हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और विश्वास के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था: प्रधानमंत्री

मोदी ने सोमनाथ शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया

हमारे पुरखों ने अपनी आस्था और विश्वास के लिए अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था: प्रधानमंत्री

Photo: narendramodi FB Page

सोमनाथ धाम/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यहां सोमनाथ शौर्य यात्रा में हिस्सा लिया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि यह भी एक सुखद संयोग है कि आज सोमनाथ मंदिर की स्वाभिमान यात्रा के 1,000 साल पूरे हो रहे हैं। साथ ही, सन् 1951 में हुए इसके पुनर्निर्माण के 75 साल भी पूरे हो रहे हैं। मैं दुनियाभर के करोड़ों श्रद्धालुओं को सोमनाथ स्वाभिमान पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

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प्रधानमंत्री ने कहा कि एक हजार साल पहले, इसी जगह पर क्या माहौल रहा होगा? आप जो यहां उपस्थित हैं, उनके पुरखों ने, हमारे पुरखों ने जान की बाज़ी लगा दी थी। अपनी आस्था के लिए, अपने विश्वास के लिए, अपने महादेव के लिए उन्होंने अपना सबकुछ न्योछावर कर दिया था।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हजार साल पहले वे आततायी सोच रहे थे कि उन्होंने हमें जीत लिया, लेकिन आज एक हजार साल बाद भी, सोमनाथ महादेव के मंदिर पर फहरा रही ध्वजा पूरी सृष्टि का आह्वान कर रही है कि हिंदुस्तान की शक्ति क्या है, सामर्थ्य क्या है!

प्रधानमंत्री ने कहा कि तुष्टीकरण के ठेकेदारों ने कट्टरपंथी सोच के आगे घुटने टेके। जब भारत गुलामी की बेड़ियों से मुक्त हुआ, जब सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के पुनर्निर्माण की शपथ ली, तो उन्हें भी रोकने की कोशिश की गई थी। सन् 1951 में, भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के यहां आने पर भी आपत्ति जताई गई।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्य स्थल हैं। ये स्थल हमारे सामर्थ्य, प्रतिरोध और परंपरा के पर्याय रहे हैं। लेकिन दुर्भाग्य से आज़ादी के बाद, गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने इनसे पल्ला झाड़ने का कोशिश की। उस इतिहास को भुलाने के कुत्सित प्रयास किए गए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे, तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, लेकिन वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते थे, उसके नाम में ही सोम अर्थात् अमृत जुड़ा हुआ है। उसमें हलाहल को पीकर भी अमर रहने का विचार जुड़ा है। उसके भीतर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है, जो कल्याणकारक भी है और प्रचंड तांडव: शिव: यह शक्ति का स्रोत भी है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि सोमनाथ में विराजमान महादेव, उनका एक नाम मृत्युंजय भी है, मृत्युंजय जिसने मृत्यु को भी जीत लिया, जो स्वयं काल स्वरूप है।

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