कोई महिला क्या पहनना चाहती है यह उसका विशेषाधिकार : सब्यसाची

कोई महिला क्या पहनना चाहती है यह उसका विशेषाधिकार : सब्यसाची

नई दिल्ली। जाने माने फैशन डिजायनर सब्यसाची मुखर्जी ने भारतीय महिलाओं और सा़डी पर की गई अपनी टिप्पणी को लेकर उठे विवाद पर मंगलवार को प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि इसे बेवजह लिंग आधारित मुद्दा बना कर तूल दिया जा रहा है। डिजाइनर ने उक्त टिप्पणी हार्वर्ड इंडिया सम्मेलन में की थी। उनसे महिलाओं को सा़डी बांधने में होने वाली दिक्कतों के बारे में सवाल किया गया था जिस पर उन्होंने टिप्पणी की थी और कहा था कि यह हमारे परिधान इतिहास और विरासत का परिचायक है। सब्यसाची ने कहा, परिधान के इतिहास और विरासत पर की गई इस टिप्पणी का उद्देश्य कुछ और था और इसे लेकर नारीवाद पर बहस शुरू हो गई। यह एक लिंग आधारित मुद्दा है। चूंकि सवाल सा़डी के बारे में था इसलिए इसमें महिलाएं शामिल थीं। उन्होंने बताया, पुरुषों की राष्ट्रीय पोशाक के बारे में भी मेरा यही रुख है। मैंने किसी महिला की पसंद के बारे में कोई भी बयान नहीं दिया है। वह जो पहनना चाहती हैं यह हमेशा से उनका विशेषाधिकार है।गौरतलब है कि शनिवार को कै्ब्रिरज विश्वविद्यालय में भारतीय छात्रों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, मुझे लगता है कि अगर आप मुझसे कहती हैं कि मुझे सा़डी पहननी नहीं आती तो मैं कहूंगा कि आपको शर्म आनी चाहिए। यह आपकी संस्कृति का हिस्सा है, आपको इसके लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा था, महिलाएं और पुरुष वैसा दिखने के लिए जीतो़ड कोशिश करते हैं जैसे वे वास्तव में नहीं हैं। आपका परिधान दरअसल आपके व्यक्तित्व, आपके माहौल और आपकी ज़डों से जु़डा होना चाहिए। अपनी एक और टिप्पणी में फैशन डिजायनर ने भारतीय महिलाओं को इस बात का श्रेय भी दिया था कि उन्होंने सा़डी को एक परिधान के तौर पर जीवित रखा है लेकिन साथ ही यह भी कहा कि धोती का रिवाज अब समाप्त हो गया है।

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