exercise for good health
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बेंगलूरु। बदलते समय के साथ ही हमारी जीवनशैली और खान-पान सब कुछ बदल चुका है, इसलिए पुराने तौर-तरीकों को भी बदलने की जरूरत है। हमेशा स्वस्थ, सुंदर और निरोगी बने रहने के लिए कुछ नए और प्रभावशाली कदम उठाने होंगे, जो हमें स्वस्थ, सुखी जिंदगी की ओर ले जाएंगे। ये कदम कोई जादुई गोली नहीं हैं, बल्कि कहीं से भी शुरुआत कर सकने की कोशिश मात्र है। यह जरूरी नहीं है कि आप इन सभी को उसी क्रम में अपनाएं जैसा यहां बताया जा रहा है, बल्कि शुरुआत छोटे कदमों से करें, जिन्हें आप आसानी से बिना किसी दिक्कत के कर सकें। इन सिद्धांतों को अपनाने के बाद निश्चित तौर पर आप स्वस्थ और निरोगी जीवन जी सकेंगे।

1. दूर रहें शारीरिक प्रदूषण से : आपकी डाइट, उसमें शामिल भोजन, संतृप्त वसा और सोडियम की अधिकता दर्शाती है कि आपका शरीर और आप खुद कितने प्रदूषित वातावरण में हैं। मद्यपान, धूम्रपान, नशीली वस्तुओं का सेवन, ज्याद खाना, नकारात्मक विचार और प्रदूषित पीने का पानी ये सभी कारक शरीर को प्रदूषित करते हैं। शायद ही ऐसा कोई हो जो इनसे प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित न हो। निम्न तरीके आपको उपरोक्त सभी कारणों से दूर रखने में मदद करेंगे:

* घर में रसायनों का कम से कम इस्तेमाल करें। जैसे बगीचे में उपयोग होने वाले कीटनाशक और घर की सफाई के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद।
* जिम्मेदार कार मालिक बनिए। जब आप कहीं आसपास जा रहे हों, तो कार घर में ही रखें। परिवहन के दूसरे मायने भी जानना जरूरी है।
* अपने आसपास के वातावरण पर नजर डालिए। हो सकता है कि आपको इसमें बदलाव की जरूरत महसूस हो।

2. प्रदूषण डालता है सेहर पर असर : शारीरिक प्रदूषण सीधे तौर पर आपकी सेहत को प्रभावित करता है। इस वजह से आप जीवन के असली आनंद से दूर होते जाते हैं। साथ ही आयु वृद्धि भी आपको जक़ड लेती है। इसके अलावा कई क्रानिक बीमारियां भी हो जाती हैं। निम्न को अपनाएं, फिर देखें इनका असर :

* इस बात का खास ध्यान रखें कि आप अपने शरीर को क्या दे रहे हैं? विचार करें कि क्या यह सब कुछ आपके शरीर के प्रदूषण को बढा तो नहीं रहा।
* बीमार या रोगग्रस्त रहना सुखी जीवन का हिस्सा कतई नहीं है, बल्कि वृद्धावस्था में स्वस्थ और हरदम फुर्तीला बने रहना ही जीवन की सच्चाई है।
* यह भी जानने की कोशिश करते रहें कि आज की आधुनिक जीवनशैली में कैसे स्वस्थ और निरोगी रह सकते हैं?

3. आहार हो ऐसा जो दे प्रदूषण से मुक्ति : पिछले 150 वर्षों में लगातार हमारा खान-पान बदला है, शरीर नहीं। हमें जरूरत है ऐसे आहार की जो पौष्टिकता से भरपूर हो, प्राकृतिक हो और सेहतमंद भी हो। केवलमात्र पौष्टिक भोजन ही शरीर को प्रदूषण से लड़ने का मुख्य हथियार हो सकता है। आहार सलाहकार इसमें आपकी मदद कर सकते हैं। उनसे पूछें कि आपके शरीर के मुताबिक दैनिक आहार कैसा होना चाहिए?

