चंबल के खुंखार डकैत भी खड़े हैं नोटों की लाइन में

चंबल के खुंखार डकैत भी खड़े हैं नोटों की लाइन में

ग्वालियर। ब्लैक मनी पर कंट्रोल करने के लिए ५०० व १००० रुपए के नोट बंद किए जाने के बाद से उनके बदले नई करेंसी लेने बैंकों में उम़ड रही है। सबको कतार में लग कर अपनी बारी का इंतजार करना प़ड रहा है। नोट बदलने के लिए ग्वालियर में रह रहे सरेंडर्ड डाकू मलखान सिंह भी बैंक पहुंचे, लेकिन भी़ड में कोई भी इन्हें विशेष तवज्जो देने को तैयार नहीं हुआ। मलखान को घंटों लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करना प़डा। बंद हो चुके ५०० व १००० रुपए के नोट बदल कर नई करेंसी लेने के लिए गुरुवार से बैंकों में लंबी लाइन लगी हुई हैं। इनमें सब एक समान माने जा रहे हैं, चाहे कोई मिलियनेयर हो, वीआईपी हो या आम आदमी, सबको लाइन में लग कर बारी की प्रतीक्षा करनी प़ड रही है। वर्ष १९८३ में समर्पण करने वाले उस वक्त के सबसे ज्यादा इनामी डकैत मलखान सिंह ग्वालियर में रहते हैं। मलखान सिंह भी अपने पुराने नोटों के बदले नई करेंसी लेने कंधे पर बंदूक डाल कर पहुंचे। आमतौर पर जब मलखान सिंह बंदूक कंधे पर टांग कर शहर में निकलते थे, तो उनके आसपास भी़ड लग जाती थी। लेकिन नोट बदलने के लिए बैंक के सामने लगी भी़ड मलखान को देख कर भी टस से मस नहीं हुई। मलखान को लाइन में लग कर ही नोट बदलने प़डे। इसके लिए मलखान को घंटों अपनी बारी आने के इंतजार भी करना प़डा। ८० के दशक में चंबल व यमुना के बीह़डों में आतंक मचाने वाले मलखान सिंह ने वर्ष १९८३ में भिंड में तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के सामने आत्मसमर्पण कर दिया था। मलखान सिंह पर डकैत रहने के दौरान १८५ हत्याएं, १,११२ डकैती के अलावा दर्जनों छिटपुट मारपीट के मामले दर्ज किए गए थे। इस दौरान ३२ पुलिसकर्मी की भी हत्या के मामले दर्ज हुए थे।मलखान डे़ढ दशक से अधिक ज्यादा समय तक चंबल घाटी में सक्रिय रहे, उनके गिरोह में समर्पण के वक्त १८ सदस्य थे। यूपी और एसपी को मिलाकर मलखान सिंह पर करीब १ लाख रुपए का इनाम था। सजा काटने के बाद मलखान सिंह ग्वालियर में बस गए, और खेती करने लगे। बीते साल मलखान सिंह की बायो पिक ‘दद्दा मलखान सिंह’’ भी बन चुकी है। अब मलखान सिंह राजनीति में सक्रिय रह कर खेती करते हैं।

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