कैलेंडर तक सीमित न रहे बदलाव
संकल्प ऐसे लें, जिन पर अमल करना आसान हो
संकल्प दृढ़ हो तो सफलता जरूर मिलेगी
तारीख बदलने के साथ साल बदलता है और उसके साथ कैलेंडर भी बदल जाता है। बदलाव सिर्फ कैलेंडर तक सीमित नहीं रहना चाहिए। व्यक्ति, परिवार, समाज और देश में भी नजर आना चाहिए। व्यक्ति मजबूत होगा तो देश भी मजबूत होगा। इसके लिए अपने जीवन में सकारात्मक बदलावों को स्थान देना चाहिए। यूं तो कई लोग नए साल के पहले दिन बड़े-बड़े संकल्प लेते हैं, लेकिन वे उन पर एक-दो महीने भी अमल नहीं कर पाते। इसलिए संकल्प ऐसे लें, जिन पर अमल करना आसान हो। इस साल हर नागरिक को अपने स्वास्थ्य की रक्षा का संकल्प जरूर लेना चाहिए। अगर हमारी दिनचर्या प्रकृति के नियमों के अनुसार हो, खानपान सात्विक हो, नियमित व्यायाम करें तो स्वस्थ जीवन जी सकते हैं। जब लोग अपने स्वास्थ्य के संबंध में इतने जागरूक होंगे तो देश खुशहाल होगा। नए साल में पर्यावरण के संरक्षण को प्राथमिकता देनी होगी। यह सिर्फ सरकारों का काम नहीं है। हमारे कई शहरों में वायु प्रदूषण गंभीर स्थिति में पहुंच चुका है। भूजल का स्तर नीचे गिरता जा रहा है। अगर समय रहते इन दोनों मुद्दों की ओर ध्यान नहीं दिया तो भविष्य में हालात बहुत मुश्किल हो सकते हैं। सरकार और जनता को स्वच्छ वायु की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे। मानसून आने से पहले ऐसे इंतजाम करने होंगे, जिससे वर्षाजल धरती में जाए। इस साल नकारात्मकता को पीछे छोड़ने का संकल्प लें। सोशल मीडिया पर ऐसे अकाउंट्स से दूर रहें, जो नकारात्मकता को बढ़ावा देते हैं। फेक न्यूज की चुनौती का सामना करने के लिए नियमित रूप से अख़बार पढ़ें। सकारात्मकता पर आधारित किताबें पढ़ने से नई ऊर्जा मिलेगी। प्राय: पुराने कड़वे अनुभवों, बुरी यादों को भूलना आसान नहीं होता, लेकिन सुखी जीवन का सूत्र यही है कि इनसे सबक लेकर आगे बढ़ें। इन्हें बार-बार याद न करें।
नए साल में परिवार और संबंधों को ज्यादा महत्त्व दें। हर परिवार यह नियम बना ले कि हफ्ते में किसी खास दिन सभी सदस्य साथ बैठेंगे और एक-दूसरे के योगदान को सराहेंगे। हर परिवार में कुछ समस्याएं भी होती हैं। उन्हें आपसी खींचतान के बजाय प्रेम और सम्मान के साथ सुलझाने का संकल्प लें। परिवार में छोटे बच्चों से जरूर बातचीत करें। उन्हें अच्छी आदतें सिखाएं। कई लोग यह तो चाहते हैं कि उनके बच्चे मोबाइल फोन, टीवी आदि देखने की जिद न करें, बड़े होकर नशाखोरी से दूर रहें, मीठा बोलें, लेकिन वे खुद अपने जीवन में ऐसा नहीं करते। पहले खुद अच्छा बनकर दिखाएंगे तो बच्चों पर ज्यादा असर होगा। सीखने का सिलसिला कभी बंद नहीं होना चाहिए। जो व्यक्ति सीखना छोड़ देता है, वह पीछे रह जाता है। जापान में कई बुजुर्ग ऐसे हैं, जो अस्सी साल की उम्र में भी कुछ नया सीखना चाहते हैं। हाल में एक जापानी सज्जन का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में रहा था, जो लगभग चौरासी साल के हैं और जूते बनाना सीख रहे हैं। वे जूते पॉलिश करने के लिए नए-नए प्रयोग कर रहे हैं। उनके प्रयासों की बहुत सराहना हो रही है। हमारे देश में तीस साल के नौजवान कोई नया काम सीखने और करने से झिझकते हैं। 'लोग क्या कहेंगे?' वे यही सोचकर आगे बढ़ने का साहस नहीं जुटा पाते। नए साल में इस झिझक को खुद पर हावी न होने दें। जो काम सीखना चाहते हैं, उसे सीखें और आगे बढ़ें। ऐसे भी लोग हैं, जिनके पास पर्याप्त संसाधन हैं। बस, वे अच्छे समय का इंतजार करते रहते हैं। इस इंतजार में महीने और साल बीत जाते हैं। इंतजार करते रहने से अच्छा समय नहीं आएगा। सबसे अच्छा समय आज है। संकल्प दृढ़ हो तो सफलता जरूर मिलेगी। आइए, हम सब मिलकर स्वस्थ, सकारात्मक और मजबूत भारत का निर्माण करें। बहुत शुभ कामनाएं!