* आहार का चयन सावधानीपूर्वक करें। चयन हमेशा शारीरिक जरूरतों के आधार पर होना चाहिए। यदि कुछ इच्छाओं को मारकर सेहत मिलती है तो सौदा बुरा नहीं है।
* डिब्बाबंद भोजन और फास्ट फूड से दूर ही रहें, तो बेहतर होगा। इनमें मौजूद कई तत्व हानिकारक हो सकते हैं।
* दिनभर में खूब साफ पानी पीएं। जलयोजन शरीर की सफाई प्रक्रिया के लिए महत्वपूर्ण है।

4. लें मल्टीविटामिन और खनिज तत्व : विटामिन और खनिज पदार्थ (मिनरल) शरीर की कई आवश्यक क्रियाआंें के लिए जरूरी हैं। ये न सिर्फ शरीर को विभिन्न रोगों से बचाते हैं, बल्कि रोगों को बढने से भी रोकते हैं। आधुनिक भोज्य सामग्रियों में पौष्टिक तत्वों का अभाव होता है। इसलिए बाजार में उपलब्ध खाद्य पदार्थों के प्रति सावधानी बरतना जरूरी है। इन्हें अपनाएं और फिर देखें आप कैसे निरोग रहते हैं :

* मल्टीविटामिन के लिए आप आंवला और ताजा पालक ले सकते हैं।
* विटामिन और खनिज पदार्थों को भोजन के रूप में लेने से शरीर इन्हें अच्छी तरह अवशोषित कर लेगा, इसलिए आहार में ज्यादा से ज्यादा इन्हें सम्मिलित करने की चेष्टा करें।
* गाजर, पालक, मेथी, मूली और बैंगन खनिज तत्वों से भरपूर हैं, इन्हें दैनिक आहार में आसानी से सम्मिलित किया जा सकता है।

5. अपनाएं जड़ी-बूटियां : जड़, पत्तियां, पेड़ की छाल और फल- इन औषधियों का कुछ भाग, हमारे दैनिक आहार में सम्मिलित होना चाहिए। आधुनिक खाद्य सामग्रियां इनसे कोसों दूर हैं। वनस्पतियां हमारे शरीर को अतिरिक्त सहारा देती हैं और अतिरिक्त बल के साथ उत्तम स्वास्थ्य भी देती हैं। ज़डी-बूटियों में मौजूद तत्व हमें शरीरिक प्रदूषण से ल़डने में सहायता करते हैं। इन्हें अपनाएं कुछ इस तरह से –

* जड़ी-बूटियों को किसी न किसी रूप में प्रतिदिन जरूर लें। इनके फायदे भी अनेक हैं।
* आवंला, हरड़, अश्वगंधा और मुलेठी नियमित रूप से ले सकते हैं। इनसे सेहत पर असर तो प़डेगा ही, रोगों से भी मुक्ति मिलेगी।
* यदि आप चाहें तो अपनी सेहत के अनुरूप ज़डी-बूटियों का चार्ट बना लें, जिसमें रोग विशेष के अनुसार औषधियां निहित हों।

6. रोजाना खाएं पांच फल : ताजे फल और हरी सब्जियां रोगों से लड़ने की क्षमता प्रदान करती हैं। कुछ लोग कई तरह की सब्जियों एवं फलों का उपयोग करते हैं जो उचित भी है। प्रकृति की सारी शक्तियां इन फल और सब्जियों में होती हैं। ये शक्तियां विटामिनों और अन्य पौष्टिक तत्वों की मदद से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देती हैं। इसलिए इन शक्तियों को प्राप्त करने के लिए फल और सब्जियों की भरपूर मात्रा लें –

* ऐसे फल और सब्जियां चुनें, जो कई तरह के विटामिन और खनिज तत्वों से परिपूर्ण हों।
* फल और सब्जियों को साफ पानी से धो लें, उसके बाद ही उनका सेवन करें।
* कुछ सब्जियां बिना काटे भी खाई जा सकती हैं। छिलके युक्त फल खाना भी स्वास्थ्य के लिए अच्छा होता है।

7. आहार में फाइबर बढ़ाएं : फाइबर यानी रेशा, शरीर के लिए बेहद जरूरी है। यह शरीर को हानिकारक तत्वों से बचाता है। साथ ही कई तरह की क्रानिक बीमारियों से भी दूर रखता है। फाइबर शारीरिक वजन घटाने के कार्यक्रम का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। जितना जल्दी हो, फाइबर को अपने दैनिक आहार में सम्मिलित करें :

