हम दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बनाएंगे: शाह

केंद्रीय गृह मंत्री ने संसद पुस्तकालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया

हम दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बनाएंगे: शाह

समय पर न्याय मिलेगा तो देश का भला होगा

नई दिल्ली/दक्षिण भारत। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को यहां संसद पुस्तकालय में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दंड की जगह न्याय लेगा, देरी की जगह स्पीडी ट्रायल और स्पीडी जस्टिस मिलेगा और पहले सिर्फ पुलिस के अधिकारों की रक्षा की गई थी। अब पीड़ितों व शिकायतकर्ता के अधिकारों की रक्षा होगी। इस नए नजरिए के साथ ये तीनों कानून देश में लागू हुए हैं।

शाह ने कहा कि देश की जनता को मैं बहुत-बहुत बधाई देना चाहता हूं कि आजादी के 77 साल बाद आपराधिक न्याय प्रणाली पूर्णतया स्वदेशी हो रही है और भारतीय प्रकृति के आधार पर चलेगी। 

शाह ने कहा कि 75 साल बाद इन कानूनों पर विचार हुआ। ये कानून जब आज से हर थाने में अपना काम करना चालू करेंगे, तब अंग्रेजों के बनाए हुए कानून निरस्त होंगे और भारत की ससंद में बनाए गए कानून आएंगे।

शाह ने कहा कि 'राजद्रोह' एक ऐसा कानून था, जिसे अंग्रेजों ने अपने शासन की रक्षा के लिए बनाया था। महात्मा गांधी, तिलक महाराज, सरदार पटेल ... सभी ने इसी कानून के तहत छह-छह साल की सजा काटी थी। इसी कानून के तहत केसरी पर प्रतिबंध लगाया गया था। राजद्रोह कानून को हमने समाप्त कर दिया ​है और इसकी जगह देशविरोधी हरकतों के लिए नई धारा लेकर आए हैं।

शाह ने कहा कि संहिता को लेकर कुछ विपक्ष के मित्र अलग-अलग बातें मीडिया के सामने रख रहे हैं कि अभी ट्रेनिंग नहीं हुई है, चर्चा नहीं हुई है। लोकसभा में 9 घंटा 34 मिनट चर्चा हुई, 34 सदस्यों ने हिस्सा लिया था। राज्यसभा में 7 घंटा 10 मिनट चर्चा हुई है, 40 सदस्यों ने हिस्सा लिया था।

शाह ने कहा कि भारत की आजादी के बाद किसी भी कानून को पारित कराने के लिए इतनी लंबी चर्चा की प्रक्रिया नहीं हुई है। चार साल तक इस कानून पर विचार हुआ और आपको अभी भी कुछ कहना है, तो आप जरूर आइए, मैं सुनने को तैयार हूं। लेकिन कृपया इस कानून को जनता की सेवा करने का मौका देना चाहिए। समय पर न्याय मिलेगा तो देश का भला होगा।

शाह ने कहा कि हम दुनिया की सबसे आधुनिक न्याय प्रणाली बनाएंगे। उल्लेखनीय है कि 99% से अधिक पुलिस स्टेशन कम्प्यूटरीकृत हो चुके हैं। ई-रिकॉर्ड, ई-एफआईआर, अदालतों का डिजिटलीकरण, कुछ ऐसे उपाय हैं जो देश में अभूतपूर्व क्रांति ला रहे हैं।

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