बेहतर डाइट न लेने से ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, आंखों की रोशनी और हड्डियों में कमजोरी आती है। यह शरीर के मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने का काम करते हैं। कम कैलोरी डाइट लेने की वजह से शरीर में मिनरल और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन ग़डब़डा जाता है जिसका असर नर्व और मांसपेशियों में देखने को मिलता है। इसके अलावा, इसकी वजह से दिमाग में सेरोटोनिन की मात्र कम हो जाती है और क्लिनिकल डिप्रेशन की समस्या हो जाती है। अकसर महिलाओं में समुचित डाइट न लेने से एनीमिया, अनियमित मासिक धर्म, बाल, नाखूनों और त्वचा संबंधी शिकायतें देखने को मिलती हैं। काबरेहाइड्रेट की कम मात्र लेने से केटोसिस की समस्या हो जाती है, जिसका असर किडनी पर प़डता है। काबरेहाइड्रेट आपके दिमाग और शरीर के लिए ऊर्जा का मुख्य स्त्रोत हैं। शरीर को जितनी काबरेहाइड्रेट की आवश्यकता होती है, उससे कम लेने से शरीर में कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याएं होती हैं। खाना खाते समय ध्यान रखना जरूरी है कि आपको कितनी कैलोरी की आवश्यकता है।ख्ररूथ् ब्स् र्ज्चैंद्यर्‍ दूध प्रत्येक आयु वर्ग की रोजमर्रा की जीवनशैली में शामिल होना चाहिए। हालांकि दूध की शुद्धता को लेकर कई तरह के सवाल उठते रहते हैं। दूध में पोषक तत्व जैसे कैल्शियम, विटामिन ए, डी, फॉस्फोरस, विटामिन बी-१२, प्रोटीन, पोटेशियम, जिंक और मैग्नीशियम की अधिकता होती है। यह हड्डियों की मजबूती के लिहाज से बेहतर होता है। गर्भवती महिलाओं के लिए दूध काफी फायदेमंद होता है, क्योंकि इसमें पोषक तत्वों की पर्याप्त मात्र होती है। उम्र ब़ढने के साथ लोगों की भूख कम होती है, ऐसे में उन लोगों के लिहाज से काफी उपयोगी होते हैं।ड्डर्स्ैंट्ट फ्ष्ठ द्म ·र्ैंद्यष्ठ्र झ्द्यब्ष्ठज् शरीर की कोशिकाओं को मजबूत करने के लिए, हार्मोन मैनुफैक्चर करने के लिए, ऊर्जा प्रदान करने में और अंगों की रक्षा करने के लिहाज से लाभदायक होता है। विटामिन ए, डी, ई और के फैट में घुलनशील हो जाते हैं, ऐसे में शरीर से उनका उत्सर्जन जरूरी हो जाता है। फैट की पर्याप्त मात्र ही शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन इसे अपनी डाइट से नहीं हटाना चाहिए। डाइट में ली जाने वाली फैट कैलोरी की मात्र, कुल ली जाने वाली कैलोरी से दस प्रतिशत अधिक नहीं होनी चाहिए। शरीर को फैट की आवश्यकता कम मात्र में होती है। डाइट में फैट की जरूरत इसलिए होती है ताकि जरूरी हार्मोन बन सकें और फैट में घुलनशील विटामिनों का अवशोषण हो सके।प्रय्य्द्ब ·र्ैंह् ·र्ैंद्ब क्वय्द्मय् डिनर के समय शरीर को कम कैलोरी की आवश्यकता होती है। चूंकि आपको दिन के समय शारीरिक रूप से ज्यादा काम करते हैं और इस दौरान आपको अधिक कैलोरी की आवश्यकता होती है। शाम के समय शरीर थका हुआ होता है, ऐसे में उसे खाना पचाने के लिए कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अगर आपने रात को देर में डिनर कर रहे हैं तो खाने से पहले थो़डे स्नैक लें जिससे आपको भूख कम लगेगी।·र्स्ैंध्ह्द्यर्‍ ·र्ैंर्‍ ्य·र्ैंत्रद्मर्‍ द्बय्ख़य्प्रत्येक व्यक्ति को शरीर, उम्र, लिंग के आधार पर अलग-अलग कैलोरी की मात्र की आवश्यकता होती है। २० से ३० वर्ष की उम्र तक सबसे ज्यादा कैलोरी की आवश्यकता होती है। जहां २५ वर्ष के एक व्यक्ति को २३०० कैलोरी प्रतिदिन आवश्यक होती है, वहीं उम्र ब़ढने के साथ यह मात्र कम होती जाती है। विशेषज्ञों की मानें, तो २५ वर्ष के बाद प्रत्येक दस वर्ष में कैलोरी ग्रहण करने की क्षमता में २ प्रतिशत की कमी आ जाती है। उदाहरण के तौर पर अगर २५ वर्ष की उम्र में आपके शरीर को २३०० कैलोरी प्रतिदिन जरूरी होती है, तो वहीं ३५ वर्ष की उम्र में आपकी कैलोरी क्षमता २२५४ होगी। जहां तक लिंग के आधार पर कैलोरी ग्रहण करने की क्षमता की बात है, तो महिलाओं को पुरुषों की अपेक्षा कम कैलोरी की आवश्यकता होती है। गर्भवती महिलाओं को ३०० कैलोरी प्रतिदिन और स्तनपान के दौरान ५०० कैलोरी आवश्यकता होती है।

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