जीवन को हर्षमय बनाने के लिए आत्म उत्कर्ष की राह को चुनें: कपिल मुनि

'इस नव वर्ष के अवसर पर हम कुछ ऐसा नया करें जो कभी पुराना ही न हो'

जीवन को हर्षमय बनाने के लिए आत्म उत्कर्ष की राह को चुनें: कपिल मुनि

'संकल्प ही सिद्धि का आधार है'

चेन्नई/दक्षिण भारत। यहाँ मैलापुर में बाजार रोड स्थित जैन स्थानक में श्रीकपिल मुनि जी म.सा. के सान्निध्य एवं श्री वर्धमान श्वेताम्बर स्था.जैन संघ, मैलापुर के तत्वावधान में आयोजित त्रिदिवसीय आध्यात्मिक कार्यक्रम के तहत गुरुवार को सामूहिक सामायिक साधना दिवस का आयोजन किया गया। 

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कार्यक्रम की शरुआत सुबह पञ्च परमेष्ठी और भगवान ऋषभ देव की स्तुति श्री भक्तामर स्तोत्र जप अनुष्ठान से की गयी। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवद स्तुति के संगान से वातावरण को भक्ति रस से अनुप्राणित कर दिया। इस मौके पर कपिल मुनिजी म.सा. ने कहा कि आज सभी का मन प्रफुल्लित और उल्लसित है क्योंकि आज नया दिन है, नए साल का शुभारंभ है। मगर चिंतनीय सवाल ये है कि ये नया भी आखिरकार कब तक नया रहेगा?

नया से पुराना होना दुनिया की प्रत्येक चीज की फितरत है। इस नव वर्ष के अवसर पर हम कुछ ऐसा नया करें जो कभी पुराना ही न हो। इस नव वर्ष में हम जीवन उत्कर्ष की राह पर चलने का संकल्प लें ताकि हमारा जीवन संघर्ष से मुक्त होकर हर्षमय बन जाये। संकल्प ही सिद्धि का आधार है। दुःख, द्वंद्व, दुविधा और दुर्बलता से मुक्ति तभी संभव है जब हम आत्मगुणों के उत्कर्ष के लिए अध्यात्म के मार्ग में पर चहलकदमी करेंगे।

मुनि श्री ने कहा कि आज हमारे जीवन में जो भी शुभ और श्रेष्ठ साकार हो रहा है वह प्रभु कृपा और गुरु कृपा का ही परिणाम है। प्रभु की वाणी से ही शुभ और अशुभ, उचित और अनुचित की समझ का वरदान प्राप्त हुआ है। गुरुजनों ने प्रभु की वाणी के रहस्य को हम तक पहुंचाने का महान अनुग्रह किया है, अतः जीवन में भगवान और गुरु भगवंतों को विस्मृत करने का अपराध कदापि न करें। अपनी दिनचर्या की शुरुआत भगवान के स्मरण के साथ करेंगे तो जीवन में कदम कदम पर मंगल ही मंगल होगा। 

मुनिश्री ने कहा कि व्यक्ति का अतीत कैसे भी व्यतीत हुआ हो, अगर व्यक्ति वर्तमान के प्रति सजग है तो उसके भविष्य की उज्ज्वलता से कोई भी वंचित नहीं कर सकता। मुनिश्री ने कहा कि हम नया संकल्प लेकर अपने व्यक्तिगत जीवन, समाज राष्ट्र के लिए उपयोगी बन सकते हैं। जिसके पास प्रतिपल देव गुरु और धर्म की शक्ति प्राप्त है, उसका हर पल उत्सव बन जाता है। 

मुनिश्री ने भक्तामर स्तोत्र जप अनुष्ठान की महता और उपयोगिता पर रोशनी डालते हुए कहा कि भक्तामर स्तोत्र भगवान ऋषभ देव की स्तुति का गान है। इस जप अनुष्ठान के प्रभाव से समस्या ग्रस्त जीवन को समाधान की राह मिलती है। 

इस कार्यक्रम के लाभार्थी बनने का सौभाग्य हुक्मीचंद तालेड़ा परिवार ने प्राप्त किया। संघ की ओर से उनका सम्मान किया गया। कार्यक्रम का संचालन मंत्री विमलचंद खाबिया ने किया।

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