क्यों बढ़ रही हैं चीनी की कीमतें? सरकार का आया बयान
क्या इथेनॉल से है कोई संबंध?
इथेनॉल कार्यक्रम से किसानों को भुगतान में सुधार करने में मदद मिली है
नई दिल्ली/दक्षिण भारत। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को उन दावों को खारिज कर दिया कि इथेनॉल बनाने के लिए चीनी का इस्तेमाल होने से चीनी की कीमतों में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है। इसके बजाय, सरकार ने कहा कि घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों के मौसम में मांग और जमाखोरी के कारण कीमतों को काबू में रखने के लिए स्टॉक लिमिट लगानी पड़ी और बिना ड्यूटी के आयात की इजाज़त देनी पड़ी।
उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने एक बयान में कहा, 'हाल ही में चीनी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी को इथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के डायवर्जन से जोड़ना गलत है।'इसमें कहा गया है कि पेट्रोल में मिलाने के लिए इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल होने वाली चीनी का हिस्सा सन् 2022-23 के लगभग 12 प्रतिशत से घटकर सन् 2025-26 सीज़न में लगभग 9 प्रतिशत रह गया है, जबकि भारत का लगभग तीन-चौथाई इथेनॉल उत्पादन अब अनाज, खासकर मक्के से होता है।
कीमतों में बढ़ोतरी को रोकने और पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए, सरकार ने देशभर में चीनी डीलरों पर 30 नवंबर तक 400 टन की स्टॉक सीमा तय की है। 1 सितंबर से, थोक उपभोक्ताओं पर भी 15 दिन की खपत से ज़्यादा स्टॉक रखने पर रोक लगा दी जाएगी।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को भी मंज़ूरी दे दी है और जमाखोरी व कृत्रिम कमी की जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकारों की संयुक्त टीमों द्वारा मिलों में स्टॉक के भौतिक सत्यापन का आदेश दिया है।
मंत्रालय ने कहा कि मौजूदा सीज़न में देश में चीनी का उत्पादन लगभग 30.6 मिलियन टन रहने का अनुमान है, जबकि गन्ना उगाने वाले राज्यों का शुरुआती अनुमान लगभग 34.3 मिलियन टन था। इसने कमी का कारण गन्ने को प्रभावित करने वाली रेड रॉट और टॉप बोरर बीमारियों, साथ ही ज़्यादा बारिश के कारण जल-जमाव को बताया।
इसमें कहा गया है कि अक्टूबर में नया पेराई सीज़न शुरू होने तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए मौजूदा स्टॉक काफ़ी है।
वैश्विक बाजार में भी आपूर्ति की कमी का सामना करना पड़ रहा है। सरकार का अनुमान है कि सन् 2026-27 में चीनी की कमी लगभग 3.3 मिलियन टन होगी, जबकिवैश्विक बाजार में चीनी की कीमतें 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 16 प्रतिशत से ज़्यादा की बढ़ोतरी के साथ 552 डॉलर प्रति टन हो गई हैं।
सरकार ने कहा कि इथेनॉल कार्यक्रम से चीनी उद्योग में संरचनात्मक सरप्लस (अतिरिक्त उत्पादन) की समस्या को हल करने, मिलों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और किसानों को भुगतान में सुधार करने में मदद मिली है।


