पवित्र बंधन की मर्यादा न भूलें

नतीजों के बारे में जरूर विचार कर लेना चाहिए

पवित्र बंधन की मर्यादा न भूलें

कुछ युवा 'बिन फेरे, संग तेरे' को प्रगतिशीलता से जोड़कर देखते हैं

उच्चतम न्यायालय की इस टिप्पणी ने रिश्तों को लेकर बहस छेड़ दी है कि 'शादी से पहले किसी पर भी भरोसा न करें।' यह टिप्पणी शादी के झूठे वादे और दुष्कर्म से जुड़े एक मामले की सुनवाई के दौरान की गई। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना के इन शब्दों में युवा पीढ़ी के लिए गहरी शिक्षा है- 'हम यह समझने में असमर्थ हैं कि वे शादी से पहले शारीरिक संबंध कैसे बना सकते हैं? हो सकता है कि हम पुराने ख़यालों के हों, लेकिन आपको बहुत सतर्क रहना चाहिए। शादी से पहले किसी पर भी भरोसा नहीं करना चाहिए।' हाल के वर्षों में न्यायालयों में ऐसे मुकदमों की बाढ़-सी आ गई है, जिनमें शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया। कई न्यायाधीश इन पर चिंता जता चुके हैं। जो युवा सोशल मीडिया और एआई के जरिए दुनियाभर की जानकारी रखते हैं, क्या उन्हें यह नहीं पता कि सिर्फ शारीरिक आकर्षण दांपत्य जीवन का आधार नहीं हो सकता? कुछ युवा 'बिन फेरे, संग तेरे' जैसे चलन को प्रगतिशीलता से जोड़कर देखते हैं। उनके पास तर्क होता है- 'जब कोई कानून हमें नहीं रोक रहा तो आप कौन होते हैं?' वास्तव में यह कुतर्क है। ऐसे कई काम हैं, जिनसे कानून नहीं रोकता, लेकिन उनके नतीजे भयानक हो सकते हैं। मनुष्य को अपने विवेक का भी इस्तेमाल करना चाहिए। पिछले पांच वर्षों में ऐसे कितने ही मामले सामने आ गए, जब किसी युवक-युवती ने लिव-इन रिलेशनशिप के साथ अपने संबंधों की शुरुआत की और कुछ ही महीने बाद दोनों अदालतों के चक्कर लगाने लगे। युवती ने दुष्कर्म का आरोप लगाया, युवक ने आर्थिक शोषण का मुद्दा उठाया। पहले, दोनों साथ जीने-मरने की कसमें खाया करते थे। अब एक-दूसरे की शक्ल देखना भी पसंद नहीं करते।

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जिन पश्चिमी देशों ने ऐसे रिश्तों को बढ़ावा दिया, वहां परिवार व्यवस्था की क्या दुर्गति हुई? क्या हमें इसे एक चेतावनी नहीं समझना चाहिए? पश्चिमी समाज की देखादेखी में ऐसे तौर-तरीकों को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाने से पहले उनके नतीजों के बारे में जरूर विचार कर लेना चाहिए। उच्चतम न्यायालय जिस मामले की सुनवाई कर रहा है, उसमें ऐसे कई बिंदुओं का उल्लेख किया गया है, जिन पर युवक-युवती और उनके माता-पिता पहले ध्यान देते तो ऐसी नौबत ही न आती। दोनों की मुलाकात एक वैवाहिक वेबसाइट पर हुई थी। युवक ने शादी का वादा किया और युवती को दुबई ले गया था। वहां उसके आपत्तिजनक वीडियो बनाए और उन्हें प्रसारित करने की धमकी दी। बाद में खुलासा हुआ कि युवक ने दूसरी महिला से शादी कर ली। युवती और उसके परिवार को उसी समय सतर्क हो जाना चाहिए था, जब युवक ने दुबई जाने का प्रस्ताव रखा था। ऐसे प्रस्ताव को सख्ती से खारिज करना चाहिए था। धोखा होने पर कानून की मदद ली जा सकती है, लेकिन खुद की भी जिम्मेदारी होती है। जिस युवक को सिर्फ वेबसाइट के जरिए जाना है, जिसके गुण-दोष का पता नहीं है, उसके मन में क्या है, इसका ज्ञान नहीं है, वह काफी हद तक अजनबी ही है। उस पर इतना विश्वास करना बिल्कुल सुरक्षित नहीं है। जो युवक शादी से पहले ऐसी मांग करता है, उसकी नीयत पर तुरंत संदेह करना चाहिए। उसकी पृष्ठभूमि के बारे में पता लगाना चाहिए और उचित समझें तो अपना रास्ता अलग कर लेना चाहिए। विवाह कोई खेल या मनोरंजन नहीं है। यह एक पवित्र बंधन है। अगर किसी भी कारण से इसकी पवित्रता और मर्यादा का उल्लंघन होता है तो समय रहते सतर्क हो जाना चाहिए। अन्यथा बाद में पछतावा ही बाकी रहेगा।

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