vijay lakshmi arora
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बस्तर। पिछले दिनों केरल में 96 साल की कार्तियानी अम्मा ने साक्षरता परीक्षा में पूरे राज्य में पहला स्थान हासिल किया था। अब छत्तीसगढ़ से भी एक दादी मां का कारनामा सोशल मीडिया में छाया हुआ है। इनकी उम्र करीब 82 साल है लेकिन हौसला इतना कि नौजवान भी हैरान रह जाएं। छत्तीसगढ़ के बस्तर में हाटकचौरा निवासी विजयलक्ष्मी अरोरा हर रोज साइकिल चलाती हैं।

साइकिल की यह सवारी सिर्फ सौ या पांच सौ मीटर तक ही सीमित नहीं है। वे हर रोज करीब 15 किमी तक साइकिल चलाती हैं। इस उम्र में भी विजयलक्ष्मी पूरी तरह स्वस्थ हैं। वे अपनी सेहत का पूरा ध्यान रखती हैं और नियमपूर्वक साइकिल चलाती हैं। यह सिलसिला शुरू कैसे हुआ? इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है। उन्हें इस तरह साइकिल चलाते करीब पांच दशक हो गए।

साइकिल ने दिलाई पहचान
साइकिल चलाने के अलावा विजयलक्ष्मी हर रोज पैदल भी चलती हैं। उन्होंने कुदरत के साथ इस कदर कदमताल मिलाई है कि अब उम्र उनके लिए सिर्फ एक नंबर है। जिस उम्र में लोगों का ज्यादातर वक्त बीमारियों से जूझते हुए दवाइयां लेने और बिस्तर पर आराम करने में बीतता है, विजयलक्ष्मी किसी नौजवान की तरह अपनी साइकिल निकालती हैं और इसके बाद वे अपने सफर पर निकल जाती हैं।

साइकिल चलाने की वजह से वे इतनी मशहूर हो गई हैं कि अब लोग उन्हें असली नाम के बजाय साइकिल वाली दादी मां के नाम से ज्यादा जानते हैं। इस उम्र में भी उनके दांत पूरी तरह सलामत हैं और शरीर भी सेहतमंद। अपने अनुभव बताते हुए विजयलक्ष्मी कहती हैं कि जब उनकी उम्र करीब 35 साल थी तो वे बीमार हो गईं। उन्हें कई दिन आराम करना पड़ा। तब उन्हें समझ में आया कि सेहत को नजरअंदाज करना कितना भयानक हो सकता है।

दादी मां पर सबको नाज़
विजयलक्ष्मी के पति सुदर्शन पाल आयुर्वेद चिकित्सक रहे हैं। उन्होंने पत्नी का इलाज गोरखपुर के चिकित्सालय में कराया जहां एक वरिष्ठ डॉक्टर ने उन्हें रोजाना व्यायाम करने की सलाह दी। उस सलाह को विजयलक्ष्मी ने बहुत गंभीरता से लिया और आज तक उसका पालन कर रही हैं।

उस जमाने में किसी महिला के साइकिल चलाने की कल्पना भी नहीं की जाती थी, तब विजयलक्ष्मी ने साइकिल चलानी शुरू की। शुरुआत में लोगों ने उनका मजाक भी उड़ाया लेकिन इससे उनके हौसले में कमी नहीं आई। आज साइकिल वाली दादी मां पर सबको नाज़ होता है। अक्सर उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया में वायरल होती हैं। लोग उन्हें देखकर प्रेरणा लेते हैं। जो नौजवान देर रात तक मोबाइल फोन चलाने के बाद सुबह आठ बजे तक नहीं उठते, उनके परिजन उन्हें इस दादी मां की मिसाल देकर सबक लेने की नसीहत देते हैं।

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