'सोमनाथ स्वाभिमान' भारत माता के असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है: प्रधानमंत्री

'आप भी सोमनाथ गए हैं तो अपनी तस्वीरें हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ शेयर करें'

'सोमनाथ स्वाभिमान' भारत माता के असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है: प्रधानमंत्री

Photo: @NarendraModi YouTube Channel

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि गुरुवार से शुरू हो रहा सोमनाथ स्वाभिमान पर्व भारत माता के उन असंख्य सपूतों को याद करने के बारे में है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया।

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प्रधानमंत्री ने अपने एक्स अकाउंट पर लिखा, 'जय सोमनाथ! सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का आज से शुभारंभ हो रहा है। एक हजार वर्ष पूर्व, जनवरी 1026 में सोमनाथ मंदिर ने अपने इतिहास का पहला आक्रमण झेला था। साल 1026 का आक्रमण और उसके बाद हुए अनेक हमले भी हमारी शाश्वत आस्था को डिगा नहीं सके। बल्कि इनसे भारत की सांस्कृतिक एकता की भावना और सशक्त हुई और सोमनाथ का बार-बार पुनरोद्धार होता रहा।'

प्रधानमंत्री ने लिखा, 'मैं, सोमनाथ की अपनी पिछली यात्राओं की कुछ तस्वीरें साझा कर रहा हूं। यदि आप भी सोमनाथ गए हैं, तो अपनी तस्वीरें हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के साथ जरूर शेयर करें।'

प्रधानमंत्री ने लिखा, 'हैशटैग सोमनाथ स्वाभिमान पर्व का यह अवसर, भारत माता के उन असंख्य सपूतों को स्मरण करने का पर्व है, जिन्होंने कभी अपने सिद्धांतों और मूल्यों से समझौता नहीं किया। समय कितना ही कठिन और भयावह क्यों न रहा हो, उनका संकल्प हमेशा अडिग रहा। हमारी सभ्यता और सांस्कृतिक चेतना के प्रति उनकी निष्ठा अटूट रही। अटूट आस्था के एक हजार वर्ष का यह अवसर, हमें राष्ट्र की एकता के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की प्रेरणा देता है।'

प्रधानमंत्री ने लिखा, 'मैं 31 अक्टूबर, 2001 को सोमनाथ में आयोजित एक कार्यक्रम की कुछ झलकियां भी आपके साथ साझा कर रहा हूं। यह वो साल था, जब हमने 1951 में पुनर्निर्मित सोमनाथ मंदिर के उद्घाटन के 50 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव मनाया था। साल 1951 में वो ऐतिहासिक समारोह तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की मौजूदगी में संपन्न हुआ था।'

उन्होंने लिखा, 'सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण में सरदार पटेल और केएम मुंशी के साथ ही कई महान विभूतियों के प्रयास अत्यंत उल्लेखनीय रहे हैं। साल 2001 के इस कार्यक्रम में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटलजी और गृह मंत्री आडवाणीजी और कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे। वर्ष 2026 में हम 1951 में हुए भव्य समारोह के 75 वर्ष पूर्ण होने का भी स्मरण कर रहे हैं।'

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