प्लास्टिक नोटों से बनाएं आत्मनिर्भर भारत
ये नोट ज्यादा टिकाऊ होंगे
देशवासियों को प्लास्टिक नोटों का इंतजार है
केंद्र सरकार ने 10 और 20 रुपए के एक अरब प्लास्टिक बैंक नोटों की शुरुआत के लिए मंजूरी देकर भारतीय मुद्रा के नए युग की शुरुआत कर दी है। इन नोटों के जरिए देश की अर्थव्यवस्था में बहुत सकारात्मक बदलाव लाए जा सकते हैं। बारिश, पसीना और गीले हाथों के संपर्क में आने से, कागज के नोटों की गुणवत्ता घटने लगती है। उनकी औसत उम्र कम हो जाती है। ऐसे नोटों के कारण कई बार विवाद भी हो जाते हैं। प्लास्टिक नोट ज्यादा टिकाऊ होंगे। उन पर पानी और नमी का असर कम पड़ेगा। अब देशवासियों को प्लास्टिक नोटों का इंतजार है। इनकी छपाई में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही, यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नकली नोटों के सौदागर अपनी कोशिशों में कामयाब न हो जाएं। वैसे तो उनकी नजर 500 रुपए, 200 रुपए और 100 रुपए के नोटों पर ही ज्यादा रहती है, क्योंकि बड़े नोटों को खपाने में मुनाफा ज्यादा होता है। यह छोटे नोटों में कम होता है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई बड़े पैमाने पर भारत के नकली नोट छापती है। उसने बांग्लादेश, नेपाल समेत कई देशों में अपना जाल फैला रखा है, जहां से नकली नोटों का कपट धंधा चलता है। भारत सरकार की उक्त घोषणा से आईएसआई की बेचैनी यकीनन बढ़ गई होगी, क्योंकि उसने अब तक कागज, स्याही और मशीनों पर जो 'निवेश' किया है, उस पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। उसे यह भी आशंका होगी कि भविष्य में इस पहल का विस्तार बड़े नोटों तक किया गया तो खुफिया एजेंसी को भारी नुकसान हो सकता है।
प्लास्टिक नोटों पर ऐसे चित्र छापे जाएं, जो भारत के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान प्रगति को दर्शाएं। इन नोटों को देखकर लोगों तक सकारात्मक संदेश पहुंचना चाहिए। अखंड भारत कैसा था, उसकी भौगोलिक सीमाएं कहां तक थीं, स्वतंत्रता आंदोलन के नायक कौन थे, हमारा संविधान कैसे बना, देश ने शिक्षा और शोध में कौनसे कीर्तिमान रचे, विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान में भारत की उपलब्धियां क्या हैं, देश में कितनी तेजी से डिजिटलीकरण हो रहा है, हरित ऊर्जा के क्षेत्र में कितनी उज्ज्वल संभावनाएं हैं, भारतीय सैनिकों ने विभिन्न युद्धों में किस तरह वीरता एवं पराक्रम का प्रदर्शन किया था, सर्जिकल स्ट्राइक, एयरस्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर में आतंकवादियों का किस तरह खात्मा किया गया था, हमारे राष्ट्रीय लक्ष्य कौनसे हैं, हमें चुनौतीपूर्ण समय में किस तरह एकजुट रहना चाहिए - इनकी झलक नोटों पर दिखनी चाहिए। अब सवाल है- नोटों पर जगह सीमित होती है। वहां इतनी बातें कैसे आएंगी? इसका तरीका है- क्यूआर कोड। विभिन्न नोटों पर एक-एक क्यूआर कोड दिया जा सकता है, जिसे स्कैन करने पर यह जानकारी प्राप्त हो। इन नोटों के साथ एक रोचक व अत्यंत उपयोगी प्रयोग किया जा सकता है। क्यूआर कोड में कई तरह के कौशल की जानकारी दी जा सकती है। उदाहरण के लिए: कम निवेश के साथ कौनसा काम शुरू करें, किस राज्य में कौनसे काम के लिए ज्यादा संभावनाएं हैं, सिर्फ तीन महीने, छह महीने और एक साल का प्रशिक्षण लेकर कौनसा काम शुरू कर सकते हैं - यह जानकारी क्यूआर कोड में शामिल कर सकते हैं। ये नोट बेरोजगारी, गरीबी और अभावों से लड़ने में मजबूत हथियार साबित हो सकते हैं। इन पर संस्कृत, हिंदी, कन्नड़ा, तमिल, तेलुगु, मलयालम और सभी क्षेत्रीय भाषाओं के साथ अंग्रेजी, गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों से जुड़ी प्रश्नोत्तरी दे सकते हैं। इससे विद्यार्थियों को बहुत फायदा होगा। जब लोगों को मालूम होगा कि इन क्यूआर कोड में ज्ञान का भंडार है तो उन्हें हर नोट में अपनी और देश की उन्नति का संदेशवाहक नजर आएगा। इस काम में मेहनत बहुत लगेगी, लेकिन पूरे देश को दशकों तक फायदा होगा।

