क्या यह विकास नहीं है?
अयोध्या के विकास से उप्र के विकास को बढ़ावा मिला है
'हम सब भारतीय हैं' की भावना को मजबूत करें
आईआईएम लखनऊ की केस स्टडी 'अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण' से एक बार फिर यह सिद्ध हो गया है कि देश के विकास में मंदिर आधारित अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा योगदान है। यह स्टडी उन कथित बुद्धिजीवियों को भी एक जवाब है, जो कहते थे/हैं- 'मंदिर बन जाने से क्या हो जाएगा ... क्या इससे लोगों को रोजगार मिल जाएगा ... क्या लोगों को रोटी मिल जाएगी ... बीमार लोगों को इलाज मिल जाएगा?' अयोध्या में श्रीराम मंदिर बनने के बाद स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई ऊर्जा मिली है। हजारों लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं। अयोध्या के विकास से उत्तर प्रदेश के विकास को बढ़ावा मिला है। प्रभु श्रीराम की प्रतिमा के विराजमान होने के बाद एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कारोबार हुआ है। पर्यटन आधारित गतिविधियां इतनी बढ़ गई हैं कि कर राजस्व 20 हजार करोड़ से 25 हजार करोड़ तक होने का अनुमान है। अयोध्या में लगभग 6,000 नए सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम शुरू हुए हैं। क्या यह विकास नहीं है? क्या इसका फायदा आम लोगों को नहीं मिल रहा है? क्या इससे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत नहीं हुई है? देश में हिंदू आस्था और मंदिरों के बारे में अनर्गल बयान देने का फैशन चल पड़ा था। जो खुद को प्रगतिशील, ज्ञानी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का व्यक्ति प्रचारित करना चाहता था, वह मीडिया के सामने आकर ये शब्द बोल देता था- 'मंदिर बन जाने से क्या हो जाएगा?' आस्था का उपहास उड़ाना आसान है। इसमें न मेहनत लगती है, न संसाधन खर्च होते हैं। हां, आस्था रखने में बहुत पुरुषार्थ करना पड़ता है, त्याग और तपस्या के मार्ग पर चलना होता है। हमारे पूर्वजों ने विदेशी आक्रांताओं से संघर्ष किया था। सदियों तक प्रतीक्षा की थी। कानूनी लड़ाइयां लड़ी थीं। उसके बाद श्रीराम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हुआ था।
प्रभु श्रीराम की कृपा ही है कि जो लोग पहले मंदिर बनाने का विरोध करते थे, अब उसके कारण हो रहे आर्थिक विकास का लाभ उन्हें भी कहीं-न-कहीं मिल रहा है। यह तो शुरुआत है। अगले चार-पांच वर्षों में श्रीराम मंदिर के कारण पर्यटन, परिवहन, आतिथ्य क्षेत्र में सवा लाख से ज्यादा लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। क्या यह बेरोजगार युवाओं के लिए राहत की बात नहीं है? मंदिरों और तीर्थों के कारण देशभर में लाखों परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है। श्रीराम मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बहुत कम थी। छोटे दुकानदार रोजाना बमुश्किल 500 रुपए कमा पाते थे। अब यह आंकड़ा काफी बढ़ गया है। अब तक करोड़ों श्रद्धालुओं ने अयोध्या आकर भगवान के दर्शन किए हैं। दुकानदारों की दैनिक औसत आय चार-पांच गुणा तक बढ़ गई है। क्या दुनिया में कहीं कोई ऐसी व्यवस्था है, जो इतने बड़े स्तर पर लोगों का कल्याण कर सके? क्या पश्चिमी अर्थशास्त्रियों, जिनके लिखे हर शब्द को यहां अकाट्य सत्य मान लिया जाता है, के पास इससे बेहतर कोई मॉडल है? आज अयोध्या के कारण हर जाति और धर्म के लोग खुशहाल हो रहे हैं। कहीं कोई भेदभाव नहीं है। प्रभु श्रीराम के विराजमान होते ही सब पर कृपा बरसने लगी है। अयोध्या ने विकास का एक मॉडल पेश किया है। इसका अध्ययन कर हमारे सभी तीर्थस्थलों का विकास करना चाहिए। आम लोगों को केंद्र में रखकर नीतियां बनाई जाएं। इसके साथ ही रामराज्य की स्थापना करनी चाहिए। गरीबी, बेरोजगारी, सांप्रदायिक कलह, जातिगत विद्वेष का उन्मूलन करना चाहिए। भाषावाद एवं क्षेत्रवाद को हमेशा के लिए विदा कर दें। 'हम सब भारतीय हैं', 'हम सब एक हैं' की भावना को मजबूत करें। प्रभु श्रीराम ने एकता का संदेश दिया था। यह सोच जन-जन के हृदय में पैदा होनी चाहिए।

