मिलकर करें चुनौतियों का मुकाबला

अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण कुछ चुनौतियां आ गई हैं

मिलकर करें चुनौतियों का मुकाबला

दुनिया को हमारी एकता की शक्ति दिखाने का समय आ गया है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए जिन कदमों को उठाने का आह्वान किया है, वे आज अत्यंत प्रासंगिक हैं। पश्चिम एशिया में हालात जिस ओर जा रहे हैं, उनके मद्देनज़र हमें अपने देश के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी। प्रधानमंत्री ने जो संकल्प सुझाए हैं, वे मुश्किल नहीं हैं। हर नागरिक बड़ी आसानी से उनका पालन कर सकता है। हमें डीजल, पेट्रोल और एलपीजी बचाने पर ध्यान देना होगा। ईंधन का अनावश्यक उपयोग न करें। गांवों में रसोईघर के लिए वैकल्पिक ईंधन की कमी नहीं है। डीजल-पेट्रोल की बचत करने के लिए सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना होगा। साइकिल को लोकप्रिय बनाने के लिए यह सबसे सही समय है। केंद्र सरकार ऐसी योजना लेकर आए, जिससे लोगों को साइकिल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहन मिले। बाजार में सुंदर और सस्ती साइकिलें उपलब्ध हों। जो लोग साइकिल चलाकर अपने दफ्तर जाएं, उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन मिलना चाहिए। उनके लिए सड़कों को सुरक्षित बनाया जाए। इस समय जो व्यक्ति ईंधन से चलने वाले वाहन की जगह साइकिल चलाता है, वह देशभक्ति का काम करता है। ऐसे लोगों को सम्मानित करना चाहिए। वर्क फ्रॉम होम भी ऐसा विकल्प है, जिसे जहां संभव हो, वहां तुरंत प्रभाव से लागू कर देना चाहिए। भारत में इंटरनेट सेवा बहुत अच्छी हो गई है। कई कंपनियों में पहले ही से वर्क फ्रॉम होम की सुविधा है। अगर अन्य कंपनियां भी इसे लागू करें तो हर महीने करोड़ों रुपए का ईंधन बच सकता है। कंपनियों को आगे आकर यह घोषणा करनी चाहिए कि वे देशहित में वर्क फ्रॉम होम लागू कर रही हैं। इस फैसले को अपार जनसमर्थन मिलेगा।

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ब्याह-शादियों में लोग सोने के आभूषण खरीदते हैं। निवेश के लिए भी सोने को सुरक्षित विकल्प माना जाता है। हमें अपनी जरूरत के लिए ज्यादातर सोना आयात करना पड़ता है, जिसका भुगतान विदेशी मुद्रा में होता है। इससे रुपए पर दबाव पड़ता है। हर परिवार को कम से कम एक साल के लिए सोना न खरीदने का संकल्प लेना चाहिए। अगर लोग दृढ़ता से इसका पालन करें तो एक महीने में ही बड़ा असर दिखाई देने लगेगा। सोने में निवेश करने की जगह सरकारी बचत योजनाओं की सदस्यता लें। इससे अर्थव्यवस्था मजबूत होगी। कल्याणकारी योजनाओं के लिए सरकार के पास ज्यादा धन होगा। देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए खाद्य तेल की खपत कम करनी होगी। ज्यादा तेल सेहत के लिए नुकसानदेह होता है। जापान में लंबी उम्र पाने वाले कई लोगों ने स्वीकार किया है कि वे भोजन में तेल कम डालते हैं, उबली हुईं चीजें ज्यादा खाते हैं। रासायनिक उर्वरकों का उपयोग कम करने के लिए किसानों को प्राकृतिक खाद बनाने का प्रशिक्षण देना चाहिए। जो लोग विदेश घूमने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अपने फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए। अपने देश में भी बहुत सुंदर स्थान हैं। उनका आनंद उठाने की योजना बना सकते हैं। प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद विपक्ष के कई नेताओं द्वारा सोशल मीडिया पर की जा रही तीखी आलोचना अनुचित है। यह आह्वान किसी पार्टी का चुनावी अभियान नहीं है। यह देशहित की बात है। इस समय सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं को आगे आकर मिसाल पेश करनी चाहिए। उन्हें अपने काफिलों से गाड़ियों की संख्या घटा देनी चाहिए। नेतागण को कहना चाहिए कि वे दैनिक जीवन में स्वदेशी चीजों का ज्यादा उपयोग करेंगे। अगर ऐसी चीजों की सूची सोशल मीडिया पर डाल दें तो बेहतर रहेगा। यह देश हम सबका है। आज अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम के कारण कुछ चुनौतियां आ गई हैं तो हमें मिलकर उनका मुकाबला करना चाहिए। दुनिया को हमारी एकता की शक्ति दिखाने का समय आ गया है।

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