युवा शक्ति को मोदी का तोहफा
युवाओं को मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग सुविधा मिलेगी
गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं होना चाहिए
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर युवाओं के लिए मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग सुविधा की घोषणा कर लाखों परिवारों को राहत दी है। इस घोषणा का विशेष महत्त्व है, क्योंकि यह लाल किले की प्राचीर से की गई है। देश में लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। वे सफलता के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं। चूंकि ज्यादातर अच्छे कोचिंग संस्थान बड़े शहरों में हैं, इसलिए गांव-ढाणियों और कस्बों के बच्चों को अपना घर छोड़कर शहर जाना पड़ता है। इन शहरों के कई इलाके कोचिंग संस्थानों की वजह से अपनी पहचान बना चुके हैं। दूर-दराज से आने वाले युवाओं को यहां रहने, आने-जाने में बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्राय: ऐसे इलाकों में मकान किराया बहुत ज्यादा होता है। खाने का सामान महंगा मिलता है। सुबह कोचिंग संस्थान जाते हैं तो बसें पहले से ही भरी हुई मिलती हैं। गंतव्य तक पहुंचते-पहुंचते आधी ऊर्जा खत्म हो जाती है। वहां पढ़ाई कर वापसी में फिर वही संघर्ष शुरू हो जाता है। घर-परिवार से दूर रहने पर अकेलापन महसूस होने लगता है। जब कभी निराशा घेर लेती है तो हौसला बढ़ाने वाला, अपनापन जताने वाला कोई नहीं होता है। कई युवा यह सब बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। वे या तो अपने घर लौटने को मजबूर हो जाते हैं या गलत कदम उठा लेते हैं। खाली हाथ गांव लौटने पर उन्हें चौतरफा व्यंग्य-बाणों का सामना करना पड़ता है। जब साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार अपने बच्चों को बड़े शहरों के कोचिंग संस्थानों में पढ़ने भेजते हैं तो उनका बजट गड़बड़ा जाता है। उन्हें ऊंची ब्याज दरों पर कर्ज लेना पड़ता है। कई परिवारों को तो इसे चुकाने में वर्षों लग जाते हैं।
प्रधानमंत्री के इन शब्दों में उन परिवारों की पीड़ा झलकती है- 'हमारे मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने एक बहुत बड़ा बोझ बन चुकी है- कोचिंग कक्षाओं की स्पर्धा ... हजारों-करोड़ रुपए का उनका खर्च है, वह भी बचे, बेटे भी अपने आस-पास रह सकें, उनकी देखभाल हो सके, परिवार पर आर्थिक बोझ न आए और इसलिए हमने युवाओं के लिए विभिन्न परीक्षाओं की मुफ्त ऑनलाइन कोचिंग कराने का निर्णय किया है।' इस काम के लिए संसाधनों की कमी नहीं है। देश में विद्वान शिक्षक हैं। सस्ता और सुलभ इंटरनेट है। कई लोकप्रिय ऑनलाइन प्लेटफॉर्म हैं। आसान शब्दों में कहें तो ऑनलाइन कोचिंग के सफल संचालन की पूरी गुंजाइश है। हालांकि, कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। ऑनलाइन कोचिंग की गुणवत्ता भी बहुत अच्छी होनी चाहिए। सरकारी कोचिंग की तुलना निजी कोचिंग संस्थानों से जरूर होगी। कई युवा दोनों कोचिंग को परखेंगे। सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो प्रसारित हो सकते हैं, जिनमें यह बताने की कोशिश की जाएगी कि फलां संस्थान या शिक्षक बेहतर है। अगर सरकारी कोचिंग गुणवत्ता के मामले में निजी कोचिंग से ज़रा-भी पीछे रह गई तो उसे बहुत बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाएगा। सरकारी अधिकारियों और शिक्षकों की जवाबदेही तय करना बहुत जरूरी है। इस बात पर ध्यान दें कि मुफ्त पढ़ाई के लिए लाखों सरकारी स्कूल देशभर में चल रहे हैं। सरकारी शिक्षकों के वेतन-भत्तों पर अरबों रुपए खर्च हो रहे हैं। सरकारी स्कूलों के नतीजों के बारे में बताने की जरूरत नहीं है। वहीं, निजी स्कूलों में शुल्क लिया जाता है। उनके शिक्षकों का वेतन कम होता है। फिर भी उनके नतीजे तुलनात्मक रूप से बेहतर होते हैं। सरकारी कोचिंग में पहले ही दिन यह सुनिश्चित करना होगा कि गुणवत्ता के मामले में कोई समझौता नहीं होगा। यह पहल सफल होने पर शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आ सकती है।

