मिताली को बधाई

मिताली को बधाई

बुधवार का दिन भारतीय क्रिकेट खासकर महिला क्रिकेट के लिए ढेर सारी सौगातें लेकर आया। टीम की कप्तान मिताली राज ने कई रिकार्ड बनाए, कई रिकार्ड तो़डे और यह संदेश दिया कि फील्ड चाहे जो भी हो, उनकी उपलब्धियां किसी से कमतर हरगिज नहीं हैं्। उन्होंने एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सर्वाधिक रन बनाए और शार्लोट एडवर्ड्स को पीछे छो़ड दिया। शार्लोट के खाते में अब तक ५९९२ रनों का विशाल स्कोर था जबकि मिताली राज ने अपने एक दिवसीय कैरियर में ६००० रनों का पहा़ड ख़डा कर दिया है। शार्लोट ने ये रन १९१ मैचों में बनाए थे जबकि मिताली ने १८३वें मैच की १६४वीं पारी में उनका रिकॉर्ड तो़ड दिया। रन बनाने के मामले में उन्होंने अपनी महिला प्रतिद्वंद्वियों को ही पटखनी नहीं दी बल्कि भारतीय पुरुष टीम के कई बल्लेबाजों को भी पीछे छो़ड दिया। पुरुष बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर को ६००० रन बनाने के लिए १७० पारियां खेलनी प़डी थीं, जबकि आस्ट्रेलिया के रिकी पोंटिंग ने १६६ पारियों में अपने एक दिवसीय कैरियर के ६००० रन पूरे किए थे। लप्पे लगाने में अग्रणी महेंद्र सिंह धोनी को इस आंक़डे तक पहुंचने के लिए भी १६६ पारियां खेलनी प़डी थीं्। मिताली अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट मैच में सबसे पहले वर्ष १९९९ में खेली थी। पहली बार ही उन्होंने ११४ नाबाद रन बनाए थे। उसके बाद उनकी सफलताओं का आंक़डा दिनोंदिन ब़ढता गया। वह अब तक पांच वनडे शतक जमा चुकी हैं और अपना चौथा विश्वकप खेल रही हैं्। यह मिताली राज की ही कप्तानी थी, जिसकी बदौलत वर्ष २००५ में भारतीय महिला क्रिकेट टीम वल्र्ड कप फाइनल तक जा पहुंची थी। बेशक फाइनल में उनकी टीम ऑस्ट्रेलिया से पराजित हो गई लेकिन टीम को इस शीर्ष तक ले जाने का श्रेय मिताली के जोशो-खरोश को ही दिया जाता है, जिनके नेतृत्व में टीम ने कई रिकॉर्ड बनाए और सफलताओं के स्वाद भी चखे। मिताली दुनिया की उन महिला क्रिकेटरों में से एक हैं, जिनका वनडे में औसत ५० से भी अधिक है जबकि शार्लोट का औसत महज ३८.१६ था। औसत के मामले में तीसरा स्थान भी भारतीय टीम की हरमन प्रीत कौर का है। सिर्फ बल्लेबाजी में ही भारत की तूती बोलती हो, ऐसा नहीं है। महिला वनडे में देश की झूलन गोस्वामी के नाम १८९ विकेट दर्ज हैं जो एक दिवसीय मैच में सर्वाधिक विकेट हैं्। देश के लिए निश्चित रूप से यह गौरवान्वित करने वाला क्षण था जब बेटियों ने क्रिकेट में रिकॉर्ड दर रिकार्ड दर्ज किए, वह भी उस खेल में जो कभी पुरुषों के वर्चस्व वाला समझा जाता था। देश की ये बेटियां शाबाशी व सलाम की हकदार हैं्।

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