कैसे रुकेगा प्रतिभाओं का पलायन?

हर साल कई भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ रहे हैं

कैसे रुकेगा प्रतिभाओं का पलायन?

क्या वजह है कि ये विदेश की सेवा करने चले गए?

एक चर्चित एआई-सक्षम वैश्विक प्रतिभा आवाजाही मंच द्वारा किए गए सर्वेक्षण का यह नतीजा कि 'बेहतर (आर्थिक) भविष्य के लिए 52 प्रतिशत भारतीय विदेश जाने की मंशा रखते हैं', बताता है कि सरकार और समाज को ऐसा माहौल बनाने पर गंभीरता से ध्यान देना होगा, जिससे युवाओं को यहां अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने में मदद मिले। उक्त मंच के निष्कर्ष और आंकड़ों पर सवाल उठाए जा सकते हैं। अगर आज सोशल मीडिया को समाज का दर्पण माना जाए तो ऐसे युवाओं का आंकड़ा कहीं ज्यादा हो सकता है, जिन्हें अवसर मिलें तो वे विदेश जाकर रहना और कमाना चाहेंगे। हर साल कई भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि हर साल 2 लाख से ज्यादा भारतीय अपने पूर्वजों का देश छोड़कर विदेशी नागरिकता ले रहे हैं। साल 2020 और 2021 में कोरोना महामारी के कारण कुछ कमी जरूर आई थी। ये वो लोग हैं, जिनके पास संसाधन हैं, प्रतिभा है। अगर ये भारत में रहकर काम करते तो देश की अर्थव्यवस्था और समाज को कई तरह से फायदा पहुंचाते। आखिर क्या वजह है कि ये यहीं रहकर अपने धन और ज्ञान से देश की सेवा करने के बजाय विदेश की सेवा करने चले गए? क्या इससे देश को कोई नुकसान होता है? कल्पना कीजिए, किसी गांव में 100 लोग हैं, जिनमें से 90 लोग साधारण पृष्ठभूमि से आते हैं। वहीं, 10 लोग अत्यंत प्रतिभाशाली हैं, जो अपने ज्ञान से समाज को नई दिशा दे सकते हैं। अगर ये 10 लोग उस गांव को छोड़कर कहीं और चले जाएं तो क्या होगा? ये जहां भी जाएंगे, उस इलाके को फायदा पहुंचाएंगे, जबकि उनके गांव को ऐसा नुकसान होगा, जिसका कोई हिसाब भी नहीं लगाएगा। इसी उदाहरण को हम किसी देश के सन्दर्भ में देख सकते हैं।

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सोचिए, अमेरिका की मशहूर कंपनियों में जो भारतीय प्रतिभाएं काम कर रही हैं, उन्हें वैसे ही अवसर यहां मिले होते तो अपना देश आज कहां होता? क्या कोई अमेरिकी राष्ट्रपति टैरिफ लगाने की धमकियां दे सकता था? अक्सर यह कहा जाता है कि 'प्रतिभाशाली भारतीय सिर्फ धन कमाने के लिए विदेश जाते हैं।' हालांकि धन कमाना एक कारण हो सकता है, लेकिन वे सिर्फ धन के लिए विदेश जाकर नहीं बसते। ये लोग वहां भी टैक्स चुकाते हैं, जिसके बदले में मिलते हैं- अच्छे स्कूल, गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधाएं, साफ हवा, साफ पानी, सामाजिक सुरक्षा और जरूरत पड़ने पर प्रशासन से मदद। उन देशों ने व्यवसाय करना आसान बना दिया, इसलिए वहां युवा उद्यमी बहुत उन्नति कर रहे हैं। ये मूलभूत सुविधाएं हैं। अगर सरकार और समाज ठान लें तो यह काम भारत में भी संभव है। देश की जवानी देश की उन्नति में लगनी चाहिए। इसके लिए हर स्तर पर काम होना चाहिए। जो भारतीय युवा अपने देश में पढ़ाई करने के बाद अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस आदि देशों में काम कर उनकी अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत बनाने में योगदान दे रहे हैं, उन्हें दोष देना बंद करें। अपने माता-पिता और परिवार से कोसों दूर कौन जाना चाहता है? देश में रोजगार की स्थिति सुधरे और मूलभूत सुविधाएं बेहतर हों तो भारत के प्रतिभाशाली युवा यहीं रहकर काम करना चाहेंगे। ऐसा नहीं है कि इन युवाओं के लिए विदेश में मौज ही मौज है। वहां नए सामाजिक परिवेश में ढलना आसान नहीं होता। मकान किराए से लेकर खानपान की चीजों तक के दाम काफी ज्यादा होते हैं। वे इसके बावजूद वहां रहना चाहते हैं, क्योंकि इस बात को लेकर निश्चिंत हैं कि कड़ी मेहनत के बाद सुविधाएं अच्छी ही मिलेंगी। यही विश्वास भारतीय व्यवस्थाओं को लेकर पैदा होना चाहिए।

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