Category archives for: संपादकीय

ब्लू स्टार का जिन्न

  खालिस्तानी अलगाववादियों और आतंकियों को नियंत्रित करने के लिए वर्ष 1984 में सेना के ऑपरेशन ब्लू स्टार की परछाईं अब अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर पड़ती दिख रही है। उस विवादित सैन्य ऑपरेशन में एक हजार से अधिक सिखों की मौत हुई थी। उससे बेहद नाराज दो सिख सुरक्षाकर्मियों ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या […]

शिंदे की फिसलन

  केंद्रीय गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने विभिन्न राज्यों की सरकारों को पत्र लिखकर जिस प्रकार से एक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्यों के खिलाफ आतंकवादी हरकतों में लिप्त होने के मामलों की समीक्षा करने का जो आदेश दिया है, उसका कोई कानूनी आधार नजर नहीं आता है। यह पत्र पूरी तरह से बेतुका और […]

जाते-जाते देर कर दी!

  हुजूर ने जाते-जाते बहुत देर कर दी। अगर वह पहले चले जाते तो उनका सम्मान अपनी जगह कुछ-न-कुछ बना ही रहता। संदेह के दायरे में वह फिर भी रहते लेकिन उन्हें हर रोज के तीर और कंकड़ों का निशाना बनने से बचे रहने में मदद मिलती। लगता है उनको इनकी कतई फिक्र नहीं थी। […]

राहुल फिर हुए सक्रिय

  लोकसभा चुनावों की तैयारियों में लगे कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी फिर से सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने हाल में नई दिल्ली में देशभर के कांग्रेसी मुख्यमंत्रियों की क्लास लगाई। इसमें महाराष्ट्र की कांग्रेस-एनसीपी सरकार के आदर्श घोटाले की रिपोर्ट खारिज करने के फैसले पर उन्होंने सवाल उठा दिए। राहुल ने इससे पहले केंद्र सरकार […]

मजबूरी में बलिदान?

लोकसभा चुनाव का काउंटडाउन शुरू हो चुका है। सभी पार्टियां चुनाव को लेकर अपनी रणनीति तैयार करने में जुटी हैं। जहां कांग्रेस के सामने अपनी सत्ता बचाने की चुनौती है तो वहीं भाजपा सत्ता पर काबिज होने के लिए जोर आजमाइश में लगी है। इसी बीच प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने कांग्रेस की वंशबेल को […]

गांगुली पर बेबस तंत्र?

  निर्भया कांड की बरसी पर जहां भारत में एक बार फिर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बहस हो रही है, वहीं जस्टिस अशोक कुमार गांगुली का मामला दूर से इस बहस को मुंह चिढ़ाता दिख रहा है। इस मामले की पेचीदगी तंत्र की बेबसी दर्शा रही है। जस्टिस गांगुली फिलहाल पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग […]

लोकपाल की डगर खुली

  नई दिल्ली में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने जैसे ही मौजूदा संसद सत्र में लोकपाल विधेयक पारित होने का विश्वास जताया, वैसे ही रालेगण सिद्धि में अन्ना हजारे ने यह विधेयक  पारित होने के बाद अपना अनशन तोड़ने की बात कही है। निश्चित तौर पर यह एक स्वागतयोग्य परिदृश्य […]

लाल बत्ती को लाल झंडी

  भारत के जनप्रतिनिधियों में पाई जानेवाली जन से अलग दिखने और उसको ही अपना रुतबा मानने की हास्यास्पद मानसिकता सुप्रीम कोर्ट को रास नहीं आई। शॉपिंग मॉल या सिनेमाघरों में जाने और खास मौकों पर सड़कों पर रौब गालिब करने के लिए लाल बत्ती कारों का प्रयोग किया जाता है। लाल बत्ती वाली गाड़ियों […]

नतीजों का आर्थिक विश्लेषण

  इंडोनेशिया की राजधानी बाली में मंत्रिस्तरीय बैठक से विश्व व्यापार संगठन (डब्लूटीओ) को संजीवनी मिली। अगर यह ऐतिहासिक कहा जा रहा समझौता कुछ समय पहले हो गया होता तो शायद चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के नतीजे थोड़े से अलग होते। माना तो यही जाता है कि आम मतदाता को आर्थिक मुद्दों की जटिलता […]

अलविदा मंडेला…!

  शुक्रवार, 6 दिसंबर अब एक विशेष कारण से विश्व के इतिहास में दर्ज हो गया है। इस दिन सुबह दक्षिण अफ्रीका को रंगभेदी शासकों के चंगुल से मुक्त करवाने के लिए अपना सारा जीवन होम देने वाले नेल्सन मंडेला का चिर-परिचित हंसमुख चेहरा हमेशा के लिए दुनिया को अलविदा कह गया। पूरी दुनिया में […]

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