'वीबी-जी राम जी' को हटाकर मनरेगा को वापस लाएं: सिद्दरामय्या
उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून आजीविका का अधिकार छीनता है
Photo: @siddaramaiah X account
बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दरामय्या ने शनिवार को कहा कि उनकी सरकार केंद्र से नए वीबी-जी राम जी अधिनियम को खत्म करने और संप्रग के समय के मनरेगा को वापस लाने की मांग करती है, जिसने गरीबों, कमजोर लोगों, महिलाओं और छोटे किसानों को रोज़गार का अधिकार दिया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि नया कानून आजीविका का अधिकार छीनता है, पंचायतों की शक्तियां कम करता है और राज्यों के फाइनेंस पर अतिरिक्त बोझ डालता है।सिद्दरामय्या ने कहा, 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली राजग सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम नाम का एक कानून पास किया है, जिसने मनरेगा को खत्म कर दिया है। मनरेगा गरीबों और समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और छोटे किसानों को अपनी जगह (गांव) पर काम मांगने का अधिकार देता था। अब नए वीबी-जी राम जी अधिनियम में, सरकार बताएगी कि किस ग्राम पंचायत में काम किया जाना चाहिए।'
यहां पत्रकारों से बात करते हुए सिद्दरामय्या ने कहा कि कांग्रेस पार्टी और राज्य सरकार दोनों इस मुद्दे को एक साथ उठाएंगे। उन्होंने ज़ोर देकर कहा, 'हम इस संबंध में तुरंत एक एक्शन प्लान बनाएंगे।'
उन्होंने आगे कहा, 'कांग्रेस जनता, मजदूरों और सभी समान विचारधारा वाले लोगों के साथ मिलकर तब तक लड़ेगी जब तक वीबी-जी राम अधिनियम वापस नहीं ले लिया जाता, जैसा कि कृषि कानूनों के मामले में हुआ था।'
सिद्दरामय्या ने कहा, 'मोदी सरकार ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के साथ तीन काम किए हैं। इसने समाज के कमजोर वर्गों, खासकर महिलाओं, गरीबों और छोटे किसानों से रोज़ी-रोटी का अधिकार छीन लिया है। इसने पंचायतों की शक्तियां छीन ली हैं, और बिना किसी सलाह-मशविरे के राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ भी डाल दिया है। उन्होंने लोगों से भी सलाह नहीं ली है।'
सिद्दरामय्या ने कहा कि राज्य सरकार केंद्र से वीबी-जी राम जी अधिनियम को खत्म करने और संप्रग-काल के मनरेगा को वापस लाने का आग्रह करती है। उन्होंने कहा, 'हम लोगों के काम के अधिकार को बहाल करने और पंचायतों के स्वशासन के अधिकारों को बहाल करने का भी आग्रह करते हैं।'


