कर्नाटक: कांग्रेस ने छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया और तौर-तरीकों का अध्ययन करने के लिए समिति बनाई

डीके शिवकुमार ने गठन किया

कर्नाटक: कांग्रेस ने छात्र संघ चुनाव की प्रक्रिया और तौर-तरीकों का अध्ययन करने के लिए समिति बनाई

Photo: DKShivakumar.official FB Page

बेंगलूरु/दक्षिण भारत। कर्नाटक में सत्तारूढ़ कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने राज्य में छात्र संघ चुनाव कराने की प्रक्रिया और तरीकों का अध्ययन करने तथा इस पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए पार्टी नेताओं की एक समिति का गठन किया है।

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शिवकुमार, जो उपमुख्यमंत्री भी हैं, ने हाल में संविधान दिवस के एक कार्यक्रम के दौरान कर्नाटक में छात्र संघ चुनावों को फिर से शुरू करने की योजनाओं के बारे में बात की थी। उन्होंने कहा था कि इससे परिसरों में राजनीतिक नेतृत्व विकसित होगा।

चिकित्सा शिक्षा मंत्री शरण प्रकाश पाटिल को नौ सदस्यीय समिति का संयोजक नियुक्त किया गया है। इस समिति में उच्च शिक्षा मंत्री सुधाकर, विधायक, विधान परिषद सदस्य तथा यूथ कांग्रेस और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई) के प्रदेश अध्यक्ष शामिल हैं।

शिवकुमार ने 27 दिसंबर के एक पत्र में कहा कि समिति को 15 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट और सिफारिशें जमा करने को कहा गया है।

उन्होंने कहा, 'छात्र संघ चुनाव कराने से छात्रों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व को बढ़ावा मिलता है। पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं द्वारा व्यक्त किए गए विचारों के आधार पर कि इससे शैक्षणिक अनुशासन बनाए रखने में मदद मिलती है और छात्रों में नेतृत्व गुण विकसित होते हैं, कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस समिति ने छात्र संघ चुनाव कराने पर विचार किया है।'
 
केपीसीसी अध्यक्ष ने कहा कि यह समिति बनाई जा रही है, ताकि वर्तमान परिस्थितियों और ऐसे चुनाव कराने की संभावनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि समिति को सिफारिशों के साथ एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।   

कर्नाटक में छात्र चुनावों पर साल 1989 में उस समय की कांग्रेस सरकार, जिसकी अगुवाई मुख्यमंत्री वीरेंद्र पाटिल कर रहे थे, ने प्रतिबंध लगा दिया था। यह कथित तौर पर कॉलेज परिसरों में हुई हिंसक घटनाओं और संघर्षों के सिलसिले के साथ ही परिसरों में राजनीतिक पार्टियों के बढ़ते प्रभाव के जवाब में किया गया था।

समिति के लिए कार्यक्षेत्र में शामिल हैं: यह अध्ययन करना और सिफारिशें देना कि चुनाव किस चरण में कराए जा सकते हैं; चुनाव कराने के फायदे, नुकसान और परिणाम; यह विस्तृत रिपोर्ट तैयार करना कि चुनाव किसी पार्टी के नाम पर होने चाहिएं या केवल विचारधाराओं के आधार पर, या गैर-राजनीतिक तरीके से, ताकि इसका उद्देश्य छात्रों के कल्याण के लिए हो। 

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