ढह गया खामेनेई का 'अभेद्य' किला

ईरान की आर्थिक स्थिति पहले ही खस्ता हो चुकी है

ढह गया खामेनेई का 'अभेद्य' किला

खामेनेई की सुरक्षा का बहुत ध्यान रखा जाता था

इजराइल ने ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई का खात्मा कर ही दिया। इस कार्रवाई में उसे अमेरिका का साथ मिला। ईरान कोई मामूली देश नहीं है। उसके पास तेल और गैस के बड़े भंडार हैं, सक्षम सुरक्षा बल हैं, उन्नत मिसाइल तकनीक है, लेकिन इजराइल-अमेरिका के सामने उसकी ताकत किसी काम नहीं आई। पहले, ऐसी संभावना जताई जा रही थी कि ईरान नुकसान बर्दाश्त करने के बावजूद अपने दम पर दो हफ्ते तक जरूर खड़ा रहेगा। किसे पता था कि कुछ ही घंटों में सर्वोच्च नेता निशाना बन जाएंगे! खामेनेई की सुरक्षा का बहुत ध्यान रखा जाता था। उनके निजी ठिकाने अभेद्य किले समझे जाते थे। वे ऐसी तकनीक का इस्तेमाल नहीं करते थे, जिससे दुश्मन को जरा-सी भी भनक लग जाए। फिर भी इजराइल ने उस जगह का पता लगा लिया, जहां खामेनेई मौजूद थे। इससे संकेत मिलता है कि किसी ने सर्वोच्च नेता के बारे में सूचना भेजी होगी। ईरान में इजराइली खुफिया एजेंसी मोसाद का बड़ा नेटवर्क है। उसने कई क्षेत्रों में घुसपैठ कर रखी है। जब 7 अक्टूबर, 2023 को हमास ने इजराइल के नागरिकों पर हमला किया था, तब मोसाद की सुस्ती को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि उसके बाद इजराइल ने जैसा पलटवार किया, उससे यह अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं था कि एक दिन खामेनेई पर हमला होगा। अब खामेनेई तो नहीं रहे। आगे क्या होगा? क्या ईरान के रुख में नरमी आएगी? अभी अयातुल्ला अलीरेजा अराफी को सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी दी गई है, लेकिन वे ऐसे मुश्किल समय में कब तक नेतृत्व कर पाएंगे? अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कह दिया है कि जरूरत पड़ने पर बमबारी जारी रहेगी। ऐसे में अलीरेजा अराफी कितने दिन सुरक्षित रह पाएंगे?

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ईरान की आर्थिक स्थिति पहले ही खस्ता हो चुकी है। उसकी मुद्रा का भारी पतन हुआ है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है। कारोबार में अनिश्चितता बनी हुई है। कई इलाके गंभीर जलसंकट का सामना कर रहे हैं। ऐसे हालात में ईरान युद्ध लड़ेगा तो कब तक? जब आर्थिक मोर्चे पर समीकरण बिगड़ेंगे तो जनता का असंतोष भड़क सकता है। हाल में जब रियाल का ऐतिहासिक पतन हुआ तो ईरान के कई इलाकों में उग्र विरोध प्रदर्शन होने लगे थे। उन्हें दबाने के लिए जमकर बलप्रयोग हुआ था, जिसके नतीजे में हजारों लोग मारे गए थे। अगर निकट भविष्य में लोग दोबारा उसी तरह सड़कों पर उतरे तो सरकार के लिए हालात पर काबू पाना बहुत मुश्किल हो सकता है। इजराइल और अमेरिका जानते हैं कि सैन्य कार्रवाई एकमात्र विकल्प नहीं है, इसलिए दोनों ही ईरानी जनता से सड़कों पर उतरने की अपील कर रहे हैं। निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी खासे उत्साहित हैं। वे अंतिम विजय सुनिश्चित करने और ईरान की आज़ादी का उत्सव मनाने की बात कहकर अपने पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं। अब सबका ध्यान आईआरजीसी की ओर है। उसके कमांडर अपने जोश और जज्बे का जिक्र करते हुए इजराइल एवं अमेरिका को चेतावनी दे रहे हैं। किसी भी लड़ाई में जोश और जज्बे की जरूरत होती है, लेकिन एक हद तक। आज की लड़ाई तकनीकी उन्नति पर ज्यादा निर्भर है। एक शक्तिशाली मिसाइल सैकड़ों सैनिकों के कौशल पर भारी पड़ सकती है। इस मामले में ईरान अपने प्रतिद्वंद्वियों से काफी पीछे है। अगर आईआरजीसी खामेनेई के विरोधियों का दमन करना शुरू करेगी तो यह इजराइल-अमेरिका के लिए सुनहरा मौका होगा। ट्रंप ने उसे हथियार उठाने से रोकने के लिए यह कहते हुए चेतावनी दी है कि 'अभी सुरक्षा मिल सकती है, बाद में सिर्फ मौत मिलेगी!' अब ईरान का भविष्य उसके अगले कदम पर निर्भर करेगा। अगर उसने परमाणु कार्यक्रम, लंबी दूरी की मिसाइलों का निर्माण और इजराइल के खिलाफ हिज़्बुल्लाह, हमास समेत दर्जनों कट्टरपंथी संगठनों को समर्थन देना जारी रखा तो टकराव बढ़ेगा, जिसके भयावह नतीजे निकल सकते हैं।

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