धालुओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। अब प्रशासन को ऐसे आयोजनों की तैयारियों को बिना किसी भी तरह की लापरवाही के अंजाम देने की जरुरत है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की दुखद घटना न हो और साथ ही किसी भी तरह की आपातकालीन चुनौती का सामना करने की पूरी तैयारी के साथ ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन की तैयारी करने की जरूरत है।

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स्किल इंडिया योजना से नरेंद्र मोदी सरकार ने युवाओं के कौशल को बढ़ाने के लिए एक नई शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनेक अनूठी योजनाओं की शुरुआत की हैं और इनमें डिजिटल इंडिया, स्मार्ट सिटी, मेक इन इंडिया, नमामि गंगे, एवं स्वच्छ भारत योजनाएं प्रमुख हैं। सरकार द्वारा शुरू की गई नयी योजना स्किल इंडिया से इन सभी योजनाओं को भरपूर समर्थन मिलेगा। आने वाले दो दशकों में 38 करोड़ से भी अधिक लोग सरकारी कर्मचारियों की संख्या में जुड़ जायेंगे और लगभग 10-12 लाख लोग प्रति वर्ष नौकरी की तलाश करेंगे। भविष्य में आने वाली इस बड़ी चुनौती के लिए वर्तमान में ढूंढा जा रहा जवाब है स्किल इंडिया। अगर सरकार आने वाले समय की बढ़ती प्रतिस्पर्धा को ध्यान में रखते हुए युवाओं के लिए अवसर तैयार करेगी तो निश्चित रूप से देश के कर्मचारियों को सफलता ही मिलेगी। सरकार ने उपरोक्त अनेक नई योजनाएं शुरू की हैं और अगर इन सभी सरकारी योजनाओं को सफल बनाना है तो उसके लिए सरकार को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि देश के युवाओं के कौशल विकास में किसी भी तरह की कमी न रहे और सरकार की योजनाओं से प्रदान किए जा रहे अवसरों का युवाओं को भरपूर लाभ मिल सके।

मौजूदा स्थिति में भारत के युवाओं के कौशल विकास का आंकड़ा बहुत ही कम है और सरकार को इस आंकड़े को बढ़ाने के लिए काफी मशक्कत करनी होगी। चिंता की बात यह भी है कि देश की श्रम शक्ति में से लगभग 90 प्रतिशत से भी अधिक संख्या अकुशल श्रमिकों की है। अगर देश को अपने कार्य बल को विश्व स्तरीय बनाना है तो युवाओं के कौशल का चौतरफा विकास अनिवार्य है। पिछली सरकार ने भी कौशल विकास के महत्व को समझा था और होनहार भारत योजना की शुरुआत की थी। इस योजना के तहत राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) का गठन किया गया था। मौजूदा केंद्र सरकार भी कौशल विकास पर अपना ध्यान केंद्रित कर आगे बढ़ रही है। इसी सोच के चलते केंद्र सरकार ने एक नया मंत्रालय बनाया है जिसके अंतर्गत कौशल विकास और उद्यमिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

सरकार द्वारा प्रदान कराई जा रही इन सभी सुविधाओं के बावजूद सरकार के सामने कौशल विकास की चुनौती बहुत ही विशाल है। सरकार की कोशिश है कि वर्ष 2022 तक चालीस करोड़ के लक्ष्य तक कौशल विकास की सुविधा पहुँच सके। सरकार द्वारा जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं और युवाओं को कौशल विकास की ओर आकर्षित करने की कोशिश जारी है परन्तु सफलता पूर्वक इस लक्ष्य तक पहुँचने के लिए सरकार को और अधिक योजनाओं से उन्हें आकर्षित करना होगा। नरेंद्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्किल इंडिया अभियान से सरकार की यही कोशिश होगी कि वर्ष 2022 तक निर्धारित लक्ष्य तक पहुंचा जा सके। सरकार की इस पहल से देश का उद्योग क्षेत्र उत्साहित है और मेक इन इंडिया जैसे कार्यक्रमों को भी स्किल इंडिया से लाभ मिलने की उम्मीद है। देश में 20 से अधिक उच्च विकास क्षेत्र हैं जिनमें आने वाले निकट भविष्य में लगभग 30 करोड़ से भी अधिक प्रशिक्षित कर्मचारियों की आवश्यकता रहेगी ताकि क्षेत्र के विकास में किसी भी तरह की बाधा न आ सके।

