life on moon
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होनोलूलू। चांद पर बसने की ख्वाहिश दुनिया के अधिकांश लोगों की है। इसके लिए वैज्ञानिक कई साल से प्रयास कर रहे हैं। वहां इंसानों की बस्ती बसाने के संबंध में संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। अमेरिकी वैज्ञानिकों ने अब इन संभावनाओं को और प्रबल कर दिया है। उन्होंने ताजा शोध में चांद के ध्रुवीय क्षेत्र में पहली बार सतह पर बड़ी मात्रा में बर्फ खोजने का दावा किया है।

उनके अनुसार इससे चांद पर इंसानों को आसानी से पानी मिलेगा और वहां रह सकने की हम लोगों की हसरत पूरी हो सकेगी। साथ ही मंगल जैसे दूर ग्रहों पर भी पहुंचने के लिए चांद को अहम पड़ाव के लिए इस्तेमाल किया जा सकेगा। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों का यह ताजा शोध प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंस में प्रकाशित हुआ है।

यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों ने चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों में पहली बार जमा हुआ पानी खोजने का दावा किया है। उनके अनुसार उन्होंने इन ध्रुवीय क्षेत्रों में स्थायी परछाई वाले हिस्सों में इस जमे हुए पानी को खोजा है। उनके अनुसार यह जमा हुआ पानी मून के परछाई वाले क्षेत्रों (मून शैडो एरिया) में करीब 3.5 फीसदी हिस्से में मौजूद है। वैज्ञानिकों के अनुसार, इस खोज से बुध और मेरेस जैसे बौने ग्रहों पर भी पानी खोजने में मदद मिल सकेगी।

वैज्ञानिकों के अनुसार, इससे पहले चांद की मिट्टी में पानी होने के सुबूत मिले थे। लेकिन इस ताजा शोध में चांद की सतह पर ही जमे हुए पानी की खोज की गई है। ऐसा पहली बार हुआ है। उन्होंने अपने शोध पत्र में कहा है, हमने चांद की सतह पर पक्के तौर पर जमे हुए पानी या बर्फ की खोज की है। वैज्ञानिकों के अनुसार पिछले शोध में चांद पर पानी होने की बात तो की गई थी, लेकिन इस पर मुहर नहीं पा रही थी। क्योंकि उन शोधों में पानी और हाइड्रोजन के बीच के अंतर की जानकारी नहीं मिल पा रही थी।

वैज्ञानिकों ने चांद के ध्रुवीय क्षेत्रों के परछाई वाले हिस्से में जमे हुए पानी या बर्फ की खोज करने के लिए खास तकनीक का इस्तेमाल किया है। उन्होंने इसके लिए खास सैटेलाइट के जरिए चांद के अलग-अलग हिस्सों की इमेजिंग स्कैनिंग की। इससे चांद की सतह, वहां की मिट्टी और वहां फैले खनिजों में पानी की मौजूदगी का पता चल सका। उनके अनुसार इस शोध में नियर इंफ्रारेड रिफ्लेक्टेंस स्पेक्ट्रोस्कोपी के जरिये चांद पर पानी होने के अखंडनीय सुबूत मिले। इसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक स्पेक्ट्रम के जरिए पानी को पहचाना गया।

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