मिलकर बनाएं नेताजी के सपनों का भारत
ताजी ने इस देश के लिए बहुत बड़ा त्याग किया था
नेताजी और असंख्य योद्धाओं ने बहुत संघर्ष किया था
भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक नेताजी सुभाष चंद्र बोस की बेटी अनीता बी फाफ ने उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर देशवासियों का ध्यान अत्यंत महत्त्वपूर्ण विषय की ओर आकर्षित किया है। उन्होंने टोक्यो के रेंकोजी मंदिर से नेताजी की 'अस्थियों' को वापस लाने का अनुरोध किया है। इस संबंध में देशवासियों द्वारा पहले भी कई बार मांग की गई थी। रेंकोजी मंदिर में रखीं अस्थियों के बारे में मतभेद हैं। कई विशेषज्ञ दावा करते हैं कि वे अस्थियां नेताजी की हैं। कई इस दावे को खारिज करते हैं। हालांकि सच्चाई का पता लगाना कोई मुश्किल काम नहीं है। वैज्ञानिक परीक्षणों से यह रहस्योद्घाटन हो सकता है, लेकिन इसके लिए भारत सरकार को अपनी भूमिका दृढ़ता से निभानी होगी। नेताजी ने इस देश के लिए बहुत बड़ा त्याग किया था। जिन अंग्रेजों के बारे में कहा जाता था कि इनके साम्राज्य में कभी सूरज नहीं डूबता, नेताजी ने उन्हें प्रत्यक्ष चुनौती दी थी। उन्होंने आज़ाद हिंद फौज का नेतृत्व कर दुनिया को दिखा दिया था कि भारतवासी अपनी स्वतंत्रता के लिए एकजुट एवं अनुशासित होकर लड़ना जानते हैं। हमें याद रखना चाहिए कि यह स्वतंत्रता मुफ्त में नहीं मिली थी। इसके लिए नेताजी और असंख्य योद्धाओं ने बहुत संघर्ष किया था। भारत मां के कई सपूतों की ज़िंदगी काल कोठरियों में खत्म हो गई थी। नेताजी भी कई बार जेल गए थे। उन्होंने लंबी भूख हड़ताल की थी। इससे उनकी सेहत पर बहुत प्रतिकूल असर पड़ा था। जब वे अंग्रेजों की आंखों में धूल झोंककर जर्मनी चले गए थे, तब ब्रिटिश हुकूमत ने उन्हें खत्म करने के आदेश जारी किए थे। नेताजी ने उस मुश्किल दौर का डटकर सामना किया था। अब हमारा फर्ज है कि हम वैसा भारत बनाएं, जिसका सपना नेताजी ने देखा था।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मकसद भारत को सिर्फ अंग्रेजी शासन से मुक्त कराना नहीं था। वे एक आत्मनिर्भर, सशक्त, सुंदर और विकसित देश बनाना चाहते थे। नेताजी राष्ट्रीय एकता और अनुशासन के बहुत बड़े पैरोकार थे। उनका पूरा जीवन इन आदर्शों के लिए समर्पित था। नेताजी ने उद्योगों के विकास पर बहुत जोर दिया था। वे देश से बेरोजगारी, गरीबी और अभाव दूर करना चाहते थे। उन्होंने मजदूरों के अधिकारों और कल्याण को बहुत महत्त्व दिया था। वे चाहते थे कि औद्योगिक विकास का फायदा कुछ परिवारों तक सीमित न रहे। नेताजी ने विकसित देशों को बहुत करीब से देखा था। वे उनकी उन्नति का रहस्य जानते थे। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया था कि विज्ञान और तकनीक में रुचि लें। नेताजी सुभाष चंद्र बोस महापुरुषों की जीवनी और प्रेरक साहित्य पढ़ते थे। जब वे स्कूली विद्यार्थी थे, तब स्वामी विवेकानंद से बहुत प्रभावित हुए थे। उन्होंने स्वामीजी के उपदेशों से संबंधित कई पुस्तकें पढ़ी थीं। वे रामकृष्ण परमहंस और महर्षि अरविंद से भी प्रभावित थे। आज कितने युवा महापुरुषों का साहित्य पढ़ने में रुचि रखते हैं? उस ज़माने में अंग्रेजों ने युवाओं को मानसिक रूप से गुलाम बनाने के लिए अश्लील किताबों, शराब और नशाखोरी का जाल बिछाया था। जिसे इन चीजों की लत लग जाती थी, उसे आंदोलन, आत्मनिर्भरता और स्वतंत्रता से कोई मतलब नहीं रहता था। नेताजी ने युवाओं को अंग्रेजों की इस साजिश से सावधान किया था। ये बुराइयां आज भी मौजूद हैं। इंटरनेट पर अश्लीलता की बाढ़-सी आ गई है। शराब, सिगरेट, खैनी, जर्दा और ड्रग्स का चलन बढ़ता जा रहा है। युवाओं के दिलो-दिमाग में यह बात बैठाकर उन्हें गुमराह किया जा रहा है कि नशा करेंगे तो आधुनिक कहलाएंगे। युवाओं को नेताजी का संदेश याद रखते हुए अपनी ज़िंदगी के लिए ऊंचा मकसद तय करना चाहिए। अगर महान लोगों से प्रेरणा लेंगे तो खुद भी महान बनेंगे।