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इंडियन प्रीमियर लीग से दो टीमों को बाहर कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायाधीश आरएम लोढ़ा समिति ने इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) की दो टीम, चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के प्रमुख अधिकारियों को दोषी पाया है और दोनों ही टीमों को दो वर्षों के लिए आईपीएल से निलंबित कर दिया है। वर्ष 2013 में सामने आए मैच फिक्सिंग मामले में यह फैसला सुनाते हुए समिति ने चेन्नई सुपर किंग्स के गुरुनाथ मेयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के राज कुंद्रा को जीवन भर के लिए भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) और इस खेल से दूर रहने का आदेश दिया है। वर्ष 2013 में कुंद्रा और मेयप्पन को सटोरियों से सम्बन्ध रखने के मामले में गिरफ्तार किया गया था और इन पर गैरकानूनी सट्टेबाजी का मुकदमा चलाया गया था। समिति के इस फैसले से भारतीय क्रिकेट बोर्ड और साथ ही आईपीएल के संचालन में हो रही धांधली फिर एक बार सामने आई है। इस घटना से पूर्व भी अनेक बार देखा गया है कि भारतीय क्रिकेट बोर्ड से जुड़े अधिकारी विवादों में रहे हैं। वर्ष 2013 में स्पॉट फिक्सिंग मामले के खुलासे के बाद भारतीय टीम के गेंदबाज रह चुके एस श्रीशांत, तथा दो अन्य खिलाड़ी अंकित चह्वाण और अजित चंडीला पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था।

मंगलवार को समिति के फैसले से कुंद्रा या मेयप्पन पर बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ने की संभावनाएं नहीं क्योंकि इस फैसले में इन दोनों पर केवल बीसीसीआई से दूर रहने के लिए प्रतिबन्ध लगाया गया है। दोनों ही आरोपी काफी प्रभावशाली हैं और दोनों ही बिना भौतिक रूप से उपस्थित हुए अपनी टीमों के लिए फैसले अभी भी ले सकते हैं। अगर परेशानी है तो सिर्फ टीमों को 2 वर्ष के लिए निलंबित किए जाने की वजह से आई पी एल केवल छः टीमों तक सिमट कर रह जाएगा। सोनी टेलीविज़न चैनल द्वारा प्रशासन अनुबंध में भी यह स्पष्ट किया गया है कि आईपीएल के आयोजन के दौरान कभी भी आठ से कम टीमें हिस्सा नहीं लेंगी। अगर आईपीएल में छः ही टीम बचती हैं तो आईपीएल का आयोजन आर्थिक रूप से भी लाभकारी नहीं हो सकता।

अब भारतीय क्रिकेट बोर्ड के सामने एक अनूठी चुनौती है। क्या बोर्ड राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग्स को आईपीएल छोड़ने के लिए समझाने में सफल रहेगा ताकि नई टीमों को आईपीएल का हिस्सा बनाया जा सके। साथ ही यह भी देखना दिलचस्प होगा कि निलंबित टीमों द्वारा बोर्ड के ऐसे किसी भी प्रस्ताव को माना जायेगा या नहीं। भारत जैसे क्रिकेट प्रेमी देश में आईपीएल ने अपनी एक अलग पहचान बनाई थी और देश के अनेक बड़े उद्योगपति इस खेल योजना का हिस्सा बनने के लिए उत्सुक रहते हैं। ऐसे में दो टीमों के निलंबन से नई टीमों के लिए एक नया मौका जरूर सामने आएगा परंतु किस उद्योगपति को इस खेल से जुड़ने का मौका मिल सकेगा यह कहना अभी मुश्किल है। दोनों निलंबित टीमों से जुड़े खिलाड़ियों के भविष्य पर भी अभी रहस्य बना हुआ है। समिति के इस फैसले से अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद के चेयरमैन एन श्रीनिवासन पर भी अपने पद को छोड़ने का दबाव बढ़ेगा क्योंकि इस फैसले में दोषी पाए गए मेयप्पन, श्रीनिवासन के दामाद हैं और चेन्नई सुपर किंग्स टीम के मुख्यस्वामी श्रीनिवासन को ही माना जाता है।