भोजपुरी फिल्मों में छा गईं काजल यादव

भोजपुरी फिल्मों में छा गईं काजल यादव

मुंबई। काजल यादव को भोजपुरी फिल्म जगत में आए अभी कुछ ही दिन हुए है, मगर इन कम दिनों में ही दर्शकों ने उन्हें सर आंखों पर बिठा लिया। हालांकि अभी तक उनकी भोजपुरी में दो फिल्में ही प्रदर्शित हुई हैं, मगर उनके फैंस के बीच लोकप्रियता काफी है। काजल की मां माया यादव भी भोजपुरी सिनेमा इंडस्ट्री में अपने जमाने की एक सफल अभिनेत्री रही हैं। काजल बिहार की रहने वाली है। उन्होंने मुंबई से प़ढाई की है। उनकी मौसी रांची की रहनेे वाली है इसलिए काजल का बचपन यही बीता है। उन्होंने शुरुआत हिंदी फिल्म ‘गार्जियन’’ से की थी। इसके बाद ब्रोकन हार्ट ऑफ डांसर बिजली रानी, रंगदारी जैसी फिल्मों में काम किया। इसके बाद दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी अभिनय करना शुरू किया। इसी क्रम में काजल को भोजपुरी फिल्मों के निर्देशक प्रेमांशु सिंह की फिल्म ‘मोहब्बत’’ में काम करने का ऑफर मिला मोहब्बत को दर्शकों ने भी काफी पसंद किया। उनकी पहली ही फिल्म हिट रही इस धमाकेदार इंट्री के बाद राजकुमार आर पांडेय जैसे भोजपुरी के चर्चित निर्माता निर्देशक ने भी काजल की प्रतिभा को पहचानने में देर नहीं की और उन्होंने अपनी फिल्म ‘ससुराल’’ में काजल को साइन कर लिया। काजल का कहना है कि वे वही फिल्में करेंगी, जिसकी कहानी में भोजपुरिया सभ्यता संस्कृति की बातें हो। वह कहती है आज की युवा पी़ढी अपने पैरेंट्स की नहीं सुनती पर सच तो यह है कि पैरेंट्स हमेशा अपने बच्चों को सही दिशा निर्देश देते हैं। पैरेंटस ही भगवान होते हैै।

Tags:

About The Author

Related Posts

Dakshin Bharat Android App Download
Dakshin Bharat iOS App Download

Latest News

स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: पी विजयन स्थानीय निकाय चुनावों में एलडीएफ उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा: पी विजयन
Photo: PinarayiVijayan FB Page
थरूर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में नगर निकाय चुनाव जीतने पर भाजपा को बधाई दी
लियोनेल मेस्सी मामला: ममता बनर्जी ने कोलकाता कार्यक्रम में 'कुप्रबंधन' को लेकर जांच के आदेश दिए
पाकिस्तानी एजेंटों को भेज रहा था खुफिया सूचना, वायुसेना का एक सेवानिवृत्त जवान गिरफ्तार!
'जो देश-प्रदेश को घुसपैठियों के सहारे चलाना चाह रहे थे, उन्हें बिहार की जनता ने बाहर का रास्ता दिखाया'
नेपाल में जेन ज़ी आंदोलन की वजह से हुआ 84 अरब रुपए से ज़्यादा का नुकसान: रिपोर्ट
यह अभिव्यक्ति नहीं, विषवमन है