कृषि ऋण माफ करने से राज्य सरकारों का राजकोषीय घाटा बढेगा

कृषि ऋण माफ करने से राज्य सरकारों का राजकोषीय घाटा बढेगा

बेंगलूरु। फसल ऋण को माफ करने के कारण राज्य का राजकोषीय घाटा बढेगा और इससे राज्य सरकारों द्वारा ऋण लेने की क्षमता भी प्रभवित होगी। एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। रेटिंग एजेंसी आईसीआरए के अनुसार कर्नाटक, महाराष्ट्र, पंजाब और उत्तर प्रदेश में ब़डे पैमाने पर कृषि ऋण को माफ करने के कारण उत्पादक पूंजीगत व्यय समाप्त होने का जोखिम पैदा हो सकता है। आईसीआरए ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि यह देश में समग्र निवेश गतिविधि के विकास को प्रभावित करेगा। इसके अलावा, कर्ज माफी के कारण राज्य सरकारों को और अधिक ऋण लेने की आवश्यकता होगी। इससे राज्य विकास ऋण (एसडीएल) लेने के स्तर में भी बढोत्तरी होने की संभावना है। यह कदम केंद्र सरकार की प्रतिभूतियों (जी-सेक)पर निर्भरता को बढाएगा और निजी क्षेत्र को प्रतिस्पर्धी दरों पर बांडों को बाजार में उतारने की हो़ड बढेगी।द्यय्ःद्भह्र ·र्ैंह् ब्ह्ख्र्‍ ःद्भय्ख्रय् ·र्ैंज्श्च ·र्ैंर्‍ ृय्प्प्रद्भ·र्ैंत्रय्आईसीआरए के कॉर्पोरेट सेक्टर रेटिंग के ग्रुप हेड जयंत रॉय ने कहा है कि कुछ राज्यों ने कृषि ऋण माफ करने के लिए आवश्यक कोष पर ध्यान दिए बिना ही इसे माफ करने की घोषणा कर दी है। आईसीआरए का अनुमान है कि राज्य सरकारों द्वारा जारी किए गए सकल एसडीएल वित्तीय वर्ष २०१७ में ३.८ लाख करो़ड से ब़ढकर ४.५ लाख करो़ड रुपए हो जाएगा। आईसीआरए के अनुसार कर्ज माफ करने से राज्यों के राजकोषीय संतुलन पर अतिरिक्त बोझ पैदा होगा, जिससे वित्तीय वर्ष २०१८ के लिए ४.५ लाख करो़ड रुपए के आधारभूत अनुमान से भी ज्यादा कर्ज की आवश्यकता होगी।ज्र्‍फ्·र्ष्ठैं ृय्स्द्य ॅफ्ठ्ठर्‍ॅध् ·र्ैंय् ृैंत्रद्य द्धढ्ढष्ठणख्य्इससे राज्य सरकारों द्वारा बाजार से उधार लेने के स्तर में बढोत्तरी होगी। जी-सेक पर निर्भरता बढेगी और प्रतिस्पर्धी दरों पर बांड बा़जार तक पहुंचने के लिए निजी क्षेत्र की कंपनियां काफी पैमाने पर आगे आने लगेंगी। एजेंसी के अनुसार मौजूदा समय में एसडीएल और जी-सेक के बीच का अंतर ७० बीपीएस है जोकि वित्तीय वर्ष २०१८ के दौरान बढकर १०० बीपीएस के आसपास हो सकता है।ृख्ध्ष्ठ ्यप्žय्र्‍द्भ प्प्तश्च ·र्ष्ठैं ख्रह्रद्यय्द्म ्यख्रक्व फ्·र्ैंत्रय् ब्स् ृफ्द्य कर्नाटक की सरकार वित्तीय वर्ष २०१८ में सकल घरेलू उत्पाद के ३.५ प्रतिशत तक की शुद्ध उधार लेने के योग्य होगी। एजेंसी के अनुसार हो सकता है कि मौजूदा समय में राज्य सरकार अपने बजट पूंजीगत व्यय को छो़डे बिना एक बार में ८,१६५ करो़ड रुपए के फसल ऋण को माफ करने में सक्षम हो लेकिन इसका असर अगले वित्तीय वर्ष के दौरान नजर आ सकता है। राज्य सरकार यदि अतिरिक्त राजस्व प्राप्त नहीं करती है या राजस्व खर्च मंें कटौती नहीं करती है तो इसके वित्तीय घाटे में जाने की संभावना है क्योंकि वित्तीय वर्ष २०१८ के लिए इसका राजस्व अधिसेष १३७ करो़ड रुपए तक सिमित है।र्रैंह्लय् द्बय्र्ड्डैं ·र्ैंद्यद्मष्ठ ·र्ष्ठैं त्रद्यर्‍·र्ष्ठैं फ्ष्ठ झ्त्रय् घ्ध्ष्ठख्य् ्य·र्ैंत्रद्मय् द्धढ्ढष्ठणख्य् द्धह्द्वय्संबंधित सरकारों द्वारा ऋण माफी योजनाओं को किस प्रकार लागू किया जाएगा इसका विवरण अभी भी उपलब्ध कराया जाना बाकी है। इसमें सरकारों द्वारा ऋण माफ करने की कुल राशि, कितने वर्षों के बाद ऋण माफी की राशि को बंद किया जा सकता है और राज्य सरकार किस प्रकार से ऋण माफ करने के लिए कर्ज जुटाएगी इसके बारे मंें विवरण उपलब्ध कराया जाएगा। ज्ञातव्य है कि कर्नाटक ने सिर्फ ५०,००० रुपए तक के अल्प अवधि कृषि ऋण को माफ करने की घोषणा की है और इससे राज्य के लगभग २२ लाख किसान परिवार लाभान्वित होंगे। राज्य सरकारों द्वारा अपने विवरण उपलब्ध करवाने के बाद ही यह पता चल सकेगा कि उन पर किस हद तक बोझ बढेगा।फ्द्य·र्ैंय्द्य ्यद्मद्भैं्यख़य्त्र ·र्ैंद्य फ्·र्ैंत्रर्‍ ब्स् ·र्ैंज्श्च द्बय्र्ड्डैंर्‍ ·र्ैंर्‍ द्यय्यप्रय्प्रत्येक राज्य सरकार पर कृषि ऋण की छूट से संबंधित वित्तीय बोझ की सीमा उसके द्वारा घोषित ऋण माफी के आकार पर और उसके द्वारा इस ऋण माफी पर आने वाले खर्च के लिए जुटाए गए अतिरिक्त संसाधनों अथवा इस कर्ज माफी के एक हिस्से की भरपाई करने के लिए खर्च को नियंत्रित करने की योजना पर भी निर्भर करेगा। राज्य सरकार ऋण माफी के आकार को कर्ज माफ करने को एक सीमा तक नियंत्रित कर सिमित रख सकती है। उदाहरण के तौर पर एक विशेष अवधि के दौरान लिए गए कर्ज को माफ किया जा सकता है या फिर सहकारी बैंकों से लिए गए कर्ज को माफ किया जा सकता है।

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