क्या गुजरात चुनाव परिणामों का कर्नाटक चुनावों पर होगा असर? सिद्दरामैया ने यह कहा

सिद्दरामैया ने एग्जिट पोल के अनुमानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा ...

क्या गुजरात चुनाव परिणामों का कर्नाटक चुनावों पर होगा असर? सिद्दरामैया ने यह कहा

'किसी भी चुनाव में हमें जनादेश को स्वीकार करना होगा'

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्दरामैया ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया है कि गुजरात विधानसभा चुनाव नतीजे अगले साल होने वाले इस दक्षिणी राज्य के विधानसभा चुनाव नतीजों के संकेतक होंगे। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव में स्थानीय मुद्दे प्रभावी होते हैं।

राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता ने पड़ोसी राज्य महाराष्ट्र पर राजनीतिक कारणों से सीमा विवाद को उछालने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री बसवराज बोम्मई को अब तक इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलानी चाहिए थी।

सिद्दरामैया ने एग्जिट पोल के अनुमानों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, देखते हैं 8 दिसंबर को नतीजे कब आते हैं। कुछ चैनल हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस को आगे बता रहे हैं तो कुछ कह रहे हैं कि भाजपा आगे है और कड़ी टक्कर है। गुजरात में कह रहे हैं कि भाजपा आगे है, नतीजे आने दीजिए। किसी भी चुनाव में हमें जनादेश को स्वीकार करना होगा।

यहां संवाददाताओं से बात करते हुए, उन्होंने उन दावों को खारिज कर दिया कि गुजरात चुनाव परिणाम इस बात के संकेतक होंगे कि कर्नाटक में चुनावी परिणाम क्या हो सकते हैं, और पूछा कि पंजाब चुनाव परिणाम क्यों नहीं, जिसमें भाजपा नहीं जीत पाई।

उन्होंने कहा, एक राज्य के चुनाव का दूसरे राज्य से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि स्थानीय मुद्दे, प्रशासन और लोगों की भावनाएं अलग-अलग होती हैं। संसद के चुनावों में यह अलग होता है, क्योंकि वहां राष्ट्रीय मुद्दे हावी होते हैं। विधानसभा चुनाव में खास राज्यों के मुद्दे अहम होते हैं। 

गुजरात में भाजपा के सत्ता में बने रहने के पक्ष में एग्जिट पोल के बाद बोम्मई ने विश्वास व्यक्त किया कि इस दक्षिणी राज्य में भी 'सत्ता समर्थक जनादेश' की संभावना है।

एग्जिट पोल ने सोमवार को गुजरात में भाजपा के भारी बहुमत और हिमाचल प्रदेश में कड़ी टक्कर की भविष्यवाणी की। कुछ पोल्स में कांग्रेस को भाजपा पर बढ़त दी गई है।

सीमा मुद्दे को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, महाराष्ट्र इस विवाद को राजनीति के लिए जीवित रख रहा है और महाजन रिपोर्ट (1967) के साथ इस मुद्दे को अच्छी तरह से सुलझा लिया गया है, जो अंतिम है।

उन्होंने कहा, अगर वे (महाराष्ट्र) उस रिपोर्ट को नहीं मानते हैं, तो क्या यह उच्छृंखलता नहीं है? हमें ऐसी चीजों से डरना नहीं चाहिए और इसका मुकाबला करना चाहिए। हमें प्रतिष्ठित अधिवक्ताओं की सहायता से अदालत में मामले का सामना करना होगा।

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