नौकरी के बदले जमीन मामला: अदालत के आदेश के बाद क्या बोले राजग नेता?
अदालती आदेश से बढ़ीं लालू परिवार की मुश्किलें
फोटो: संबंधित पार्टियों के फेसबुक पेजों से।
पटना/दक्षिण भारत। बिहार में सत्तारूढ़ राजग ने शुक्रवार को दिल्ली की अदालत के उस आदेश का स्वागत किया, जिसमें राजद प्रमुख एवं पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद, उनके परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों के खिलाफ नौकरी के बदले जमीन घोटाले में आरोप तय करने का निर्देश दिया गया है।
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि लालू प्रसाद ने रेल मंत्रालय को एक आपराधिक धंधा चलाने के लिए अपनी निजी जागीर की तरह इस्तेमाल किया, जहां यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से ज़मीन के टुकड़े हासिल करने के लिए सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया।यहां पत्रकारों से बात करते हुए, जदयू एमएलसी नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद का परिवार एक क्रिमिनल-पॉलिटिकल सिंडिकेट चला रहा है।
उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद करते हैं कि अदालत ट्रायल में तेज़ी लाएगी और उनकी संपत्ति ज़ब्त करेगी। वहां अनाथालय, विधवा आश्रम और ईबीसी छात्रों के लिए हॉस्टल बनाए जाने चाहिएं, ताकि यह मज़बूत संदेश जाए कि राजनीति कोई क्राइम सिंडिकेट चलाने का धंधा नहीं है।'
बिहार के मंत्री एवं भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने ज़ोर देकर कहा कि लालू प्रसाद और उनके परिवार को अदालत के आदेशों और निर्देशों का पालन करना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'लालू यादव और उनके परिवार को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने और जांच एजेंसी द्वारा पेश किए गए सबूतों के आधार पर फैसला सुनाया है। लालू प्रसाद को अदालत के निर्देशों का पालन करना चाहिए।'
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता नीरज कुमार ने आरोप लगाया कि लालू प्रसाद का परिवार भ्रष्टाचार के लिए राजनीति का इस्तेमाल करता है और बिहार के लोगों, खासकर गरीबों को लूटकर दौलत जमा करता है।
उन्होंने कहा, 'अदालत के आदेश से यह साफ है कि लालू प्रसाद का परिवार एक क्रिमिनल सिंडिकेट चलाता है। हम मांग करते हैं कि उनकी अंतरराष्ट्रीय संपत्ति की भी जांच होनी चाहिए।'
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियां राजनीतिक बदले की भावना के तहत केंद्र सरकार के साथ मिलीभगत करके काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा, 'यह मामला बहुत पहले ही बंद हो गया था, लेकिन केंद्र सरकार के निर्देश पर लालू प्रसाद और उनके परिवार को परेशान करने के लिए जांच एजेंसियों ने इसे फिर से खोल दिया है।'


