ट्रेन पर नहीं, यह प्रगति पर प्रहार है
इनमें इतना दुस्साहस कहां से आता है?
यह कृत्य अत्यंत निंदनीय एवं दंडनीय है
भारत सरकार यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेनों में कई सुधार कर रही है। वंदे भारत एक्सप्रेस की तो दुनिया में चर्चा हो रही है। वहीं, कुछ लोगों को यह विकास यात्रा नहीं सुहा रही है। वे इस ट्रेन पर पत्थरबाजी कर यात्रियों के जीवन को संकट में डाल रहे हैं। साथ ही, राष्ट्र की संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे हैं। इनमें इतना दुस्साहस कहां से आता है? अक्सर यह कहते हुए शिकायत की जाती है कि सरकार नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण सुविधा उपलब्ध नहीं कराती। जब सरकार वंदे भारत चलाकर अच्छी सुविधा देने की कोशिश करती है तो कुछ लोग उस पर पत्थरबाजी करते हैं। यह कृत्य अत्यंत निंदनीय एवं दंडनीय है। पत्थरबाजी की घटनाएं कई बार हो चुकी हैं। हाल में उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में इस ट्रेन पर पत्थर फेंका गया था। ट्रेन तेज रफ्तार से जा रही थी। अचानक पत्थर आकर लगा, जिससे ट्रेन का शीशा टूट गया। घटना के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत भी उसी ट्रेन में सवार थे। सौभाग्य से किसी को चोट नहीं लगी। अगर पत्थर ज्यादा बलपूर्वक फेंका जाता तो किसी को भी गंभीर चोट लग सकती थी। यह हरकत यात्रियों की सुरक्षा के लिए बहुत बड़ा खतरा है। पत्थर फेंकने वाले इसलिए भी बेखौफ होकर ऐसा काम करते हैं, क्योंकि उन्हें तुरंत पकड़े जाने का खतरा नहीं होता। ट्रेन तेज रफ्तार से आगे चली जाती है, इसलिए पत्थरबाजों के पास अपना काम कर फरार होने का पूरा मौका होता है। ये घटनाएं उसी स्थिति में रुक सकती हैं, जब पत्थरबाज पकड़े जाएं और उन्हें कठोर दंड मिले। इसके लिए ट्रेनों के दोनों तरफ कैमरे लगाए जाएं। जो व्यक्ति पत्थरबाजी करता पाया जाए, उसके खिलाफ सबूत जुटाए जाएं। स्थानीय पुलिस के साथ वीडियो साझा करते हुए आरोपियों की गिरफ्तारी की जाए। जब ऐसी मानसिकता रखने वालों को पता चलेगा कि वे कैमरे की नजर में हैं और जल्द ही पकड़े जा सकते हैं तो पत्थर फेंकने से पहले अपने अंजाम के बारे में सोचेंगे।
कई असामाजिक तत्व ट्रेन में बैठने के बाद बेलगाम हो जाते हैं। जब कभी विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं का आयोजन किया जाता है तो युवाओं की भीड़ में ऐसे लोग भी होते हैं, जो ट्रेन में बैठकर अभद्र टिप्पणियां करते हैं। वे राह चलते लोगों, खासकर महिलाओं को गलत शब्दों से संबोधित करते हैं। वजह साफ है- उनके मन में कुंठा भरी होती है और ट्रेन में बैठे होने के कारण पकड़े जाने का डर नहीं होता है। जिस दिन ऐसे एक-दो दर्जन लोग सबूत के साथ पकड़े जाएंगे, संबंधित प्रतियोगी परीक्षा में बैठने से अयोग्य घोषित किए जाएंगे और कानून से दंड पाएंगे तो बाकी लोग अपने आप सुधर जाएंगे। कुछ लोग पटरियों के साथ बहुत खतरनाक प्रयोग करते रहते हैं। वे उन पर सिक्का, साबुन, ब्लेड और छोटे पत्थर रख देते हैं। यही नहीं, वे पूरे घटनाक्रम का वीडियो बनाते हैं। जब ट्रेन इन चीजों के ऊपर से गुजर जाती है तो इनका आकार बदल जाता है। वे लोग अपने वीडियो में यह भी दिखाते हैं। क्या वे नहीं जानते कि ऐसे प्रयोग सैकड़ों यात्रियों के जीवन को संकट में डाल सकते हैं? अगर कभी इन चीजों की वजह से ट्रेन पटरी से उतर गई तो कौन जिम्मेदार होगा? सामान्य बुद्धि का व्यक्ति भी जानता है कि ट्रेन में भारी वजन होता है। जो चीज उसके पहियों के नीचे आएगी, उस पर कई टन का बोझ पड़ेगा। इससे कई चीजों का आकार भी बदल जाता है। यह जानने के लिए भविष्य में और प्रयोग करने की जरूरत नहीं है। पटरियों और पहियों संबंधी प्रयोगों की जिम्मेदारी वैज्ञानिकों पर छोड़ दें। ट्रेन के पहिए कितने शक्तिशाली होते हैं, यह जानना चाहते हैं तो काफी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध है। उसका अध्ययन करें। पटरियों के साथ छेड़छाड़ न करें।

