'वीबी-जी राम जी' योजना: प्रह्लाद जोशी बोले- कांग्रेस झूठ फैलाकर दिहाड़ी मजदूरों को गुमराह कर रही है
'कर्नाटक सरकार कृषि विरोधी नीतियां अपना रही है'
Photo: pralhadvjoshi FB Page
हुब्बली/दक्षिण भारत। केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस वीबी-जी राम जी के बारे में गलत जानकारी और दुष्प्रचार को बढ़ावा देकर राज्य में दिहाड़ी मजदूरों को गुमराह कर रही है। उन्होंने राज्य सरकार पर इस योजना के बारे में जानबूझकर झूठ फैलाने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा को वीबी-जी राम जी में बदलने को विपक्षी पार्टियां राजनीतिक रंग दे रही हैं, जो साफ तौर पर उनकी छोटी सोच को दर्शाता है। विपक्ष इस योजना के पारदर्शी और प्रभावी क्रियान्वयन को बर्दाश्त न कर पाने की वजह से झूठी कहानियां और अफवाहें फैला रहा है।उन्होंने कहा कि मनरेगा के तहत ग्रामीण मजदूरों को हर साल 100 दिनों के रोज़गार की गारंटी दी जाती थी। अब इसे बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है। इससे ग्रामीणों को बेहतर रोज़गार के अवसर मिल रहे हैं और आय सुरक्षा भी बढ़ी है। दिहाड़ी मज़दूरी बढ़ाकर 370 रुपए कर दी गई है, जिससे ग्रामीण मज़दूरों को बहुत फायदा हुआ है।
डर पैदा करने की कोशिश
आगे भी, ग्राम पंचायतें इस योजना को मुख्यत: लागू करने वाली एजेंसियां बनी रहेंगी। हालांकि केंद्रीय मंत्री ने कहा कि कांग्रेस यह दावा करके लोगों में डर पैदा करने की कोशिश कर रही है कि केंद्र सरकार इस योजना को बंद कर देगी।
उन्होंने कहा कि खेती-बाड़ी के कामों के दौरान किसानों की मदद के लिए हर साल 60 दिनों के रोज़गार का अतिरिक्त इंतज़ाम किया गया है। किसानों के लिए इतने अच्छे कदम उठाने के बावजूद, राज्य सरकार इस पहल का विरोध कर रही है और कृषि विरोधी नीतियां अपना रही है।
उन्होंने कहा कि पहले मज़दूरों के नामों का इस्तेमाल कर मनरेगा का गलत फायदा उठाया जा रहा था। इसे रोकने के लिए बायोमेट्रिक टेक्नोलॉजी को अनिवार्य किया गया। गैर-ज़रूरी खर्च कम करने और भ्रष्टाचार पर लगाम लगाने के लिए केंद्र और राज्यों के बीच लागत-बंटवारे का अनुपात 60 और 40 तय किया गया है।
लोगों की आजीविका मज़बूत होगी
प्रह्लाद जोशी ने कहा कि सरकार के प्रशासनिक नज़रिए से, और समय के साथ योजनाओं को लागू करने में पारदर्शिता और प्रभावशीलता सुनिश्चित करने के लिए कुछ कार्यक्रमों में सुधार करना जरूरी होता है। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य कल्याणकारी उपायों और बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के ज़रिए लोगों की आजीविका को मज़बूत करना है।
मनरेगा को असल में एक मांग-संचालित योजना के तौर पर डिज़ाइन किया गया था। हालांकि समय के साथ इसे अनौपचारिक रूप से टारगेट-आधारित योजना में बदल दिया गया। इस योजना को सफलतापूर्वक लागू करने में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक मज़दूरी और सामग्री की लागत का समय पर भुगतान था।
प्रह्लाद जोशी ने ज़ोर देकर कहा कि नई पुनर्गठित योजना और केंद्रीकृत भुगतान प्रणाली शुरू होने के कारण पहले की सभी समस्याओं पर विराम लग गया है।