* सबसे पहले अपने दैनिक आहार में ज्यादा से ज्यादा फाइबर को शामिल करें। दलिया और रेशेदार फल इसके सबसे अच्छे साधन हैं।
* फाइबर युक्त आहार को अलग-अलग रूपों में लें। घुलनशील और अघुलनशील, दोनों ही तरह के फाइबर आपको स्वास्थ्य लाभ पहुंचाते हैं।
* उच्च रेशेयुक्त पदार्थ भी दैनिक आहार में सम्मिलित करें। आहार विशेषज्ञों के अनुसार वयस्कों को नियमित रूप से 25 से 30 ग्राम फाइबर आवश्यक रूप से लेना चाहिए।

8. गुणवत्ता देखें, मात्रा नहीं : मोटापा पूरे विश्व की समस्या है। आज विश्व की जनसंख्या का 50 प्रतिशत भाग मोटापे से ग्रस्त है और यह आंकड़ा प्रतिदिन बढ़ता ही जा रहा है। शरीर में बढ़ती वसा, क्रानिक बीमारियों की वाहक है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में लेना ही सही होगा। कैलोरी में बढ़ोतरी शरीर के मेटाबोलिज्म प्रोटीन की निर्माण प्रक्रिया को भी प्रभावित करती है, इसलिए कैलोरी की अधिकता से बचें :-

* बढ़ती हुई कैलोरी को अपने शारीरिक प्रदूषण के साथ जोड़कर देखिए। कैलोरी वर्तमान शरीर के भार और वजन कम करने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर प्रभावित करती है.

* आहार पौष्टिकता से पूर्ण होना चाहिए । जरूरी यह है कि आपको इनकी सही पहचान हो। यह भी ध्यान रखें कि जो आप खा रहे हैं उसकी गुणवत्ता देखना ज्यादा जरूरी है, न कि उसकी मात्रा।
* फलों का रस, आंवला, गन्ना और मुलेठी कैलोरी से परिपूर्ण होते हैं इसलिए इनका सेवन नियमित रूप से करें।

9. जल्द हो शुरुआत : जरूरी यह नहीं कि आपकी उम्र कितनी है, बल्कि यह जानना ज्यादा जरूरी है कि वृद्धावस्था आपसे कितनी दूर है। यदि आपकी वर्तमान आयु के आधार पर बात करें तो आज आप अपनी सेहत की बेहतरी के लिए कई कदम उठाते हैं, तो इसके परिणाम आपको आने वाले समय में देखने को मिलेंगे। शारीरिक प्रदूषण से लड़ना है तो हरदम जवान बने रहना होगा, फिर चाहे उम्र कितनी ही क्यों न हो?

* यदि वजन घटाने की जरूरत महसूस न हो, तो कैलोरी की मात्रा नियंत्रित करें। यही नियंत्रण समय से पहले आने वाले बुढ़ापे से बचाएगा।
* नियमित व्ययाम करें। व्यायाम मुख्यतः शारीरिक वजन के साथ-साथ कोशिकाओं के संतुलन पर केंद्रित होना चाहिए।

10. आगे बढ़ें : व्यायाम और मानसिक स्थिरता सभी के लिए जरूरी है, इसलिए इन अनमोल सिद्धांतों का पालन कराएं जो बिना कीमत चुकाए आपने अपनाए हैं। थकान को शरीर पर हावी न होने दें, इसलिए हमेशा सक्रिय रहें। यही नियम अवसाद पर भी लागू होता है। कुछ तत्थों से यह स्पष्ट हुआ है कि अवसाद की वजह से अनगिनत बीमारियां हमारे शरीर में घर बना लेती हैं और इनसे मुक्ति पाने में काफी समय लग जाता है।

* अपनी थकान को शारीरिक प्रदूषण से जो़डकर देखें। शारीरिक कमजोरी रोगों से लड़ने की क्षमता छीन लेती है।
* थकान उतारने की कुछ पद्धतियों से दूर ही रहें तो बेहतर होगा।
* व्यायाम शरीर की जरूरत है। इसे शौक नहीं आदत बनाएं।

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