अतीत में प्रोजेक्ट्स को 'अटकाने, लटकाने, भटकाने' की प्रवृत्ति रही, जिससे बहुत नुकसान हुआ: मोदी

प्रधानमंत्री ने आंध्र प्रदेश के पलासमुद्रम में राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी का उद्घाटन किया

अतीत में प्रोजेक्ट्स को 'अटकाने, लटकाने, भटकाने' की प्रवृत्ति रही, जिससे बहुत नुकसान हुआ: मोदी

'आजकल पूरा देश राममय है, रामभक्ति में सराबोर है'

पलासमुद्रम/दक्षिण भारत। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को आंध्र प्रदेश के पलासमुद्रम में राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि मुझे विश्वास है कि एनएसीआईएन (राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नारकोटिक्स अकादमी) का यह नया परिसर सुशासन के लिए नए आयाम बनाएगा और भारत में व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा देगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यहां आने से पहले, पवित्र लेपाक्षी में वीरभद्र मंदिर जाने का सौभाग्य मिला है। मंदिर में मुझे रंगनाथ रामायण सुनने का अवसर मिला, मैंने वहां भजन-कीर्तन में भी हिस्सा लिया। मान्यता है कि यहीं पास में भगवान श्रीराम का जटायु से संवाद हुआ था। आप जानते हैं, अयोध्या में प्राण-प्रतिष्ठा से पूर्व मेरा 11 दिन का अनुष्ठान चल रहा है। ऐसी पुण्य अवधि में यहां ईश्वर से साक्षात् आशीर्वाद पाकर मैं धन्य हो गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कल पूरा देश राममय है, रामभक्ति में सराबोर है, लेकिन प्रभु श्रीराम का जीवन विस्तार, उनकी प्रेरणा, आस्था ... भक्ति के दायरे से कहीं ज्यादा है। प्रभु श्रीराम शासन के, सामाजिक जीवन में सुशासन के ऐसे प्रतीक हैं, जो आपके संस्थान के लिए भी बहुत बड़ी प्रेरणा बन सकते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि एनएसीआईएन को भारत को व्यापार और वाणिज्य के लिए एक आधुनिक पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करना चाहिए। इसे भारत को वैश्विक व्यापार के लिए एक महत्त्वपूर्ण भागीदार बनाने और कर, सीमा शुल्क के माध्यम से व्यापार करने में आसानी को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल वातावरण बनाना चाहिए।

प्रधानमंत्री ने कहा कि अतीत में हमारे यहां प्रोजेक्ट्स को अटकाने, लटकाने और भटकाने की प्रवृत्ति रही है, जिस कारण से देश को बहुत नुकसान हुआ है। बीते 10 वर्षों में हमारी सरकार ने लागत का ध्यान रखा है और योजनाओं को समय पर पूरा करने पर जोर दिया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले 10 वर्षों में गरीब, किसान, महिला व युवा ... इन सबको हमने सशक्त किया है। हमारी योजनाओं के केंद्र में वही लोग सर्वोपरि रहे हैं, जो वंचित थे, शोषित थे, समाज के अंतिम पायदान पर खड़े थे।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हमें कर संग्रह के रूप में एकत्रित धन का उपयोग समाज कल्याण के लिए करना चाहिए। भारत में एक जटिल कर संरचना हुआ करती थी। जीएसटी के साथ, हमने पारदर्शिता लाते हुए देश को एक अनूठी कराधान प्रणाली प्रदान की। हमने फेसलेस टैक्स असेसमेंट सिस्टम शुरू किया। इन सभी प्रयासों से कर संग्रहण में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है। संग्रह को राज्य के खजाने में रखा जाता है और विभिन्न पहल के रूप में लोगों को लौटाया जाता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि नीति आयोग की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, हमारी सरकार के पिछले 9 वर्षों के दौरान करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर निकले हैं। जिस देश में दशकों तक 'गरीबी हटाओ' के नारे दिए जाते रहे, उस देश में सिर्फ 9 वर्ष में 25 करोड़ लोगों का गरीबी से बाहर निकलना ऐतिहासिक है।

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